सामान्य तौर पर यह धारणा बनी हुई है कि कौन बनेगा करोड़पति जैसे बड़े मंच पर लंबी छलांग लगाने के लिए भारी-भरकम डिग्रियां और प्रोफेशनल योग्यता होना अनिवार्य है। लेकिन कौन बनेगा करोड़पति के 18वें सीजन के 2 सितंबर के एपिसोड में उत्तर प्रदेश के वसलीपुर ग्रांट गांव से ताल्लुक रखने वाली पूजा दास ने इस भ्रम को पूरी तरह तोड़ दिया। सिर्फ 12वीं कक्षा तक पढ़ी एक साधारण गृहिणी पूजा दास ने अपनी पैनी बुद्धिमत्ता और मजबूत सामान्य ज्ञान के बूते 12.5 लाख रुपये की बड़ी रकम अपने नाम कर ली।
मुश्किल हालातों के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई
पूजा दास की यह सफलता उन अनगिनत छात्राओं और गृणियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो संसाधनों या डिग्रियों की कमी के चलते खुद को कमजोर मान बैठती हैं। बेहद कम उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठ जाने और मात्र 21 साल की उम्र में विवाह हो जाने के बाद भी उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई और ज्ञानार्जन की ललक को कम नहीं होने दिया। जब उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति की हॉटसीट पर बैठकर अपनी शिक्षा की अनोखी दास्तान सुनाई, तो शो के होस्ट अमिताभ बच्चन भी उनकी दृढ इच्छाशक्ति की सराहना किए बिना नहीं रह सके।
विवाह के बाद दोबारा दी 12वीं की परीक्षा
पूजा दास की शैक्षणिक यात्रा बेहद संघर्षपूर्ण और दिलचस्प रही है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के दौरान उन्हें तमाम बाधाओं का सामना करना पड़ा। महज 15 साल की आयु में मां और 17 साल की आयु में पिता को खो देने के बाद उन पर शिक्षा त्यागने और विवाह करने का सामाजिक दबाव था। आमतौर पर शादी के बाद महिलाओं की पढ़ाई थम जाती है, लेकिन पूजा के ससुराल वालों, खासकर उनकी सास ने उन्हें आगे अध्ययन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पहले कला वर्ग से 12वीं की थी और बाद में वैवाहिक जीवन के उपरांत विज्ञान संकाय का चयन करते हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा को फिर से उत्तीर्ण किया।
बिना कॉलेज गए अंग्रेजी पर बेहतरीन पकड़
कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर पूजा दास पूरे आत्मविश्वास के साथ अमिताभ बच्चन के साथ अंग्रेजी में संवाद करती नजर आईं। अंग्रेजी भाषा पर उनकी मजबूत पकड़ देखकर वहां मौजूद सभी लोग अचंभित रह गए। पूजा ने साझा किया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई एक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में हुई थी, जिससे उनका बुनियादी आधार मजबूत हो गया था। उस परिवेश में जहां आज भी महिलाएं घूंघट के दायरे में जीवन बिताती हैं, पूजा ने अपनी सोच का दायरा काफी विस्तृत रखा। उन्होंने सोशल मीडिया के लिए जानबूझकर अंग्रेजी भाषा को अपनाया, ताकि वे बिना किसी बाहरी दखल या ताने के अपनी बात खुलकर रख सकें।
स्वयं अध्ययन और डिजिटल माध्यमों का शानदार उपयोग
किसी महंगी कोचिंग या कॉलेज की डिग्री के बिना 25 लाख रुपये के कठिन सवाल तक का सफर तय करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे यह साबित होता है कि स्मार्टफोन और इंटरनेट का सही ढंग से उपयोग करके घर बैठे भी बेहतरीन ज्ञान अर्जित किया जा सकता है। पूजा दास अपने घरेलू कामकाज और अपनी 2 साल की बेटी के लालन-पालन के साथ-साथ इंटरनेट और पुस्तकों के माध्यम से अपना सामान्य ज्ञान लगातार अपडेट रखती थीं। दो साल पहले उन्होंने अपनी सास के साथ मिलकर रेसिपी वीडियो बनाकर सामग्री निर्माण यानी कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत की थी और अब वे महिला सशक्तिकरण के साथ शिक्षा से जुड़े विषयों पर भी सामग्री तैयार कर रही हैं।
25 लाख रुपये का वह ऐतिहासिक सवाल
गेम के अंतिम चरण में पहुंचते-त पहुंचते पूजा दास के पास कोई भी जीवनलाइन शेष नहीं बची थी। 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के लिए उनसे दक्षिण कोरिया स्थित संयुक्त राष्ट्र मेमोरियल सिमेट्री से जुड़ा हुआ इतिहास का एक कठिन प्रश्न पूछा गया था। किसी भी तरह का जोखिम न उठाते हुए उन्होंने 12.5 लाख रुपये की राशि के साथ खेल को समाप्त करने का निर्णय लिया और यह उनका एक बेहद समझदारी भरा कदम साबित हुआ। उनकी यह पूरी कहानी यही संदेश देती है कि औपचारिक डिग्रियों से कहीं अधिक आपकी सीखने की ललक मायने रखती है। यदि आपके भीतर पक्का इरादा है, तो केवल 12वीं पास होने के बावजूद आप जीवन में हर बड़ी मंजिल को हासिल कर सकते हैं।



















