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इंदौर में सास की 1985 की छोटी सी शुरुआत, रिटायरमेंट के बाद बेटे और बहू ने 'अंजलि मसाले' को बनाया देशभर की पसंदसक्सेस स्टोरी
2 नव॰ 2026, 5:41 pm (1 घंटे पहले)· 0

इंदौर में सास की 1985 की छोटी सी शुरुआत, रिटायरमेंट के बाद बेटे और बहू ने 'अंजलि मसाले' को बनाया देशभर की पसंद

इंदौर के प्रमोद और अंजली बाकोरे ने अपनी मां की चार दशक पुरानी मसाला परंपरा को नया रूप देकर घर से ही एक सफल उद्यम खड़ा किया है।

मध्य प्रदेश की खानपान राजधानी इंदौर के एक परिवार ने अपनी घरेलू विरासत को एक कामयाब कारोबारी पहचान में बदल दिया है। घर की रसोई से शुरू हुआ यह छोटा सा काम आज 'अंजलि मसाले' के नाम से जाना जाता है और इसके स्वाद की पहुंच देश के कई राज्यों तक हो चुकी है। इस उद्यम की बागडोर संभाल रहे दंपती प्रमोद बाकोरे और उनकी पत्नी अंजली बाकोरे ने पारंपरिक तरीकों और शुद्धता के दम पर ग्राहकों का भरोसा जीता है।

1985 की नींव और रिटायरमेंट के बाद का नया संकल्प

इस घरेलू मसाले के सफर की शुरुआत साल 1985 में प्रमोद बाकोरे की मां ने की थी। उन्होंने अपने घर पर ही शुद्ध मसाले तैयार करने का छोटा सा काम शुरू किया था, जिसे परिवार ने हमेशा संजो कर रखा। प्रमोद बाकोरे जब दसवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तभी से वे अपनी मां के साथ खड़े मसाले चुनने, उन्हें तैयार करने और बेचने के काम में हाथ बंटाते थे। बचपन के इसी अनुभव ने उन्हें मसालों की गुणवत्ता, सही अनुपात और पारंपरिक स्वाद की गहरी समझ दी।

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सालों तक नौकरी करने के बाद जब प्रमोद बाकोरे सेवानिवृत्त हुए, तो उन्होंने आराम करने के बजाय अपनी पारिवारिक विरासत को विस्तार देने की सोची। इस फैसले में उनकी पत्नी अंजली बाकोरे पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी हुईं। दोनों ने मिलकर तय किया कि मां द्वारा शुरू किए गए इस काम को एक सुनियोजित गृह उद्योग का रूप दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने घर पर ही पूरी शुद्धता के साथ मसाले तैयार करने का सिलसिला नए सिरे से शुरू कर दिया।

खड़े मसालों के चयन से लेकर पैकिंग तक का सफर

इस उद्यम की सफलता का सबसे बड़ा आधार शुद्धता और पारंपरिक तैयारी है। अंजलि मसाले बनाने की पूरी प्रक्रिया को बेहद बारीकी से अंजाम दिया जाता है। काम की शुरुआत बेहतरीन गुणवत्ता वाले खड़े मसालों के चयन से होती है। इसके बाद इन मसालों को धीमी आंच पर सही तापमान में सेका जाता है, जिससे उनकी नमी खत्म होती है और प्राकृतिक सुगंध बरकरार रहती है। सिकाई का काम पूरा होने के बाद ही मसालों को पीसा जाता है। पिसाई के बाद तैयार मसालों को अलग-अलग वजन और नाप वाले पैकेटों में सुरक्षित तरीके से पैक किया जाता है, जिसके बाद उन्हें बाजार और ग्राहकों तक भेजा जाता है।

चार प्रमुख उत्पाद और देश भर में पहुंच

मौजूदा समय में इस ब्रांड के तहत मुख्य रूप से चार विशेष प्रकार के मसाले तैयार किए जाते हैं। इनमें रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाला गरम मसाला, स्ट्रीट फूड का स्वाद बढ़ाने वाला पाव भाजी मसाला, तीखा-चटपटा चाट मसाला और खास सुगंध वाला चाय मसाला शामिल हैं। स्वाद और शुद्धता के कारण इन चारों उत्पादों को लोगों से खूब सराहना मिल रही है।

प्रमोद बाकोरे बताते हैं कि शुद्धता और स्वाद की वजह से ग्राहकों से उन्हें लगातार दोहराए जाने वाले ऑर्डर मिल रहे हैं। आज उनके बनाए मसाले देश के अलग-अलग हिस्सों में ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। इस पूरे काम में परिवार के सभी सदस्य अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी बदौलत यह पारिवारिक कारोबार हर दिन नई ऊंचाइयां छू रहा है।

सवाल-जवाब

'अंजलि मसाले' कारोबार की शुरुआत सबसे पहले किसने और कब की थी?
इस कारोबार की नींव साल 1985 में प्रमोद बाकोरे की मां ने रखी थी, जिसे अब उनके बेटे और बहू आगे बढ़ा रहे हैं।
प्रमोद बाकोरे को मसालों के काम का अनुभव कैसे हुआ?
वे जब दसवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तभी से अपनी मां के साथ खड़े मसाले बनाने और बेचने का काम करते थे।
अंजलि मसाले बनाने की मुख्य प्रक्रिया क्या है?
सबसे पहले खड़े मसालों को ध्यान से चुना जाता है, फिर उनकी सिकाई होती है, उसके बाद पिसाई करके अलग-अलग पैकिंग तैयार की जाती है।
इस ब्रांड के तहत कौन-कौन से प्रमुख मसाले तैयार किए जाते हैं?
वर्तमान में मुख्य रूप से चार मसाले तैयार किए जाते हैं, जिनमें गरम मसाला, पाव भाजी मसाला, चाट मसाला और चाय मसाला शामिल हैं।
यह कारोबार किस शहर से संचालित हो रहा है और उत्पाद कहां तक पहुंचते हैं?
यह कारोबार इंदौर से संचालित होता है और इसके बनाए मसाले देश के विभिन्न हिस्सों में ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं।
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