टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' का अठारहवां सीजन इन दिनों प्रसारित हो रहा है। इस मंच पर आने वाले प्रतियोगियों के संघर्ष और सफलता के किस्से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक सफर आईपीएस मोहिता शर्मा का रहा है, जिन्होंने शो के बारहवें सीजन में अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवाया था और एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अपने नाम की थी।
कौन बनेगा करोड़पति में शानदार प्रदर्शन और अमिताभ बच्चन की तारीफ
जब मोहिता शर्मा ने हॉटसीट पर बैठकर खेल की शुरुआत की थी, तब उनके आत्मविश्वास और ज्ञान ने हर किसी का ध्यान खींच लिया था। शो के होस्ट अमिताभ बच्चन भी उनके खेल के तरीके और सूझबूझ से काफी प्रभावित हुए थे। उस सीजन के दौरान उनके द्वारा दिए गए जवाबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। आज भी उनके पुराने एपिसोड्स और वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं, जिससे लोग उनके सफर के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं।
यूपीएससी परीक्षा में चार असफलताओं के बाद मिली बड़ी कामयाबी
मोहिता शर्मा के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। आईपीएस बनने से पहले उन्हें संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में लगातार चार बार निराशा का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों को पहचाना और उनसे सीख ली। अपनी पांचवीं कोशिश में उन्होंने साल 2017 की परीक्षा में 262वीं रैंक हासिल की और अंततः आईपीएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया।
पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं और दिल्ली से की शुरुआती शिक्षा
मोहिता शर्मा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि शुरू से ही काफी मजबूत रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के द्वारका स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की थी, जहां दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उनके अंक नब्बे प्रतिशत से ज्यादा आए थे। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग यानी बीटेक की डिग्री हासिल की। उनका मानना है कि असफलताएं इंसान को कमजोर नहीं करतीं, बल्कि उसे अपनी गलतियों में सुधार करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करती हैं।
लक्ष्य के प्रति समर्पण और सफलता का मूलमंत्र
मोहिता शर्मा का यह सफर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर कोई इंसान अपने लक्ष्य से भटके बिना लगातार मेहनत करता रहे, तो नामुमकिन को भी मुकाम में बदला जा सकता है। उनकी यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में शुरुआती असफलता के बाद हिम्मत हार जाते हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि सही मानसिकता और अटूट जज्बे के साथ की गई कोशिश कभी व्यर्थ नहीं जाती।



















