वैश्विक टेक कंपनियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा कायम करने की होड़ बेहद तेज हो चुकी है। दिग्गज टेक कंपनियां केवल नए AI टूल्स और सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया के सबसे काबिल शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को अपनी टीम में शामिल करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही हैं। इसी बीच भारतीय मूल के युवा AI रिसर्चर त्रपित बंसल टेक जगत में जबरदस्त चर्चा का केंद्र बन गए हैं। सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी मेटा ने अपनी नई स्थापित AI रिसर्च डिविजन में फाउंडिंग रिसर्चर के तौर पर शामिल करने के लिए त्रपित बंसल को करीब 800 करोड़ रुपये का सालाना सैलरी पैकेज ऑफर किया है। मार्क जुकरबर्ग की अगुवाई वाली मेटा द्वारा दिया गया यह विशालकाय पैकेज एआई उद्योग में प्रतिभाओं को हासिल करने की भयंकर प्रतिस्पर्धा को साफ तौर पर दर्शाता है।
आईआईटी कानपुर से शुरू हुआ गणित और सांख्यिकी का मजबूत आधार
त्रपित बंसल की यह असाधारण सफलता रातों-रात हासिल नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक दशक से भी ज्यादा समय की कड़ी मेहनत, अटूट समर्पण और बुनियादी विषयों की गहरी समझ शामिल है। आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र कंप्यूटर साइंस या कोडिंग का शॉर्टकट चुनते हैं, वहीं त्रपित बंसल ने गणित और सांख्यिकी को अपनी शिक्षा का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने साल 2007 से 2012 के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से मैथ्स एंड स्टैटिस्टिक्स में 5-वर्षीय एकीकृत एमएससी (Integrated MSc) की डिग्री प्राप्त की। एआई और मशीन लर्निंग की पूरी आधुनिक संरचना वास्तव में गणितीय समीकरणों और सांख्यिकी के सिद्धांतों पर ही टिकी हुई है। इसी मजबूत बुनियादी समझ ने उन्हें जटिल एल्गोरिदम को गहराई से समझने में मदद की।
आईआईटी कानपुर से अपनी डिग्री पूरी करने के पश्चात त्रपित बंसल ने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की प्रतिष्ठित मशीन लर्निंग लैब में कदम रखा। वहां उन्होंने 2 साल तक रिसर्च असिस्टेंट के रूप में काम करते हुए मशीन लर्निंग के उन्नत सिद्धांतों और व्यावहारिक तकनीकों पर गहन शोध किया। इस दौरान उन्होंने समझा कि किस प्रकार सैद्धांतिक गणित को कंप्यूटर एल्गोरिदम में बदलकर मशीनों को सोचने और सीखने के काबिल बनाया जा सकता है।
अमेरिका में उच्च शिक्षा और शीर्ष टेक कंपनियों में रिसर्च का अनुभव
शोध के अपने दायरे को और व्यापक बनाने के उद्देश्य से त्रपित बंसल अमेरिका चले गए। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट में दाखिला लिया और कंप्यूटर साइंस विषय में मास्टर्स तथा पीएचडी (PhD) की उपाधि हासिल की। अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान उन्होंने नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), डीप लर्निंग और मेटा-लर्निंग जैसे जटिल विषयों पर विशेषज्ञता प्राप्त की। शोध के दौरान ही दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें रिसर्च इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए।
त्रपित बंसल ने अपनी उच्च शिक्षा के दौरान चार प्रमुख टेक कंपनियों में महत्वपूर्ण रिसर्च इंटर्नशिप की। फेसबुक (मेटा) में उन्होंने नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग के लिए डीप लर्निंग मॉडल पर काम किया। गूगल में उन्होंने डीप लर्निंग और नॉलेज ग्राफ पर रिसर्च की। माइक्रोसॉफ्ट की लैब में उन्होंने एनएलपी और मेटा-लर्निंग तकनीकों पर काम किया, जबकि ओपनएआई में उन्होंने मल्टी-एजेंट रीइन्फोर्समेंट लर्निंग प्रोजेक्ट्स में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन विविध शोध अनुभवों ने उन्हें उद्योग की सबसे जटिल समस्याओं को हल करने का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया।
ओपनएआई में ओ1 मॉडल का निर्माण और मेटा में फाउंडिंग भूमिका
साल 2022 में त्रपित बंसल आधिकारिक तौर पर ओपनएआई की तकनीकी टीम में शामिल हुए। वहां उन्होंने एआई दुनिया के मशहूर और दिग्गज वैज्ञानिक इल्या सुतस्केवर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रीइन्फोर्समेंट लर्निंग और रीजनिंग पर आधारित आधुनिक एआई मॉडल विकसित करने में मुख्य भूमिका निभाई। ओपनएआई के बहुचर्चित ओ1 (o1) रीज़निंग मॉडल फैमिली को तैयार करने में त्रपित बंसल के योगदान को सबसे अहम माना जाता है। इस मॉडल ने मशीनों को इंसानों की तरह सोच-समझकर तर्क करने और कठिन गणितीय समस्याओं को हल करने की अभूतपूर्व क्षमता प्रदान की।
उनकी इसी अद्वितीय विशेषज्ञता और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए साल 2025 में मेटा ने अपनी नई एआई रिसर्च डिविजन के लिए उन्हें फाउंडिंग रिसर्चर के रूप में चुन लिया। आज के दौर में जब कई युवा जल्दी सफलता पाने के लिए छोटे-छोटे कोर्स की ओर भागते हैं, तब त्रपित बंसल का सफर यह साबित करता है कि विषय पर पूर्ण महारत, 10 से 12 वर्षों की निरंतर पढ़ाई और गहन रिसर्च का कोई विकल्प नहीं है। यदि आपकी काबिलियत अद्वितीय है, तो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां आपको हर कीमत पर अपनी टीम में शामिल करने को तैयार रहेंगी।



















