करियर के शुरुआती दौर में मिलने वाली असफलता कई बार जीवन को एक नया मोड़ दे देती है. उत्तर प्रदेश के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले इकतीस वर्षीय युवा राहुल राउत (बदला हुआ नाम) के सफर में भी ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला. एलएंडटी इन्फोटेक में महज 2.9 लाख रुपये के सालाना वेतन पर अपने करियर का आगाज करने वाले राहुल आज संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख कारोबारी शहर दुबई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा प्रोजेक्ट्स से जुड़ी बड़ी कंसल्टिंग भूमिका निभा रहे हैं. उनका मौजूदा सालाना वेतन पैकेज लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्हें गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा था.
शुरुआती करियर का झटका और घर से सच छिपाने का फैसला
राहुल के परिवार में आजीविका और सफलता का एकमात्र पैमाना सरकारी नौकरी को ही माना जाता था. इसके विपरीत राहुल ने प्राइवेट आईटी सेक्टर की राह चुनी थी. करियर की शुरुआत में एलएंडटी इन्फोटेक में काम करते वक्त इंटरनल असेसमेंट की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें वह सफल नहीं हो सके. कंपनी ने मूल्यांकन में असफल रहने के बाद उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. यह खबर राहुल के लिए किसी बड़े आघात से कम नहीं थी. परिवार के रूढ़िवादी नजरिए को देखते हुए उन्हें डर था कि यदि नौकरी छूटने की जानकारी घर पर दी गई, तो परिजन उन्हें तुरंत गांव वापस बुला लेंगे और सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में झोंक देंगे. इसी डर के कारण उन्होंने करीब छह महीने तक अपनी बेरोजगारी की सच्चाई परिजनों से पूरी तरह छिपाए रखी.
छह महीने की तंगी में चेन्नई और पुणे के दोस्तों का सहारा
बिना किसी नियमित आमदनी के जीवन यापन करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था. उस मुश्किल घड़ी में चेन्नई और पुणे में रहने वाले उनके करीबी दोस्तों ने उनका सहारा बनने का फैसला किया. राहुल के रहने के कमरे का किराया भरने से लेकर दैनिक भोजन के बिल चुकाने और बुनियादी खर्चों के लिए पॉकेट मनी देने तक का सारा जिम्मा उनके दोस्तों ने बिना किसी हिचकिचाहट के उठाया. इतना ही नहीं, जब नौकरी के नए अवसरों की तलाश में किसी दूसरे शहर की यात्रा करनी पड़ी, तब दोस्तों ने ही अपने पैसों से उनके लिए बस का टिकट भी बुक कराया था. उस समय न तो कोई वित्तीय सुरक्षा थी और न ही भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट भरोसा, लेकिन दोस्तों के निरंतर हौसले ने उन्हें अवसाद में जाने से बचाए रखा.
आईबीएम से दोबारा शुरुआत और वैश्विक कंपनियों का सफर
दोस्तों के निरंतर प्रोत्साहन और आग्रह के बाद राहुल ने वैश्विक तकनीकी दिग्गज कंपनी आईबीएम में आवेदन करने का फैसला किया. उनकी मेहनत रंग लाई और 14 फरवरी 2017 को उन्हें आईबीएम की तरफ से औपचारिक जॉब ऑफर लेटर प्राप्त हुआ. इस नई नौकरी में उनका सालाना पैकेज 3.78 लाख रुपये तय किया गया था. आईबीएम के कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिग डेटा, डेटा इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीकों में अपने कौशल को लगातार तराशा. अपने ज्ञान और अनुभव के दम पर उन्होंने आगे चलकर टीसीएस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एयरबस और थॉटवर्क्स जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में महत्वपूर्ण तकनीकी जिम्मेदारियां निभाईं.
वैश्विक मुकाम और लगातार आगे बढ़ने का सबक
विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वर्षों तक जटिल तकनीकी समाधानों पर काम करने के बाद राहुल को दुबई में बड़ा अवसर मिला. आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्किटेक्चर और जनरेटिव व कोर एआई प्रोजेक्ट्स का सफल नेतृत्व कर रहे हैं. 2.9 लाख रुपये की साधारण नौकरी खोने और छह महीने तक पाई-पाई को मोहताज रहने से लेकर 1.5 करोड़ रुपये के भारी-भरकम पैकेज तक का यह सफर दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय अपनी स्किल पर काम करना और मजबूत सामाजिक नेटवर्क का साथ होना कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.



















