भारतीय टेक इंडस्ट्री में अक्सर यह माना जाता है कि शीर्ष पैकेज और शानदार करियर केवल आईआईटी या अन्य टियर-1 इंजीनियरिंग संस्थानों से पढ़े स्नातकों के हिस्से ही आते हैं। हालांकि, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के 11 साल के करियर ग्राफ ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। वर्ष 2015 में महज 37,000 रुपये प्रति माह की पहली सैलरी पर काम शुरू करने वाले इस प्रोफेशनल ने लगातार मेहनत, सही रणनीतिक फैसलों और जोखिम उठाने की क्षमता के बल पर आज 2.2 करोड़ रुपये सालाना का कुल पैकेज हासिल कर लिया है। एक गुमनाम सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किए गए इस अनुभव ने टेक बिरादरी और युवाओं के बीच करियर ग्रोथ, मेंटल हेल्थ और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दिया है।
2015 से 2019: सर्विस कंपनी से शुरुआत और कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने का फैसला
इस इंजीनियर के पेशेवर सफर का आगाज साल 2015 में हुआ था। उन्होंने एक टेक सर्विस और कंसल्टिंग फर्म में बतौर जूनियर इंजीनियर कदम रखा। उस वक्त उन्हें 37,000 रुपये महीने का वेतन मिलता था। आज के वेतनमान के हिसाब से भले ही यह राशि बहुत बड़ी न लगे, लेकिन करियर की शुरुआत करने वाले एक युवा के लिए यह एक व्यावहारिक और सीखने से भरा अवसर था। उस कंपनी के कार्य संस्कृति और माहौल ने उन्हें तकनीक की गहरी समझ विकसित करने का मौका दिया। उन्होंने वहां विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर काम करते हुए अपनी कोडिंग और सिस्टम डिजाइन की बुनियादी क्षमताओं को मजबूत किया।
सर्विस कंपनी में उन्होंने लगातार चार वर्षों तक निष्ठापूर्वक काम किया। उनकी लगन और बेहतर प्रदर्शन का परिणाम यह रहा कि कंपनी ने उन्हें पदोन्नति दी और उनका मासिक वेतन बढ़कर लगभग 1.1 लाख रुपये प्रति माह (करीब 13.2 लाख रुपये सालाना) तक पहुंच गया। एक स्थिर नौकरी और सम्मानजनक सैलरी मिलने के बावजूद, इंजीनियर को महसूस हुआ कि वे अपने कम्फर्ट ज़ोन में बंधते जा रहे हैं। तकनीकी क्षेत्र की तेज रफ्तार प्रगति को देखते हुए उन्हें लगा कि अगर उन्होंने जल्द ही कोई बड़ी छलांग नहीं लगाई, तो उनका करियर एक जगह ठहर जाएगा। इसी सोच ने उन्हें वैश्विक कंपनियों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया।
FAANG में एंट्री और 2020 का मानसिक तनाव: जब छोड़ी 44 लाख की नौकरी
साल 2019 में उनके करियर ने एक बड़ा मोड़ लिया। कठिन इंटरव्यू प्रक्रियाओं को पार करते हुए उन्होंने दिग्गज टेक कंपनियों के समूह, जिन्हें आमतौर पर FAANG (फेसबुक/मेटा, अमेज़न, ऐपल, नेटफ्लिक्स और गूगल) कहा जाता है, में से एक में स्थान बना लिया। वहां उन्हें 44 लाख रुपये सालाना का पैकेज ऑफर हुआ। यह उनके पिछले पैकेज से लगभग तीन गुना ज्यादा था। इस नई भूमिका ने न केवल उनकी वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि उन्हें बड़े पैमाने पर काम करने वाले वैश्विक कॉरपोरेट ढांचे और बड़े डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम्स को संभालने का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्रदान किया।
हालांकि, इस बड़ी सफलता के तुरंत बाद साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी का दौर शुरू हो गया। महामारी के दौरान पूरी दुनिया में वर्क फ्रॉम होम लागू हुआ, जिससे काम और निजी जिंदगी के बीच की सीमाएं धुंधली पड़ गईं। काम का बोझ अचानक कई गुना बढ़ गया, जिसके कारण वे गंभीर मानसिक तनाव और बर्नआउट के शिकार होने लगे। अपनी सेहत और मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने मध्य 2020 में एक बेहद साहसिक कदम उठाया। हाथ में कोई दूसरा जॉब ऑफर न होने के बावजूद उन्होंने 44 लाख रुपये की इस आकर्षक नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
बेरोजगारी से उबरकर अमेरिकी स्टार्टअप में वापसी और तरक्की
नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें कुछ महीनों तक बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। बिना किसी आय के रहना आसान नहीं था, लेकिन इस दौरान उन्होंने खुद को दोबारा संगठित किया और नई तकनीकी योग्यताओं पर ध्यान केंद्रित किया। जल्द ही उनकी किस्मत ने करवट ली और उन्हें अमेरिका स्थित एक रियल एस्टेट स्टार्टअप से जॉब ऑफर मिला। इस कंपनी ने उन्हें 50 लाख रुपये सालाना का सैलरी पैकेज पेश किया। चूंकि वे कुछ समय से बेरोजगार थे, इसलिए उन्होंने बिना किसी झिझक के यह ऑफर स्वीकार कर लिया।
स्टार्टअप के माहौल में उन्होंने दिन-रात मेहनत की और अपनी उपयोगिता साबित की। उनकी तकनीकी क्षमता और समस्या सुलझाने के कौशल को देखते हुए कंपनी ने महज 8 महीनों के भीतर ही उन्हें प्रमोट कर दिया, जिससे उनका सालाना पैकेज बढ़कर 65 लाख रुपये हो गया। इसके बाद वर्ष 2021 के अंत में हुए वार्षिक मूल्यांकन (अप्रेजल) के बाद उनका वेतन 70 लाख रुपये प्रति वर्ष के करीब पहुंच गया। स्टार्टअप में काम करने से उन्हें उत्पाद विकास और बिजनेस ऑपरेशंस की व्यावहारिक समझ मिली।
फिनटेक स्टार्टअप में CTO की पारी और विनियामक चुनौतियां
करियर में लगातार ग्रोथ हासिल करने के बाद, मई 2022 में उन्होंने खुद का कुछ नया निर्माण करने की दिशा में कदम बढ़ाया। वे एक उभरते हुए फिनटेक स्टार्टअप में मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) के रूप में शामिल हो गए। शुरुआती दौर में स्टार्टअप की प्रगति शानदार रही और बिजनेस मॉडल ने काफी रफ्तार पकड़ी। लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का दायरा बढ़ा, वित्तीय सेवाओं से जुड़ी विनियामक मंजूरियों और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर अड़चनें पैदा होने लगीं।
अपेक्षित विनियामक अनुमतियां न मिलने के कारण बिजनेस पर दबाव बढ़ता गया। मार्च 2024 तक आते-आते स्थितियां और अधिक प्रतिकूल हो गईं, जब कंपनी के एक सह-संस्थापक ने स्टार्टअप छोड़ दिया। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि कंपनी का आगे बढ़ना बेहद अनिश्चित है। परिस्थितियों का आकलन करने के बाद, अगस्त 2024 में उन्होंने बेहद भारी मन से CTO का पद छोड़ दिया और एक बार फिर नई नौकरी की तलाश शुरू कर दी।
टॉक्सिक वर्क कल्चर का सामना: 1.2 करोड़ के पैकेज को क्यों कहा अलविदा
अपनी नई खोज के तहत अक्टूबर 2024 में उन्हें एक भारतीय स्टार्टअप में टेक लीडरशिप की भूमिका मिली, जहां उन्हें 1.2 करोड़ रुपये सालाना का शानदार पैकेज ऑफर किया गया। इतनी बड़ी सैलरी मिलने के बावजूद, वहां का अनुभव सुखद नहीं रहा। काम शुरू करने के तीन महीनों के भीतर ही उन्हें अहसास हो गया कि उस संस्थान की कार्य संस्कृति बेहद टॉक्सिक है। कंपनी का बुनियादी ढांचा और कार्यप्रणाली सस्ते श्रम के शोषण पर टिकी हुई थी, जहां कर्मचारियों के कल्याण और पेशेवर सम्मान की अनदेखी की जाती थी।
उन्होंने माना कि केवल भारी-भरकम पैकेज के लिए एक खराब और तनावपूर्ण माहौल में काम करना सही फैसला नहीं है। अपने सिद्धांतों से समझौता न करते हुए उन्होंने तीन महीने के भीतर ही उस 1.2 करोड़ रुपये की नौकरी को अलविदा कह दिया और बेहतर कार्य संस्कृति वाली जगह की तलाश करने लगे।
2.2 करोड़ के मुकाम तक वापसी: स्टॉक ग्रोथ और टियर-1 कॉलेज मिथक की विदाई
फरवरी 2025 में उनकी वर्षों की मेहनत और विविध अनुभवों का सकारात्मक परिणाम सामने आया, जब उन्हें फिर से एक FAANG कंपनी में वरिष्ठ भूमिका के लिए चुना गया। इस बार उन्हें 1.5 करोड़ रुपये का शुरुआती पैकेज मिला। कंपनी में उनके उत्कृष्ट तकनीकी योगदान और लीडरशिप को देखते हुए मार्च 2026 में उन्हें दोबारा पदोन्नति दी गई। इस प्रमोशन के साथ उनका बेस पैकेज 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष को पार कर गया। इसके अतिरिक्त, कंपनी के स्टॉक एप्रिसिएशन और इक्विटी कंपोनेंट को मिलाकर आज उनका कुल सालाना पैकेज लगभग 2.2 करोड़ रुपये बैठता है।
अपने इस 11 वर्षीय उतार-चढ़ाव भरे सफर का विश्लेषण करते हुए उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न तो किसी संपन्न आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं और न ही उनके पास आईआईटी जैसी किसी नामचीन टियर-1 संस्था की डिग्री है। उन्होंने कहा कि 11 साल तक लगातार नई तकनीकों को सीखने और दृढ़ संकल्प के साथ काम करने के बाद, आज वे उसी मुकाम और पैकेज पर खड़े हैं जहां टियर-1 संस्थानों के स्नातक पहुंचते हैं। यह उपलब्धि उनके लिए केवल एक वित्तीय सफलता नहीं, बल्कि लगन और निरंतर प्रयास की एक बड़ी जीत है।



















