पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि प्रखंड स्थित घोघराहा गांव में सौर ऊर्जा की मदद से एक ग्रामीण व्यवसायी ने अपनी किस्मत बदल दी है। स्थानीय निवासी अरविंद कुमार ने अपनी आटा चक्की को पारंपरिक बिजली के बजाय सोलर पावर से जोड़कर न केवल अपने मासिक खर्चों में बड़ी कटौती की है, बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ा लिया है।
भारी-भरकम बिजली बिल से परेशान थे अरविंद
सोलर पैनल लगाने से पहले अरविंद अपनी आटा चक्की को सरकारी बिजली आपूर्ति के सहारे चलाते थे। हालांकि, हर महीने आने वाला भारी-भरकम बिजली बिल उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा लील जाता था। अरविंद के मुताबिक, पहले उन्हें प्रति माह 15000 रुपये से लेकर 18000 रुपये तक बिजली का बिल भरना पड़ता था। इतने अधिक संचालन खर्च के कारण मेहनत करने के बाद भी हाथ में नाममात्र की बचत ही आ पाती थी। इस समस्या से निजात पाने के लिए वे किसी किफायती विकल्प की तलाश कर रहे थे।
फेसबुक से मिला सोलर पावर प्लांट लगाने का आइडिया
विकल्पों की खोज के दौरान अरविंद को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए सौर ऊर्जा से आटा चक्की चलाने की जानकारी मिली। जब उन्होंने इस विषय पर और पड़ताल की, तो उन्हें बनारस स्थित अन्या ग्रीन एनर्जी नामक कंपनी के बारे में पता चला। यह कंपनी चक्की की मोटर क्षमता के हिसाब से अलग-अलग आकार के सोलर पैनल और पूरा सेटअप उपलब्ध कराती है। इसके बाद अरविंद ने अपने परिसर में सोलर सिस्टम स्थापित कराने का फैसला किया।
लागत, ईएमआई और 25 साल की लंबी वारंटी
इस सोलर सेटअप को एकमुश्त नकद भुगतान पर लगाने में कुल 5 लाख 20 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं, अगर कोई इसे किस्तों यानी ईएमआई पर लेता है, तो कुल लागत 6 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। अरविंद ने ईएमआई का रास्ता चुना, जिसके तहत वे अब हर महीने 12000 रुपये की किस्त चुका रहे हैं। यह राशि उनके पुराने 15000 से 18000 रुपये के मासिक बिजली बिल की तुलना में काफी कम है। सबसे खास बात यह है कि इस सोलर सिस्टम पर कंपनी की ओर से 25 साल की लंबी वारंटी दी गई है, जिससे लंबे समय तक रखरखाव का झंझट खत्म हो जाता है।
सुबह 7 से शाम 5 बजे तक निर्बाध संचालन और तगड़ी पिसाई
सौर ऊर्जा से मिलने वाली निरंतर बिजली के कारण अब अरविंद की चक्की सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक बिना किसी रुकावट के चलती है। इस दौरान वे रोजाना 5 से 7 क्विंटल गेहूं की पिसाई आसानी से कर लेते हैं। गेहूं के अलावा, वे अपनी इस सौर संचालित चक्की में चावल और विभिन्न प्रकार के मसालों की पिसाई भी करते हैं। ऊर्जा के स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोत को अपनाकर अरविंद न केवल अपना व्यवसाय सफलतापूर्वक चला रहे हैं, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।



















