अमरोहा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर आज गाजीपुर के जमानिया में एसडीएम की कुर्सी तक पहुंचने वाली निधि की कहानी बताती है कि लगातार दो बार असफल होने के बाद भी सही रणनीति अपनाकर बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है.
किसान पिता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मां की बेटी
निधि उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की हसनपुर तहसील क्षेत्र से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता वीरपाल सिंह खेती किसानी से जुड़े हैं, जबकि उनकी मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर काम करती हैं. घर की आर्थिक स्थिति सीमित संसाधनों वाली रही, फिर भी माता पिता ने बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कोताही नहीं बरती. उसी परवरिश का नतीजा है कि निधि ने यूपीपीएससी पीसीएस 2023 में 39वीं रैंक हासिल की और आज उपजिलाधिकारी यानी एसडीएम के पद पर तैनात हैं.
गांव के स्कूल से कस्तूरबा विद्यालय तक का सफर
निधि की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल में हुई. इसके बाद उनका दाखिला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में हुआ, जहां की पढ़ाई ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को नई दिशा दी. यहीं से पढ़ाई को लेकर उनकी गंभीरता बढ़ी. आगे चलकर उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की, जिसमें जूलॉजी, बॉटनी और केमिस्ट्री विषय शामिल थे. कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है.
दो बार यूपीएससी में असफलता, फिर बदली रणनीति
निधि ने सबसे पहले संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी (UPSC) की तैयारी शुरू की, लेकिन लगातार दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली. इस असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि आत्ममंथन का मौका दिया. उन्होंने अपनी तैयारी की बारीकी से समीक्षा की और फैसला लिया कि अब पूरा ध्यान यूपीपीएससी (UPPSC) पर केंद्रित किया जाए. यही फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. निधि का मानना है कि असफलता का मतलब सफर का अंत नहीं होता, बल्कि यह अपनी कमजोरियों को पहचानने और नई रणनीति बनाने का एक जरूरी मौका होती है.
ज्यादा पढ़ाई नहीं, सही और जरूरी पढ़ाई पर जोर
निधि के मुताबिक आज के दौर में सबसे बड़ी दिक्कत किताबों या स्टडी मटीरियल की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत से कहीं ज्यादा कंटेंट का उपलब्ध होना है. उनका कहना है कि जो अभ्यर्थी इस भरमार में से काम की चीज छांटना सीख जाता है, वही आगे निकल पाता है. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान सबसे पहले पूरा सिलेबस बारीकी से समझा, पिछले सालों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण किया और सिर्फ उसी सामग्री पर ध्यान लगाया जिसकी वाकई जरूरत थी. फालतू के संसाधनों में समय बर्बाद करने से उन्होंने खुद को दूर रखा.
हाथ से लिखे नोट्स बने सबसे बड़ा हथियार
पूरी तैयारी के दौरान निधि ने अपने हाथ से नोट्स तैयार किए. परीक्षा से ठीक पहले रिवीजन के वक्त यही नोट्स उनके सबसे काम आए. उनका कहना है कि सीमित और भरोसेमंद स्रोतों से पढ़ाई करते हुए अगर अभ्यर्थी खुद अपने नोट्स बनाए, तो तैयारी का असर कहीं ज्यादा बेहतर होता है.
अब जमानिया में एसडीएम, बाढ़ राहत बनी प्राथमिकता
फिलहाल निधि गाजीपुर जिले के जमानिया में एसडीएम के पद पर सेवाएं दे रही हैं. उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा में आने का मकसद सिर्फ एक बड़ा पद हासिल करना नहीं था, बल्कि आम लोगों की समस्याएं सुलझाना था. इन दिनों उनके क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, इसलिए राहत कार्यों को सही तरीके से चलाना और सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है.
50 गांवों की बेटियों के लिए मिसाल
निधि कहती हैं कि जब उनके गांव और आसपास के इलाकों के लोग उन्हें एक रोल मॉडल की तरह देखते हैं, तो यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि लगती है. एक किसान परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का उनका यह सफर आज ग्रामीण इलाकों की हजारों बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत दे रहा है.





















