बिहार के कृषि परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां किसान पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर ज्यादा कमाई कराने वाली बागवानी फसलों को अपना रहे हैं। फलों के उत्पादन में आई इस तेजी के बीच भागलपुर जिले में स्ट्रॉबेरी की पैदावार किसानों के लिए एक बेहद आकर्षक और फायदेमंद विकल्प के रूप में उभर रही है। क्षेत्र में पांच एकड़ जमीन पर स्ट्रॉबेरी की बुवाई कर एक किसान ने साबित कर दिया है कि आधुनिक तौर-तरीकों से खेती करके लागत की तुलना में दोगुना मुनाफा कमाया जा सकता है।
कृषि अनुसंधान और नई पैदावार का प्रयोग
कृषि क्षेत्र पर शोध करने वाले गुंजेश गुंजन के अनुसार भागलपुर की जमीन पर स्ट्रॉबेरी की फसल तैयार करना एक नया और सफल प्रयोग साबित हुआ है। हालांकि वर्तमान समय में केवल कुछ गिने-चुने किसान ही इस फल की खेती में हाथ आजमा रहे हैं, लेकिन इससे होने वाली वित्तीय कमाई काफी उत्साहजनक है। इस फसल में निवेश के मुकाबले मिलने वाला रिटर्न लगभग दोगुना रहता है, जिसके चलते किसानों की दिलचस्पी इसमें लगातार बढ़ रही है।
मार्केटिंग की चुनौती और सीधी आपूर्ति का मॉडल
स्ट्रॉबेरी की बागवानी में सबसे बड़ी चुनौती इसकी समय पर बिक्री और मार्केटिंग को लेकर सामने आती है। यह फल पकने के बाद बहुत तेजी से खराब होने लगता है, इसलिए इसे बिना किसी देरी के खरीदारों तक पहुंचाना अनिवार्य होता है। शुरुआती दौर में उपज को पश्चिम बंगाल की मंडियों में ले जाकर बेचा जाता था, जिससे परिवहन की देरी और रख-रखाव के अभाव में कई बार भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता था। इस समस्या से निपटने के लिए अब व्हाट्सएप ग्रुप्स का सहारा लेकर स्थानीय उपभोक्ताओं तक सीधे ताजे फल पहुंचाने की अनूठी कार्यप्रणाली शुरू की गई है। इस सीधे संपर्क से ग्राहकों को ताजा और बेहतर गुणवत्ता वाला फल मिलता है, जबकि उत्पादक किसान को भी बिचौलियों के बिना पूरा लाभ प्राप्त होता है।
किस्में, मल्चिंग और आधुनिक सिंचाई पद्धति
गुंजेश गुंजन का कहना है कि अब स्वयं बिहार का बाजार भी इस प्रकार के विशिष्ट फलों के लिए बड़ा केंद्र बन चुका है, जिससे उत्पादकों को बिक्री में पहले जैसी दिक्कतें नहीं आतीं। उन्होंने अपने प्रक्षेत्र में दो अलग-अलग किस्मों की स्ट्रॉबेरी तैयार की हैं, जिनमें गहरे रंग वाली डार्क स्ट्रॉबेरी स्वाद में कहीं अधिक मीठी होती है। उन्होंने खेती की सटीक विधि साझा करते हुए स्पष्ट किया कि स्ट्रॉबेरी को हमेशा मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करके ही उगाना चाहिए। इसके साथ ही पौधों को नियमित पानी देने के लिए ड्रिप सिंचाई की अत्यधिक आवश्यकता होती है। यदि पौधों में खाद देने की व्यवस्था भी इसी ड्रिप प्रणाली के माध्यम से कर दी जाए, तो फसल की पैदावार और फल की गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है, जिससे किसानों की शुद्ध कमाई काफी बढ़ जाती है।


















