कला और लगन जब एक साथ मिलते हैं, तो हुनर केवल शौक तक सीमित न रहकर आजीविका का मजबूत जरिया बन जाता है। बुरहानपुर की निवासी निशा प्रजापति ने इसी सोच को हकीकत में बदलकर दिखाया है। अपने भीतर छिपी रचनात्मकता और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने हस्तनिर्मित कलाकृतियों के निर्माण को एक सफल काम के रूप में स्थापित किया है। त्योहारों के मौके पर उनके हाथों से बनी आकर्षक मूर्तियां लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं और बाजार में इनकी विशेष मांग देखने को मिल रही है।
शौक को बनाया आजीविका का आधार
निशा प्रजापति को शुरुआत से ही अपने हाथों से सुंदर और कलात्मक वस्तुएं तैयार करने का गहरा शौक था। समय के साथ उन्होंने इस रचनात्मक रुचि को आजीविका से जोड़ने का फैसला किया। इसी इरादे से उन्होंने दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखकर हस्तनिर्मित और मनमोहक प्रतिमाएं तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। वे हर एक मूर्ति को बेहद बारीकी, कलात्मक सजावट और पूरी मेहनत के साथ आकार देती हैं। उनकी बनाई प्रतिमाओं की विशिष्टता और आकर्षक फिनिशिंग ही मुख्य वजह है कि त्योहार के सीजन में खरीदार इन्हें हाथों-हाथ पसंद कर रहे हैं।
पति और पूरे परिवार का मिला अटूट संबल
किसी भी महिला के लिए घरेलू जिम्मेदारियों के बीच नए काम को खड़ा करना आसान नहीं होता, लेकिन निशा की इस यात्रा में उनके परिवार ने मजबूत ढाल की तरह साथ निभाया। उनके पति इस रचनात्मक काम में उनका पूरा हाथ बंटाते हैं और हर कदम पर सहयोग देते हैं। परिवार के बाकी सदस्य भी लगातार उनका हौसला बढ़ाते हैं और काम के विभिन्न चरणों में जरूरी मदद पहुंचाते हैं। परिजनों के इसी सक्रिय प्रोत्साहन और अपनी अथक मेहनत की बदौलत निशा अपने इस काम को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।
महिलाओं के हुनर और स्वावलंबन पर जोर
निशा प्रजापति का स्पष्ट मानना है कि महिलाओं के भीतर प्रतिभा और हुनर की कोई कमी नहीं होती। मुख्य जरूरत इस बात की है कि वे अपनी क्षमता को सही समय पर पहचानें और उसे निखारने के मौके तलाशें। उनका कहना है कि दुनिया में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि इंसान समर्पण, सकारात्मक सोच और पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रयास करे, तो अपने व्यक्तिगत हुनर से कमाई के शानदार रास्ते बना सकता है। वे मानती हैं कि महिलाओं को घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ अपनी छिपी प्रतिभा को भी सामने लाना चाहिए।
काम के विस्तार और अन्य महिलाओं को जोड़ने की योजना
अपने मौजूदा काम को लेकर निशा का दृष्टिकोण बेहद दूरदर्शी है। उनका सपना है कि आने वाले दिनों में इस शिल्प कार्य का दायरा और बढ़ाया जाए। वे चाहती हैं कि इस पहल से अन्य स्थानीय महिलाओं को भी जोड़ा जाए, जिससे वे भी हुनरमंद बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और वित्तीय रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकें। हस्तकला के जरिए अपनी पहचान गढ़ने वाली निशा आज समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन चुकी हैं।



















