अकादमिक क्षेत्र में एक सुरक्षित करियर बनाने का ख्वाब देखने वाली श्रुति श्रीवास्तव का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली श्रुति श्रीवास्तव का शुरुआती लक्ष्य कभी पुलिस सेवा या प्रशासनिक व्यवस्था में जाने का नहीं था। वह विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करना चाहती थीं और प्रोफेसर बनकर छात्रों को मार्गदर्शन देने का इरादा रखती थीं। लेकिन कॉलेज के दिनों में मिले एक सुझाव ने उनके सोचने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया। अपने मजबूत इरादों, नियमित स्वाध्याय और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने 24 वर्ष की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
शुरुआती जीवन और शानदार अकादमिक पृष्ठभूमि
श्रुति श्रीवास्तव का जन्म 1 नवंबर 1995 को देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम संजय श्रीवास्तव है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली के शीर्ष संस्थानों का रुख किया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके उपरांत उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में दाखिला लिया और अंग्रेजी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन यानी एमए की उपाधि अर्जित की।
अपनी अकादमिक योग्यता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (NET-JRF) भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट uppolice.gov.in पर उनकी शैक्षणिक योग्यता बीएससी इन इंग्लिश के रूप में दर्ज है। इस मजबूत पृष्ठभूमि के साथ अकादमिक जगत में उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रहा था।
सीनियर के सुझाव से बदली करियर की राह
कॉलेज के दिनों तक श्रुति श्रीवास्तव केवल अध्यापन के क्षेत्र में ही आगे बढ़ने का विचार कर रही थीं। इसी दौरान एक वरिष्ठ छात्र की सलाह ने उनके मन में नई सोच को जन्म दिया। उस सीनियर ने उन्हें समझाया कि प्रोफेसर की तुलना में सिविल सेवा के जरिए समाज में बदलाव लाने का दायरा और प्रभाव कहीं अधिक व्यापक होता है। इस बात ने उनके भीतर सिविल सेवा में जाने का मजबूत संकल्प पैदा किया।
इसके बाद उन्होंने आत्मनिर्भर रहते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का फैसला किया। उन्होंने लोकसभा सचिवालय में लगभग 2 वर्ष तक नौकरी की और अपने कामकाजी जीवन के साथ ही यूपीएससी की पढ़ाई को संतुलित किया। किसी भी महंगी कोचिंग संस्थान का सहारा लिए बिना, उन्होंने पूरी तरह सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 82वीं रैंक हासिल कर ली।
पुलिस सेवा में योगदान और उपलब्धियां
साल 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी के तौर पर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने तेलंगाना के हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में अपना कड़ा प्रशिक्षण पूरा किया। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने शारीरिक और मानसिक संतुलन का परिचय देते हुए योग के लिए प्रतिष्ठित ‘गांधी ज्ञान मंदिर योग केंद्र ट्रॉफी’ अपने नाम की थी।
उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित होने के बाद वह वर्तमान में प्रयागराज कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। वह न केवल अपनी प्रशासनिक कार्यशैली बल्कि अपने अनूठे अंदाज के लिए भी जानी जाती हैं। महाकुंभ 2025 की तैयारियों और आयोजनों के सिलसिले में जब अभिनेत्री रवीना टंडन काशी पहुंची थीं, तब आईपीएस श्रुति श्रीवास्तव ने उनका एक खास इंटरव्यू भी लिया था, जिसकी काफी चर्चा रही थी।



















