जौनपुर में असफलता को सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ने की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां अभावों से जूझते हुए एक साधारण युवक ने अपनी मेहनत के दम पर फूलों के बड़े कारोबार में विशेष मुकाम हासिल किया है. हम बात कर रहे हैं जौनपुर के जाने-माने फूल व्यवसायी पप्पू माली की, जिन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर का सामना करते हुए सफलता की नई इबारत लिखी है. आज उनका कारोबार जय मां दुर्गे फूल मंडी के नाम से जाना जाता है, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.
शुरुआती दिनों का कड़ा संघर्ष और दो रुपये की माला
पप्पू माली के शुरुआती दिन बेहद तंगी और कड़े संघर्ष में बीते थे. करीब 35 वर्ष पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि घर चलाना और पढ़ाई जारी रखना बहुत बड़ी चुनौती थी. अपनी पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने बहुत कम उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था. वह हर रोज सुबह चार बजे उठकर गोपालापुर तिराहे पर पहुंच जाते थे और वहां आने-जाने वाली बसों में चढ़कर दो-दो रुपये की मालाएं बेचा करते थे. पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें बमुश्किल 10 से 15 रुपये की कमाई हो पाती थी, जिसके बाद वह अपनी पढ़ाई के लिए निकलते थे.
कर्ज के दलदल में फंसे और कई कारोबार आजमाए
जीवन में बेहतर भविष्य की तलाश में पप्पू माली ने एक के बाद एक कई तरह के व्यवसाय शुरू किए, लेकिन किस्मत बार-बार उनके खिलाफ खड़ी हो गई. उन्होंने कभी पान की दुकान चलाई, तो कभी सब्जियां बेचीं. इसके अलावा उन्होंने मोबाइल की दुकान, कपड़ों का व्यापार और मिठाई का कारोबार भी आजमाया, लेकिन इनमें से कोई भी काम उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं दिला सका. व्यापार में लगातार हुए भारी घाटे के कारण उन पर 15 से 20 लाख रुपये तक का भारी कर्ज हो गया था. एक दौर ऐसा भी आया जब हालात इतने बदतर हो गए कि उन्हें लगा कि उनका सब कुछ बर्बाद हो चुका है, लेकिन उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी अपना हौसला नहीं टूटने दिया.
साल 2006 में फूलों के कारोबार से मिली नई दिशा
जिंदगी में तमाम ठोकरें खाने के बाद साल 2006 में जौनपुर आने पर उन्होंने फूलों के कारोबार में अपनी किस्मत दोबारा आजमाई और यहीं से उनके जीवन ने एक नया मोड़ लिया. उस समय जौनपुर जिले में फूलों का व्यापार बहुत सीमित स्तर पर था और ज्यादातर फूल बाहरी इलाकों से मंगाए जाते थे. इस स्थिति को बदलते हुए उन्होंने स्थानीय किसानों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया. उनकी मेहनत रंग लाई और आज पिंडरा क्षेत्र से रोजाना करीब 100 से 150 किसान अपनी उपज बेचने के लिए उनकी मंडी में पहुंचते हैं. कारोबार के विस्तार के साथ उन्होंने चाचकपुर फूल मंडी में भी अपनी एक मजबूत और भरोसेमंद पहचान बना ली है.
व्यापार में सफलता के तीन मूल मंत्र
अपने लंबे और संघर्षपूर्ण अनुभव के आधार पर पप्पू माली कारोबार में सफलता के तीन सबसे बड़े सूत्र बताते हैं. उनके अनुसार व्यापार में हमेशा सही रेट देना, बेहतरीन क्वालिटी बनाए रखना और ग्राहकों के साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. उनका मानना है कि ग्राहक को कभी भी किसी भी तरह का धोखा नहीं देना चाहिए. अगर खरीदार को उसके पैसों के बदले बिल्कुल सही सामान और पूरा सम्मान मिलता है, तो उस व्यापार को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. इस मुकाम पर पहुंचने के बाद वह अपने सभी ग्राहकों, शुभचिंतकों और मददगारों का आभार जताना नहीं भूलते, जिन्होंने उनके बुरे वक्त में उनका साथ निभाया और आज भी उन पर पूरा भरोसा बनाए हुए हैं.
आज के युवाओं के लिए एक बड़ी सीख
कभी बसों में घूमकर दो-दो रुपये की मालाएं बेचने वाले पप्पू माली की यह कहानी आज के उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो जीवन में एक या दो बार असफल होने के बाद अपने सपनों से मुंह मोड़ लेते हैं. उनका साफ तौर पर कहना है कि जिंदगी एक संघर्ष गाथा है और अगर आप लगातार संघर्ष करते रहेंगे, तो आपको कभी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा. कड़ी मेहनत, अटूट ईमानदारी, ग्राहकों का विश्वास और कभी हार न मानने वाला जज्बा ही इंसान को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकता है.



















