प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अधिकांश युवा जब आरंभिक चरणों में नाकाम होते हैं, तो उनका मनोबल टूटने लगता है। बहुत से छात्र एक या दो बार के नतीजों के बाद ही खुद को तनाव और निराशा के दलदल में धकेल देते हैं। ऐसे समय में असम के एक युवा ने यह उदाहरण पेश किया है कि अगर इरादे अटूट हों, तो असफलताएं भी अंततः रास्ता देने पर मजबूर हो जाती हैं। शिवसागर जिले के अंतर्गत आने वाले छोटे से खेमदोई गांव के दीपज्योति काकोटी ने लगातार मिल रही नाकामियों को अपनी ताकत में बदल दिया और अपने परिवार की तकदीर बदल कर रख दी।
सीमित संसाधन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच तैयारी
दीपज्योति का पालन-पोषण एक बेहद सामान्य और निम्न मध्यमवर्गीय परिवेश में हुआ है। उनके घर के लिए सरकारी सेवा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक कठिनाइयों से बाहर निकलने का सबसे बड़ा सहारा थी। पूरे परिवार की वित्तीय स्थिरता इसी पर टिकी थी कि वे किसी सुरक्षित पद पर चयनित हो जाएं। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने 2019 से 2021 के 2 वर्षों में कुल 120 विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के आवेदन पत्र जमा किए। इस अवधि में उन्होंने रेलवे, एसएससी, बैंकिंग सेवाओं और राज्य स्तरीय आयोगों की भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया। इनमें से 117 पदों पर उन्हें चयन से वंचित रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपनी किताबों से दूरी नहीं बनाई। हर नाकामी को उन्होंने अपनी कमियों की पहचान करने और उनमें सुधार लाने के अवसर के तौर पर देखा।
नाकामी के दस्तावेजों से बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड
अपनी इस कठिन यात्रा के दौरान दीपज्योति ने एक अनूठा कदम उठाया। वे जितने भी आवेदन भरते, उनके आवेदन पत्र, प्रवेश पत्र, चालान और रिजेक्शन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित सहेजते चले गए। इन सभी कागजातों को एक व्यवस्थित रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा गया था। बाद में जब उन्होंने अपनी इस अनवरत कोशिश को औपचारिक पहचान दिलाने के लिए रिकॉर्ड संस्थाओं से संपर्क किया, तो जांच अधिकारियों ने भी माना कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन करने और पूरे डेटा को सबूत के तौर पर सहेजने की यह घटना अपने आप में अनोखी है। सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद उनके नाम को असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया।
तीन नियुक्तियां और सही विकल्प का चयन
अथक परिश्रम का सुखद परिणाम तब सामने आया जब दीपज्योति को एक साथ 3 विभिन्न सरकारी विभागों से नियुक्ति पत्र प्राप्त हुए। एक दौर ऐसा था जब वे एक अदद नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन अपनी निरंतरता के कारण उन्हें तीन विकल्पों में से किसी एक को चुनने का अवसर मिला। उन्होंने अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों और प्राथमिकताओं का आकलन किया, जिसके बाद 2 पदों से त्यागपत्र देकर सबसे उपयुक्त सरकारी नौकरी में कार्यभार ग्रहण कर लिया। उनका यह सफर दिखाता है कि व्यवस्थित तैयारी, निरंतरता और हिम्मत के दम पर विपरीत हालात में भी जीत हासिल की जा सकती है।



















