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खेती की नई तकनीक से भोजपुर का यह किसान कमा रहा है लाखों, पश्चिम बंगाल तक पहुंच रहे पौधेसक्सेस स्टोरी
27 जून 2026, 10:18 am (46 दिन पहले)· 5

खेती की नई तकनीक से भोजपुर का यह किसान कमा रहा है लाखों, पश्चिम बंगाल तक पहुंच रहे पौधे

भोजपुर के किसान आशुतोष पांडेय प्रो-ट्रे तकनीक से महज 21 दिनों में सब्जियों के पौधे तैयार करते हैं और बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में सप्लाई करते हैं।

बिहार के भोजपुर जिले में एक किसान ने खेती का पूरा नजरिया बदल कर रख दिया है। आशुतोष पांडेय ने प्रो-ट्रे तकनीक अपनाई और आज उनके यहां तैयार सब्जियों के पौधे बिहार के कई जिलों से होते हुए पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तक पहुंच रहे हैं। जो काम परंपरागत तरीके से महीनों में भी पूरा नहीं होता था, वो अब केवल 21 दिनों में हो जाता है।

क्या है प्रो-ट्रे तकनीक?

इस तकनीक में छोटी-छोटी कोशिकाओं वाली विशेष ट्रे में पौधे उगाए जाते हैं। पॉलीहाउस और शेडनेट के भीतर नियंत्रित वातावरण में तैयार होने की वजह से इन पौधों में रोगों और कीटों का खतरा बेहद कम रहता है। पौधे मजबूत और स्वस्थ निकलते हैं। 21 दिन में तैयार होने के बाद इन्हें सीधे खेत में रोपा जा सकता है, जिससे किसानों का करीब एक महीने का समय बच जाता है। इस बचत का सीधा फायदा यह होता है कि फसल बाजार में दूसरों से पहले पहुंचती है और किसान को अच्छा दाम मिलता है।

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किन सब्जियों के पौधे होते हैं तैयार?

आशुतोष पांडेय की नर्सरी में टमाटर, मिर्च, बैंगन, पत्ता गोभी, खीरा, करैला और नेनुआ समेत कई तरह की सब्जियों के पौधे बनाए जाते हैं। शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन पौधों की गुणवत्ता की वजह से मांग लगातार बढ़ती गई। अब हालत यह है कि बिहार के अलग-अलग जिलों से ऑर्डर आने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों से भी मांग आ रही है।

किसानों को मिलते हैं ये अहम फायदे

पारंपरिक नर्सरी में जहां किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ती है, नर्सरी की लगातार निगरानी रखनी होती है और कभी-कभी बीज भी खराब हो जाते हैं, वहीं प्रो-ट्रे तकनीक इन सभी परेशानियों से राहत देती है। पौधे खेत में लगाने के लिए पूरी तरह तैयार होते हैं, इसलिए किसान को अलग से नर्सरी तैयार करने में वक्त और पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। फसल जल्दी पकती है और किसान बाजार में सबसे पहले अपनी उपज लेकर जा सकता है।

कम लागत, कम जगह, ज्यादा मुनाफा

इस तकनीक की एक बड़ी खूबी यह है कि इसमें न ज्यादा जमीन चाहिए और न भारी पूंजी निवेश की जरूरत है। कम लागत में, सीमित जगह में और कम समय में बेहतर मुनाफा कमाना संभव हो जाता है। यही वजह है कि आसपास के अधिक से अधिक किसान अब प्रो-ट्रे नर्सरी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

हजारों किसानों के लिए बनी मिसाल

आशुतोष पांडेय की यह सफलता सिर्फ उनकी अपनी कमाई तक नहीं रुकी है। उनके तरीके और अनुभव से प्रेरणा लेकर आसपास के हजारों किसान आधुनिक खेती की राह पर चलने लगे हैं। अगर इसी तरह किसान नई तकनीकों को अपनाते रहे, तो खेती केवल जीवनयापन का साधन नहीं बल्कि एक मजबूत और टिकाऊ कारोबार बन सकती है।

सवाल-जवाब

आशुतोष पांडेय कौन हैं और वे क्या करते हैं?
आशुतोष पांडेय बिहार के भोजपुर जिले के किसान हैं जो प्रो-ट्रे तकनीक से सब्जियों की नर्सरी तैयार करते हैं और कई राज्यों में पौधे सप्लाई करते हैं।
प्रो-ट्रे तकनीक में पौधे कितने दिनों में तैयार होते हैं?
इस तकनीक में पौधे महज 21 दिनों में तैयार हो जाते हैं, जिससे किसानों का करीब एक महीने का समय बच जाता है।
इस नर्सरी में किन सब्जियों के पौधे बनाए जाते हैं?
टमाटर, मिर्च, बैंगन, पत्ता गोभी, खीरा, करैला और नेनुआ समेत कई सब्जियों के पौधे यहां तैयार किए जाते हैं।
पौधों की सप्लाई किन-किन राज्यों में होती है?
बिहार के कई जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी इन पौधों की सप्लाई होती है।
प्रो-ट्रे तकनीक किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है?
इससे रोग और कीटों का खतरा कम रहता है, बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती और फसल बाजार में जल्दी पहुंचती है।
क्या यह तकनीक छोटे किसानों के लिए भी उपयुक्त है?
हां, क्योंकि इसमें कम जगह, कम लागत और कम समय में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है, इसलिए यह छोटे किसानों के लिए भी बहुत उपयुक्त है।
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