उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले का माधोपट्टी गांव प्रशासनिक अधिकारियों की अपनी समृद्ध परंपरा के लिए पहचाना जाता है। इसी गांव की बेटी मुस्कान सोलंकी ने हरियाणा PCS परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण करके इस विरासत को एक नया मुकाम दिया है। उनके परिवार में पहले से ही 10 सदस्य IAS, IPS और PCS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मुस्कान की इस कामयाबी के साथ ही उनके परिवार से सिविल सेवाओं में चयनित होने वाले अधिकारियों की कुल संख्या अब 11 हो गई है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कानून में गोल्ड मेडल
मुस्कान सोलंकी का शैक्षणिक रिकॉर्ड शुरुआत से ही असाधारण रहा है। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र विषय की पढ़ाई की और वहां टॉपर रहीं। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के क्रम में MA-LLB की संयुक्त डिग्री हासिल की। विधि यानी कानून की पढ़ाई के दौरान भी उनका प्रदर्शन सर्वोच्च रहा और उन्होंने अकादमिक उत्कृष्टता के लिए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मजबूत शैक्षणिक आधार ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की गहरी समझ विकसित करने में काफी मदद की।
दिल्ली से प्रयागराज तक सिविल सेवा की तैयारी
प्रशासनिक सेवा के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुस्कान ने वर्ष 2024 और 2025 में देश की राजधानी दिल्ली में रहकर UPSC की नियमित कोचिंग ली। कोचिंग के जरिए मूलभूत पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्होंने कोचिंग संस्थानों के बजाय सेल्फ स्टडी पर दांव लगाने का फैसला किया। इसके बाद साल 2026 में उन्होंने कुछ समय प्रयागराज में रहकर भी अपनी पढ़ाई को निरंतर आगे बढ़ाया और अपनी अध्ययन रणनीति को अंतिम रूप दिया।
प्रीलिम्स की विफलता से वापसी और सफलता का मंत्र
सफलता के इस सफर में मुस्कान को शुरुआती असफलताओं का सामना भी करना पड़ा था। उन्होंने UPSC सिविल सेवा की प्रीलिम्स परीक्षा दो बार दी, लेकिन दोनों ही बार वह मुख्य परीक्षा की दौड़ में शामिल नहीं हो सकीं। पिछले साल तो वह मात्र 1.3 अंकों के बेहद करीबी अंतर से प्रारंभिक परीक्षा में चूक गई थीं। उस समय वह काफी निराश हुई थीं, लेकिन उनके पिता और भाई ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया।
मुस्कान का स्पष्ट मानना है कि परीक्षा की तैयारी में सिर्फ किताबों के आगे बैठने के घंटों की तुलना में एकाग्रता और गुणवत्ता कहीं अधिक मायने रखती है। वह नियमित रूप से रोजाना करीब 6-7 घंटे ही पढ़ाई करती थीं। उन्होंने भटकाव से बचने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी दूरी बनाए रखी और केवल अपनी किताबों तथा रिविजन पर ध्यान केंद्रित किया। परिवार के अटूट विश्वास और खुद की निरंतर मेहनत के दम पर उन्होंने हरियाणा PCS परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में क्रैक कर ली।



















