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पूर्णिया में तीन साल की बेरोजगारी की जद्दोजहद एक ही मेले में खत्म हुईसक्सेस स्टोरी
5 सित॰ 2026, 3:19 pm (54 दिन पहले)· 4

पूर्णिया में तीन साल की बेरोजगारी की जद्दोजहद एक ही मेले में खत्म हुई

धमदाहा के किशन कुमार, आशीष कुमार और रमेश कुमार तीन साल तक बेरोजगार रहकर तानें सुनते रहे, लेकिन पूर्णिया के एक रोजगार मेले ने उन्हें एक ही दिन में नौकरी दिला दी, जिसमें कुछ को करीब 25 हजार रुपये मासिक तक की सैलरी मिली.

पूर्णिया के धमदाहा से आने वाले किशन कुमार, आशीष कुमार और रमेश कुमार पिछले तीन साल से एक के बाद एक दफ्तर के चक्कर काट रहे थे, मगर बायोडाटा जमा करने के बावजूद कहीं से नौकरी का ऑफर नहीं आ रहा था. पूर्णिया में लगे एक दिवसीय रोजगार मेले ने आखिरकार एक ही दोपहर में तीनों दोस्तों की किस्मत बदल दी.

तीन साल की जद्दोजहद, बढ़ता पारिवारिक दबाव

पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी पाना आजकल आसान नहीं रहा, और इन तीनों युवाओं को इसका एहसास बुरी तरह हुआ. डिग्री और तकनीकी प्रशिक्षण होने के बावजूद तीनों लगातार अलग-अलग कंपनियों में आवेदन भेजते रहे, फिर भी कहीं नियुक्ति नहीं हो पाई. जैसे-जैसे महीने साल में बदलते गए, घर-परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ भारी होता गया और बेरोजगारी की परेशानी भी बढ़ती गई. तीनों का कहना है कि इस दौरान गांव और रिश्तेदारों के तानों ने उन्हें बार-बार मिली नाकामी से भी ज्यादा तकलीफ दी, और यही दबाव इंतजार को और मुश्किल बनाता गया.

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मेले में उमड़ी भीड़, आखिरकार मिला मौका

यह रोजगार मेला पूर्णिया जिला प्रशासन और जिला नियोजनालय ने मिलकर आयोजित किया था, जिसमें आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक-युवतियां पहुंचे. किशन, आशीष और रमेश भी अपनी शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी प्रशिक्षण के आधार पर अलग-अलग कंपनियों के काउंटर पर पहुंचे और आवेदन जमा किया, ठीक वैसे ही जैसे वे तीन साल से और जगहों पर करते आए थे. इस बार चयन प्रक्रिया पूरी होते ही कई उम्मीदवारों को उनकी योग्यता और अनुभव के मुताबिक नौकरी का ऑफर मिल गया. तीनों दोस्तों की तीन साल पुरानी और थका देने वाली तलाश उसी दिन खत्म हो गई, और उन्होंने इस पल को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी राहत बताया.

करीब 25 हजार रुपये तक की सैलरी

मेले में चुने गए युवाओं को उनकी योग्यता और पद के हिसाब से वेतन तय किया जाएगा. इनमें किशन, आशीष और रमेश समेत कुछ युवाओं को करीब 25 हजार रुपये मासिक तक की सैलरी वाली नौकरी मिली है. उनका कहना है कि इस कमाई से न सिर्फ उनकी आर्थिक हालत सुधरेगी, बल्कि आगे परिवार की जिम्मेदारियां निभाना भी आसान होगा. ऑफर मिलते ही तीनों ने पूर्णिया जिला प्रशासन और जिला नियोजनालय की मेहनत का शुक्रिया अदा किया और बिहार सरकार की तरफ से लगातार आयोजित हो रहे ऐसे रोजगार मेलों को अपने जैसे युवाओं के लिए घर के करीब नौकरी पाने का असली मौका बताया.

ऐसे मेले बार-बार क्यों लगाए जाते हैं

पूर्णिया के जिला नियोजन पदाधिकारी आदित्य प्रकाश के मुताबिक, राज्य सरकार के निर्देश पर जिला नियोजनालय अलग-अलग कंपनियों को बुलाकर ऐसे रोजगार मेले लगाता रहता है. उनके मुताबिक कोशिश यही रहती है कि पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक-युवतियों को अपने दम पर भटकने देने के बजाय उनकी योग्यता और तकनीकी दक्षता से मेल खाती नौकरी मिल जाए. उनका कहना है कि इन मेलों का बड़ा मकसद युवाओं को उनके ही जिले और आसपास में रोजगार दिलाना है, जिससे उन्हें काम की खोज में दूर शहरों तक न जाना पड़े.

सवाल-जवाब

पूर्णिया के किन युवाओं को रोजगार मेले में नौकरी मिली?
धमदाहा के किशन कुमार, आशीष कुमार और रमेश कुमार को इस मेले में नौकरी मिली.
ये तीनों कितने समय से नौकरी ढूंढ रहे थे?
तीनों करीब तीन साल से लगातार नौकरी की तलाश कर रहे थे.
रोजगार मेला किसने आयोजित किया?
यह एक दिवसीय रोजगार मेला पूर्णिया जिला प्रशासन और जिला नियोजनालय ने मिलकर आयोजित किया.
चुने गए युवाओं को कितनी सैलरी मिल रही है?
कुछ युवाओं को करीब 25 हजार रुपये मासिक तक की सैलरी वाली नौकरी मिली है.
ऐसे रोजगार मेले क्यों आयोजित किए जाते हैं?
राज्य सरकार के निर्देश पर जिला नियोजनालय समय-समय पर ये मेले लगाता है, ताकि युवाओं को जिले और आसपास में ही रोजगार मिल सके.
इस मेले से जुड़ी जानकारी किस अधिकारी ने दी?
पूर्णिया के जिला नियोजन पदाधिकारी आदित्य प्रकाश ने इस मेले के बारे में जानकारी दी.
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