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ब्रश से साड़ी तक पहुंची खंडवा की आकृति अत्रे, सूरत का प्रगति ग्रुप अपना रहा उनके डिजाइनसक्सेस स्टोरी
30 जून 2026, 7:12 pm (119 दिन पहले)· 6

ब्रश से साड़ी तक पहुंची खंडवा की आकृति अत्रे, सूरत का प्रगति ग्रुप अपना रहा उनके डिजाइन

खंडवा की आकृति अत्रे ने 15 साल की कला साधना के बाद साड़ी डिजाइनिंग में अपनी खास जगह बनाई है और सूरत के प्रगति ग्रुप ने उनके डिजाइन अपने कलेक्शन में शामिल किए हैं। उनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है।

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से निकलीं आकृति अत्रे ने अपनी कला और अथक परिश्रम के बल पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जिसे देखकर पूरा निमाड़ अंचल गर्व से भर उठता है। छोटे शहर की सीमाओं को पार कर बड़े मंच तक पहुंचने वाली इस कलाकार की पहचान अब पूरे देश में बन रही है।

सूरत के प्रगति ग्रुप ने अपनाए उनके डिजाइन

आकृति अत्रे पिछले 15 वर्षों से कला के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान देती आ रही हैं और अब उन्होंने साड़ी डिजाइनिंग को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बना लिया है। उनके डिजाइनों की प्रतिभा इतनी प्रभावशाली निकली कि सूरत के मशहूर प्रगति ग्रुप ने उन्हें अपने साड़ी कलेक्शन का हिस्सा बना लिया। आज उनके बनाए डिजाइन कॉटन साड़ियों पर छपकर देश के बाजारों में पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में कई सेलिब्रिटी भी इन साड़ियों को पहनती दिख सकती हैं।

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गुरु बैजनाथ सराफ की सीख ने बदला जीवन

आकृति अत्रे मानती हैं कि उनकी इस कामयाबी के पीछे उनके कला गुरु बैजनाथ सराफ 'वशिष्ठ सर' का अहम योगदान है। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी, ऑइल पेंटिंग और एक्रेलिक आर्ट जैसी विधाओं में निपुणता हासिल की। इसी प्रशिक्षण के दौरान उनके मन में डिजाइनिंग की रुचि जागी और उन्होंने इसे करियर के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया। गुरुजी की ही सलाह पर उन्होंने अपने कुछ डिजाइन सूरत के एक टेक्सटाइल ग्रुप को भेजे। उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट के साथ-साथ एक कलरफुल डिजाइन भी भेजी। दोनों ही डिजाइन वहां चयनित हो गईं और कॉटन साड़ियों पर प्रिंट होकर बाजार में उतारी गईं।

जब एक डिजाइन ने दिलाई बड़ी पहचान

आकृति अत्रे ने बताया: "मैंने एक छोटे शहर में बैठकर सिर्फ एक डिजाइन भेजी थी, लेकिन यह नहीं सोचा था कि वह मुझे इतनी बड़ी पहचान दिलाएगी। आज जब मेरी डिजाइन की साड़ी लोग पहनते हैं, तो बेहद गर्व महसूस होता है।" वे यह भी मानती हैं कि पैसा अपनी जगह जरूरी है, लेकिन जब काम को असली पहचान मिलती है तो वह खुशी किसी भी चीज से अलग होती है।

चार शहरों में कला प्रदर्शनियां, बेंगलुरु में पुरस्कार

आकृति अत्रे ने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और बेंगलुरु में कला प्रदर्शनियों में भाग लिया है। बेंगलुरु में उन्हें ऑसम आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा आकाशवाणी पर उनके इंटरव्यू प्रसारित हुए हैं और उन्होंने कई मंचों पर एंकरिंग का काम भी किया है।

अमेरिका तक पहुंची इस कलाकार की कला

आकृति की प्रतिभा देश की सीमाओं तक नहीं रुकी। उनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है, जहां पूजा की थालियां, शुभ-लाभ और कलश जैसे उत्पादों के डिजाइन के लिए उनसे खास ऑर्डर लिया जाता है। दिल्ली के साथ-साथ विदेशों में भी उनके ग्राहक हैं जो उन्हें विशेष डिजाइन बनाने के लिए ऑर्डर देते हैं।

हुनर की कोई सरहद नहीं होती

आकृति अत्रे की यह सफलता उन तमाम युवाओं के लिए जीती-जागती प्रेरणा है जो छोटे शहरों में रहते हुए बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि अगर लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती। खंडवा की इस होनहार बेटी ने साबित किया है कि कला को न भूगोल की सीमाएं बांध सकती हैं और न भाषा की। जब हुनर सच्चा हो और मेहनत निरंतर हो, तो पहचान खुद-ब-खुद रास्ता बना लेती है।

सवाल-जवाब

आकृति अत्रे कहां की रहने वाली हैं?
आकृति अत्रे मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की रहने वाली हैं।
उन्होंने कितने वर्षों से कला के क्षेत्र में काम किया है?
आकृति अत्रे पिछले 15 वर्षों से कला की विभिन्न विधाओं में सक्रिय हैं।
सूरत के किस ग्रुप ने उनके डिजाइन अपनाए?
सूरत के मशहूर प्रगति ग्रुप ने उनके डिजाइनों को अपने साड़ी कलेक्शन में शामिल किया।
उनके कला गुरु कौन हैं?
उनके कला गुरु बैजनाथ सराफ 'वशिष्ठ सर' हैं, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने पेंटिंग से डिजाइनिंग तक का सफर तय किया।
आकृति को बेंगलुरु में कौन सा पुरस्कार मिला?
उन्हें बेंगलुरु में ऑसम आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
उन्होंने किन शहरों में कला प्रदर्शनियों में भाग लिया?
उन्होंने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और बेंगलुरु में कला प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया है।
उनका सिरामिक आर्ट वर्क कहां तक पहुंचा है?
उनका सिरामिक आर्ट वर्क अमेरिका तक पहुंच चुका है, जहां पूजा की थालियां, शुभ-लाभ और कलश जैसे उत्पादों के लिए उनके डिजाइन की मांग है।
साड़ी उद्योग में उनकी पहली कामयाबी कैसे मिली?
गुरुजी की सलाह पर उन्होंने सूरत के एक टेक्सटाइल ग्रुप को ब्लैक एंड व्हाइट और एक कलरफुल डिजाइन भेजी, जो दोनों ही चयनित हो गईं और कॉटन साड़ियों पर प्रिंट होकर बाजार में उतारी गईं।
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