चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतामेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में नेशनल हाईवे-62 के निर्माण में देरी से आक्रोश, प्रशासन ने लगाया प्रदर्शन पर प्रतिबंधराजस्थान में बदला मौसम का मिजाज, अर्नब तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के असर से झमाझम बारिश1 नवंबर से चमक जाएगी इन 6 राशियों की किस्मत, मंगल, सूर्य, शुक्र और चंद्रमा बरसाएंगे विशेष कृपाऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद नई शिकायत, कई नाम आए सामनेकर्नाटक में बस यात्रा जल्द हो सकती है महंगी, 4 नवंबर को हो सकता है किराए में बढ़ोतरी का ऐलानहमीरपुर पॉलीटेक्निक छात्र का मामला: ड्रोन ग्रांट का दावा निकला फर्जी, तीसरी मंजिल से गिरने की जांच में जुटी पुलिसअमित शाह ने की राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षताशंकराचार्य मंदिर मार्ग पर मजार के जीर्णोद्धार पर गरमाई सियासत, उठे गंभीर सवालचिकन-मटन को पीछे छोड़ देगी ओल की सब्जी, घर पर इस आसान रेसिपी से बनाएं
जबलपुर के सक्षम जैन ने हथकरघा से बनाई पहचान, महीने में कमा रहे लाखों रुपएसक्सेस स्टोरी
20 जुल॰ 2026, 3:06 pm (101 दिन पहले)· 1

जबलपुर के सक्षम जैन ने हथकरघा से बनाई पहचान, महीने में कमा रहे लाखों रुपए

जबलपुर के पनागर में सक्षम जैन ने महज एक मशीन से हथकरघा उद्योग शुरू किया था, आज उनका कारोबार हर महीने लाखों रुपये तक पहुंच चुका है।

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में पनागर कस्बे के रहने वाले सक्षम जैन ने यह साबित कर दिया है कि सही सोच और मेहनत के दम पर एक साधारण शुरुआत भी बड़े मुकाम तक पहुंच सकती है। सक्षम जैन आज अपने खजांची हथकरघा उद्योग के जरिए हर महीने लाखों रुपये का कारोबार कर रहे हैं और उनके बनाए प्राकृतिक कॉटन उत्पादों की मांग पूरे देश में फैली हुई है।

दस साल पहले एक मशीन से हुई थी शुरुआत

सक्षम जैन बताते हैं कि करीब 10 साल पहले उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब उनके पास सिर्फ एक ही हथकरघा मशीन थी। शुरुआत में संसाधन सीमित थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे काम को आगे बढ़ाते गए। बुनाई की बारीकियां सीखने के लिए वे सागर जिले के बीना वारा इलाके गए और वहां खास प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने पनागर में अपनी यूनिट खड़ी की, जिसे उन्होंने खजांची हथकरघा नाम दिया।

ये भी पढ़ें

हथकरघा विभाग की मदद से मिली रफ्तार

सक्षम के मुताबिक इस कारोबार को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में जबलपुर के जिला हथकरघा कार्यालय का बड़ा हाथ रहा है। विभाग ने उन्हें करीब 24-24 हजार रुपये कीमत की दो आधुनिक मशीनें मुहैया कराईं। इसी मदद के बल पर सक्षम न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने, बल्कि आसपास के इलाके की कई महिलाओं को भी रोजगार दे पाए। सरकार की कौशल उन्नयन योजना में प्रशिक्षित महिलाओं को भी यहां काम मिला है, जिससे क्षेत्र की महिलाएं अब खुद कमाई कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।

बिना केमिकल रंग और बिजली के तैयार होते हैं उत्पाद

खजांची हथकरघा में साड़ी, सूट, शर्टिंग, तौलिया और चादरें प्राकृतिक कॉटन धागों से बनाई जाती हैं। इनमें जैक्वार्ड साड़ी, बूटी साड़ी और महेश्वरी साड़ी के खास डिजाइन शामिल हैं। इन सभी उत्पादों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बनाने में न तो कोई रासायनिक रंग इस्तेमाल होता है और न ही बिजली की जरूरत पड़ती है। एक साड़ी को हाथ से पूरी तरह तैयार करने में चार से आठ दिन तक लग जाते हैं। कीमत की बात करें तो यह 1,200 रुपये से शुरू होकर 15,000 रुपये तक जाती है।

दिल्ली से बैंगलोर तक फैली मांग

इन उत्पादों को जबलपुर के अलावा दिल्ली, बैंगलोर, पुणे, इंदौर और सागर जैसे बड़े शहरों में भी जमकर खरीदा जा रहा है। इन शहरों के बाजारों में अच्छी खासी बिक्री होने से यह कारोबार लगातार बड़ा होता जा रहा है।

पिता की किराना दुकान से निकलकर बना लाखों का कारोबार

सक्षम जैन का परिवार पहले किराना दुकान चलाया करता था, जिसकी कमाई सीमित थी। आज वही सक्षम अपने उद्योग से हर महीने 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक कमा ले रहे हैं। उनके पूरे कारोबार का मासिक आंकड़ा अब 5 से 7 लाख रुपये के बीच पहुंच गया है। इतना ही नहीं, यहां काम करने वाले कारीगर और कर्मचारी भी हर महीने 18 हजार रुपये से 25 हजार रुपये के बीच कमाई कर रहे हैं। इससे कई परिवारों की आर्थिक हालत सुधरी है और उनके घरों में खुशहाली लौटी है।

सवाल-जवाब

सक्षम जैन कौन हैं?
सक्षम जैन जबलपुर जिले के पनागर में खजांची हथकरघा उद्योग चलाते हैं, जहां प्राकृतिक कॉटन धागों से साड़ी, सूट, शर्टिंग, तौलिया और चादरें बनाई जाती हैं।
उन्होंने अपना काम कब शुरू किया था?
उन्होंने करीब 10 साल पहले सिर्फ एक मशीन के साथ यह काम शुरू किया था।
उन्होंने प्रशिक्षण कहां से लिया?
उन्होंने सागर जिले के बीना वारा इलाके में जाकर बुनाई की खास ट्रेनिंग ली थी।
उन्हें सरकार से क्या मदद मिली?
जिला हथकरघा कार्यालय जबलपुर ने उन्हें करीब 24-24 हजार रुपये कीमत की दो आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराईं।
एक साड़ी बनाने में कितना समय और खर्च लगता है?
एक साड़ी को हाथ से तैयार करने में चार से आठ दिन लगते हैं और इसकी कीमत 1,200 रुपये से 15,000 रुपये तक होती है।
इन उत्पादों की मांग कहां-कहां है?
जबलपुर के अलावा दिल्ली, बैंगलोर, पुणे, इंदौर और सागर जैसे शहरों में भी इनकी अच्छी मांग है।
सक्षम जैन अभी कितनी कमाई कर रहे हैं?
वे हर महीने 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई कर रहे हैं, जबकि उनका कुल मासिक कारोबार 5 से 7 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
उनके यहां काम करने वाले कर्मचारी कितना कमाते हैं?
यहां काम करने वाले कारीगर और कर्मचारी हर महीने 18 हजार से 25 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp