बिहार के छपरा जिले में किसान अब सरकार की जैविक खेती मुहिम को अपनी मेहनत से आगे बढ़ा रहे हैं. मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव में किसान उमेश कुमार प्रसाद ने मात्र 5 कट्ठा खेत में भिंडी की ऐसी जबरदस्त फसल उगाई है कि हर हफ्ते करीब 2 क्विंटल भिंडी बाजार में बिक रही है. जैविक खेती की यह कहानी इलाके के दूसरे किसानों के लिए भी मिसाल बन गई है.
कृषि विज्ञान केंद्र से मिली सही दिशा
कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर कैंप लगा रहे हैं और किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर जैविक व प्राकृतिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद किसान अब पुराने तरीके छोड़कर नई विधि अपना रहे हैं. इसका सीधा फायदा यह हो रहा है कि फसल की पैदावार बढ़ रही है, किसानों की आय दोगुनी हो रही है और साथ ही खेतों की मिट्टी भी बंजर होने से बच रही है.
शीतलपुर गांव के किसान बदल रहे तकदीर
मांझी प्रखंड के शीतलपुर गांव में उमेश कुमार और बगेंद्र प्रसाद सहित दर्जनों किसान अब बड़े पैमाने पर सब्जियों की जैविक खेती कर रहे हैं. इस तकनीक की बदौलत फसलों में जबरदस्त फलन देखने को मिल रहा है और गांव के कई किसान इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं.
5 कट्ठे से हर दो दिन पर 70 किलो भिंडी
उमेश कुमार प्रसाद ने अपने खेत में जैविक और प्राकृतिक विधि से उन्नत किस्म की भिंडी लगाई है. नतीजा यह हुआ कि उनके खेत में भिंडी की फसल इतनी जबरदस्त हुई है कि वे एक दिन बीच करके यानी एक दिन के अंतराल पर मात्र 5 कट्ठा खेत से 70 किलो तक भिंडी तोड़कर बाजार में बेच रहे हैं. इस हिसाब से हर हफ्ते उनके खेत से करीब 2 क्विंटल भिंडी निकल रही है.
घर पर ही तैयार करते हैं जैविक खाद
उमेश कुमार प्रसाद ने बताया कि वे खाद के लिए बाजार पर बिल्कुल निर्भर नहीं हैं. वे अपने घर पर ही गोबर, सूखी घास और पतवार यानी कचरे को मिलाकर प्राकृतिक जैविक खाद तैयार करते हैं और इसी खाद को खेतों में डालते हैं. इसी वजह से भिंडी के पौधे काफी हरे-भरे नजर आते हैं और हर पत्ते के पास फूल और फल साफ दिखते हैं. इस विधि से खेती की लागत लगभग न के बराबर आती है, जबकि मुनाफा काफी तगड़ा मिलता है.
'राधिका' वैरायटी ने दिलाया बंपर रिजल्ट
जैविक विधि के साथ-साथ उमेश प्रसाद ने बीज के चुनाव में भी सूझबूझ दिखाई. उन्होंने अपने खेत में 'राधिका' वैरायटी की हाइब्रिड भिंडी लगाई है. इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पौधा छोटा रहते हुए ही इसमें फलन शुरू हो जाता है और यह आखिरी समय तक भरपूर पैदावार देता रहता है. उमेश कुमार का यह फॉर्मूला आसपास के किसानों को भी खूब पसंद आ रहा है और लोग उनसे प्रेरणा लेकर यह तकनीक सीख रहे हैं.
मंडी में हाथों-हाथ बिक जाती है यह भिंडी
उमेश कुमार प्रसाद ने बताया कि सारण की धरती पर राधिका वैरायटी की भिंडी का नतीजा बहुत शानदार रहा है. इसके पौधे और फल गहरे हरे रंग के होते हैं, जिससे इनमें चमक ज्यादा दिखाई देती है. यही वजह है कि मंडी में पहुंचते ही यह भिंडी हाथों-हाथ बिक जाती है और इसकी अच्छी कीमत भी मिल जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि रासायनिक खाद से उगाई गई भिंडी के मुकाबले इसका स्वाद भी काफी बेहतर होता है.
सेहत भी बेहतर, बचत भी ज्यादा
उमेश कुमार प्रसाद के मुताबिक जैविक विधि से उगाई सब्जियां खाने से सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. रासायनिक खेती के मुकाबले जैविक खेती में लागत बहुत कम आती है, जिससे शुद्ध बचत कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि अब इलाके के ज्यादातर किसान रासायनिक खादों को छोड़कर जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं.













