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केरल की बुशरा ने LKG में छोड़ी थी पढ़ाई, अब 22 साल की उम्र में देंगी 10वीं की बोर्ड परीक्षासक्सेस स्टोरी
6 सित॰ 2026, 7:40 pm (58 मिनट पहले)· 1

केरल की बुशरा ने LKG में छोड़ी थी पढ़ाई, अब 22 साल की उम्र में देंगी 10वीं की बोर्ड परीक्षा

बचपन में आर्थिक तंगी के कारण LKG में पढ़ाई छोड़ने वाली केरल की 22 वर्षीय बुशरा अब साक्षरता मिशन की मदद से 10वीं कक्षा की परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं।

किताबी दुनिया से कम उम्र में ही नाता टूट जाने के बावजूद सीखने की ललक कभी खत्म नहीं होती। कुछ ऐसी ही प्रेरक दास्तान केरल के मलप्पुरम जिले के कोट्टाक्कल की रहने वाली बुशरा की है, जिनका औपचारिक अध्ययन एलकेजी कक्षा में ही थम गया था। तंगहाली के दौर ने उन्हें स्कूली जीवन से बहुत जल्दी दूर कर दिया था, मगर उनके भीतर का विद्यार्थी हमेशा जीवित रहा। आज बाईस साल की उम्र में वह अपने उसी अधूरे संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और जिला साक्षरता अभियान के अंतर्गत संचालित समकक्षता पाठ्यक्रम के माध्यम से दसवीं की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। खास बात यह है कि वह इस साक्षरता कार्यक्रम से जुड़ी जिले की सबसे कम उम्र की शिक्षार्थी हैं।

अधूरेपन से दोबारा पढ़ाई की शुरुआत

बचपन में कक्षाओं का सफर बुशरा के लिए बहुत संक्षिप्त साबित हुआ था क्योंकि पारिवारिक उलझनों ने उनकी शिक्षा की शुरुआत में ही ब्रेक लगा दिया था। साक्षरता मिशन के गैर-औपचारिक शिक्षण माध्यमों के जरिए वर्ष 2018 में उन्हें दोबारा किताबें थामने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने चौथी कक्षा की समकक्ष परीक्षा अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण की और सत्रह साल की उम्र में इस मुकाम को हासिल किया। इसके बाद उन्होंने अपने कदम नहीं रोके और सातवीं कक्षा के पाठ्यक्रम को भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। अब उनका लक्ष्य उससे भी बड़ा है और वह अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।

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कक्षाओं में वापसी और मां का साथ

वर्तमान समय में बुशरा कोट्टाप्पाडी गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल के समकक्ष अध्ययन केंद्र में बैठकर दसवीं कक्षा की परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। जिस बेंच और क्लासरूम से उनका नाता बचपन में ही छूट गया था, आज वही प्रांगण उनके नए सपनों को उड़ान दे रहा है। उनके लिए यह केवल एक इम्तिहान पास करने भर का जरिया नहीं है, बल्कि उस समय को दोबारा जीने का प्रयास है जिसे हालात ने उनसे छीन लिया था। इस बारे में उनका कहना है कि यह उस चीज को वापस पाने का मौका है जो हालात ने बचपन में उनसे छीन ली थी सीखने का मौका।

संघर्षों भरा पारिवारिक सफर

बुशरा अपने माता-पिता स्वर्गीय ए. शिहाबुद्दीन और सुलैखा की इकलौती संतान हैं। पिता के दुनिया से चले जाने के बाद घर की पूरी कमान उनकी मां के कंधों पर आ गई थी। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उनकी मां ने एक सुपरमार्केट में नौकरी की और बेटी की पढ़ाई की इच्छा को जिंदा रखने में हरसंभव सहायता प्रदान की। मां का यह संबल बुशरा के लिए केवल पैसों की मदद नहीं था, बल्कि विकट परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की एक बड़ी प्रेरणा साबित हुआ।

प्रशासनिक सम्मान और प्रेरणा

बुशरा के इस जज्बे और संघर्ष को जिला साक्षरता मिशन की ओर से भी सराहा गया है। अध्ययन केंद्र पर आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान जिला साक्षरता मिशन के समन्वयक पी.वी. सस्ता प्रसाद ने उन्हें शॉल भेंट कर सम्मानित किया। उनका यह सफर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि ज्ञान अर्जन के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। यदि किसी के दिल में कुछ नया सीखने की जिद बाकी हो, तो वह जीवन के किसी भी पड़ाव पर अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। एलकेजी में छूटी उनकी पढ़ाई अब दसवीं की दहलीज तक आ पहुंची है, जो केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि कभी न हार मानने वाले जज्बे की जीत है।

सवाल-जवाब

बुशरा की औपचारिक शिक्षा किस कक्षा में रुक गई थी?
परिवार की मुश्किलों के कारण बुशरा की पढ़ाई एलकेजी कक्षा में ही रुक गई थी।
बुशरा ने दोबारा पढ़ाई किस वर्ष और किस माध्यम से शुरू की?
उन्होंने वर्ष 2018 में साक्षरता मिशन के गैर-औपचारिक शिक्षा कार्यक्रम के जरिए दोबारा पढ़ाई शुरू की।
बुशरा ने चौथी कक्षा की परीक्षा किस उम्र में पास की थी?
उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में चौथी कक्षा की समकक्ष परीक्षा पास की थी।
वर्तमान में बुशरा किस परीक्षा की तैयारी कर रही हैं?
बुशरा वर्तमान में 10वीं कक्षा की इक्विवेलेंसी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
बुशरा वर्तमान में कहाँ बैठकर पढ़ाई कर रही हैं?
वह कोट्टाप्पाडी गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल के इक्विवेलेंसी स्टडी सेंटर में पढ़ाई कर रही हैं।
बुशरा के माता-पिता कौन हैं?
वह अपने माता-पिता स्वर्गीय ए. शिहाबुद्दीन और सुलैखा की इकलौती बेटी हैं।
बुशरा की पढ़ाई में उनकी मदद किसने की?
पिता के निधन के बाद उनकी मां ने सुपरमार्केट में नौकरी करके उनकी पढ़ाई में हरसंभव मदद की।
बुशरा को किसने सम्मानित किया?
जिला लिटरेसी मिशन के समन्वयक पी.वी. सस्ता प्रसाद ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
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