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छपरा के किसान ने जैविक तरीके से भिंडी की खेती से बदली अपनी किस्मत, 5 कट्ठे से हो रही तगड़ी कमाईसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 3

छपरा के किसान ने जैविक तरीके से भिंडी की खेती से बदली अपनी किस्मत, 5 कट्ठे से हो रही तगड़ी कमाई

बिहार के छपरा में किसान उमेश कुमार प्रसाद जैविक खाद से भिंडी की खेती कर रहे हैं और मात्र 5 कट्ठा खेत से हर हफ्ते करीब 2 क्विंटल भिंडी बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.

विक्रम यादवविक्रम यादववरिष्ठ संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बिहार के छपरा जिले में किसान अब सरकार की जैविक खेती मुहिम को अपनी मेहनत से आगे बढ़ा रहे हैं. मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव में किसान उमेश कुमार प्रसाद ने मात्र 5 कट्ठा खेत में भिंडी की ऐसी जबरदस्त फसल उगाई है कि हर हफ्ते करीब 2 क्विंटल भिंडी बाजार में बिक रही है. जैविक खेती की यह कहानी इलाके के दूसरे किसानों के लिए भी मिसाल बन गई है.

कृषि विज्ञान केंद्र से मिली सही दिशा

कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर कैंप लगा रहे हैं और किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर जैविक व प्राकृतिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद किसान अब पुराने तरीके छोड़कर नई विधि अपना रहे हैं. इसका सीधा फायदा यह हो रहा है कि फसल की पैदावार बढ़ रही है, किसानों की आय दोगुनी हो रही है और साथ ही खेतों की मिट्टी भी बंजर होने से बच रही है.

शीतलपुर गांव के किसान बदल रहे तकदीर

मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव में उमेश कुमार और बगेंद्र प्रसाद सहित दर्जनों किसान अब बड़े पैमाने पर सब्जियों की जैविक खेती कर रहे हैं. इस तकनीक की बदौलत फसलों में जबरदस्त फलन देखने को मिल रहा है और गांव के कई किसान इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं.

5 कट्ठे से हर दो दिन पर 70 किलो भिंडी

उमेश कुमार प्रसाद ने अपने खेत में जैविक और प्राकृतिक विधि से उन्नत किस्म की भिंडी लगाई है. नतीजा यह हुआ कि उनके खेत में भिंडी की फसल इतनी जबरदस्त हुई है कि वे एक दिन बीच करके यानी एक दिन के अंतराल पर मात्र 5 कट्ठा खेत से 70 किलो तक भिंडी तोड़कर बाजार में बेच रहे हैं. इस हिसाब से हर हफ्ते उनके खेत से करीब 2 क्विंटल भिंडी निकल रही है.

घर पर ही तैयार करते हैं जैविक खाद

उमेश कुमार प्रसाद ने बताया कि वे खाद के लिए बाजार पर बिल्कुल निर्भर नहीं हैं. वे अपने घर पर ही गोबर, सूखी घास और पतवार यानी कचरे को मिलाकर प्राकृतिक जैविक खाद तैयार करते हैं और इसी खाद को खेतों में डालते हैं. इसी वजह से भिंडी के पौधे काफी हरे-भरे नजर आते हैं और हर पत्ते के पास फूल और फल साफ दिखते हैं. इस विधि से खेती की लागत लगभग न के बराबर आती है, जबकि मुनाफा काफी तगड़ा मिलता है.

'राधिका' वैरायटी ने दिलाया बंपर रिजल्ट

जैविक विधि के साथ-साथ उमेश प्रसाद ने बीज के चुनाव में भी सूझबूझ दिखाई. उन्होंने अपने खेत में 'राधिका' वैरायटी की हाइब्रिड भिंडी लगाई है. इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पौधा छोटा रहते हुए ही इसमें फलन शुरू हो जाता है और यह आखिरी समय तक भरपूर पैदावार देता रहता है. उमेश कुमार का यह फॉर्मूला आसपास के किसानों को भी खूब पसंद आ रहा है और लोग उनसे प्रेरणा लेकर यह तकनीक सीख रहे हैं.

मंडी में हाथों-हाथ बिक जाती है यह भिंडी

उमेश कुमार प्रसाद ने बताया कि सारण की धरती पर राधिका वैरायटी की भिंडी का नतीजा बहुत शानदार रहा है. इसके पौधे और फल गहरे हरे रंग के होते हैं, जिससे इनमें चमक ज्यादा दिखाई देती है. यही वजह है कि मंडी में पहुंचते ही यह भिंडी हाथों-हाथ बिक जाती है और इसकी अच्छी कीमत भी मिल जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि रासायनिक खाद से उगाई गई भिंडी के मुकाबले इसका स्वाद भी काफी बेहतर होता है.

सेहत भी बेहतर, बचत भी ज्यादा

उमेश कुमार प्रसाद के मुताबिक जैविक विधि से उगाई सब्जियां खाने से सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. रासायनिक खेती के मुकाबले जैविक खेती में लागत बहुत कम आती है, जिससे शुद्ध बचत कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि अब इलाके के ज्यादातर किसान रासायनिक खादों को छोड़कर जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

इसका आप पर असर

  • भारत में: जैविक खेती अपनाकर किसान रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च घटा सकते हैं और सब्जियों से मिलने वाली आय बढ़ा सकते हैं.
  • छपरा/सारण में: मांझी प्रखंड के किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से मिल रहे प्रशिक्षण से वे बिना ज्यादा खर्च किए भिंडी जैसी सब्जियों से हर हफ्ते अच्छी कमाई कर पा रहे हैं.

प्रेरणा और सीख

  • सही ट्रेनिंग लें: कृषि विज्ञान केंद्र जैसे सरकारी संस्थानों से मुफ्त तकनीकी जानकारी लेकर खेती का पूरा तरीका बदला जा सकता है.
  • लागत घटाएं: गोबर, सूखी घास और पतवार से घर पर ही खाद बनाकर बाजार पर निर्भरता कम की जा सकती है.
  • सही बीज चुनें: राधिका जैसी उन्नत हाइब्रिड वैरायटी चुनने से कम जमीन में भी जल्दी और ज्यादा पैदावार मिल सकती है.
  • गुणवत्ता पर ध्यान दें: जैविक तरीके से उगाई फसल का रंग, चमक और स्वाद बेहतर होने से बाजार में मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती है.

सवाल-जवाब

छपरा के किसान उमेश कुमार प्रसाद कितनी जमीन में भिंडी उगा रहे हैं?
वे मात्र 5 कट्ठा खेत में भिंडी की खेती कर रहे हैं.
उमेश कुमार हर बार खेत से कितनी भिंडी तोड़ते हैं?
वे एक दिन के अंतराल पर करीब 70 किलो भिंडी तोड़कर बाजार में बेचते हैं, जिससे हर हफ्ते करीब 2 क्विंटल भिंडी निकलती है.
उमेश कुमार किस वैरायटी की भिंडी उगा रहे हैं?
वे 'राधिका' वैरायटी की हाइब्रिड भिंडी उगा रहे हैं.
उमेश कुमार अपने खेत के लिए खाद कहां से लाते हैं?
वे बाजार से खाद नहीं खरीदते, बल्कि गोबर, सूखी घास और पतवार को मिलाकर घर पर ही प्राकृतिक जैविक खाद तैयार करते हैं.
किसानों को जैविक खेती की ट्रेनिंग कौन दे रहा है?
कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वैज्ञानिक कैंप लगाकर किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं और प्रशिक्षण दे रहे हैं.
जैविक तरीके से उगाई भिंडी की खासियत क्या है?
यह भिंडी गहरे हरे रंग की और चमकदार होती है, इसका स्वाद रासायनिक खाद से उगाई भिंडी से बेहतर होता है और मंडी में हाथों-हाथ बिक जाती है.
विक्रम यादव
लेखक के बारे मेंविक्रम यादववरिष्ठ संवाददाता पटना
विशेषज्ञताबिहार समाचार, क्षेत्रीय राजनीति, अपराध, शासन, ब्रेकिंग न्यूज़, बुनियादी ढाँचा, सामाजिक मुद्दे, लोक नीति, चुनाव, ग्राउंड रिपोर्टिंग

विक्रम यादव एक बिहार संवाददाता हैं जो पूरे राज्य की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, अपराध, शासन और सामाजिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे अहम क्षेत्रीय घटनाओं पर समय पर अपडेट देते हैं।

विक्रम यादव एक बिहार संवाददाता हैं जो पूरे बिहार की राजनीति, शासन, अपराध, लोक नीति, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित क्षेत्रीय पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, राज्य सरकार के फ़ैसले, चुनाव, कानून-व्यवस्था अपडेट और स्थानीय समुदायों को प्रभावित करने वाले बड़े घटनाक्रम कवर करते हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग और तथ्यात्मक सटीकता पर मज़बूत ज़ोर के साथ विक्रम पूरे बिहार के क्षेत्रीय मुद्दों, जनकल्याण पहलों, आर्थिक बदलावों और राजनीतिक गतिविधियों की गहन कवरेज देते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का मक़सद पाठकों को राज्य को आकार देने वाले अहम घटनाक्रमों से अवगत रखना है।

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