कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प इंसान को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकते हैं, और रामथुल्ला शेख का सफर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। आंध्र प्रदेश के एक सामान्य लोअर-मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामथुल्ला ने अपने जीवन में भारी वित्तीय तंगी का सामना किया। एक दौर ऐसा भी था जब उन्होंने गुजारे के लिए दिहाड़ी मजदूर यानी कूली के रूप में काम किया और महज 300 रुपये प्रतिदिन कमाए। हालांकि, इन विकट परिस्थितियों ने उनके हौसलों को तोड़ने के बजाय और मजबूत किया। तमाम बाधाओं को पार करते हुए उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट जगत में कदम रखा। नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने एक कठिन परीक्षा पास की और आज वह दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक में शोध कार्य कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी यह प्रेरक गाथा इन दिनों काफी चर्चा में है, जो उन तमाम विद्यार्थियों के लिए एक मिसाल है जो आर्थिक तंगी को अपनी तरक्की में बाधा मानते हैं।
स्कूली शिक्षा से बीटेक तक का संघर्ष
रामथुल्ला की शुरुआती शैक्षणिक यात्रा आंध्र प्रदेश के ही एक स्थानीय स्कूल से शुरू हुई थी। उन्होंने जिला परिषद हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए ससीकांत रेड्डी जूनियर कॉलेज का रुख किया, जहां उन्होंने विज्ञान और गणित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया। इसके पश्चात उन्होंने श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की। अपनी स्नातक की यह पढ़ाई उन्होंने वर्ष 2021 में पूरी की और उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार अकादमिक मोर्चे पर उनका प्रदर्शन काफी शानदार रहा, जिसमें उन्होंने 8.9/10 का स्कोर प्राप्त किया। पढ़ाई के दौरान उन्हें कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें कूली के रूप में भी काम करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।
कॉर्पोरेट नौकरी के साथ परीक्षा की तैयारी
इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद रामथुल्ला ने तुरंत अपनी पढ़ाई पर विराम नहीं लगाया। फरवरी 2022 के महीने में उन्होंने एक नामी कंपनी में सिस्टम इंजीनियर के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। दिनभर की कॉर्पोरेट नौकरी के बावजूद उनके भीतर उच्च शिक्षा प्राप्त करने की ललक जिंदा थी। इसी दौरान उन्होंने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग यानी GATE की तैयारी करने का निर्णय लिया। नौकरी के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि दोनों मोर्चों पर पूरा समय और ऊर्जा देनी पड़ती है। इसके बावजूद उन्होंने अपने अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर हार नहीं मानी।
GATE में सफलता और प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश
ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग देश के सबसे कड़े तकनीकी इम्तिहानों में शुमार है, जिसके माध्यम से देश के शीर्ष संस्थानों में मास्टर कार्यक्रमों में प्रवेश मिलता है और कई बड़ी तकनीकी कंपनियों में अवसर भी खुलते हैं। रामथुल्ला ने अपने अथक परिश्रम का परिणाम वर्ष 2024 में हासिल किया, जब उन्होंने इस परीक्षा में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय के तहत ऑल इंडिया रैंक 809 प्राप्त की। इस बेहतरीन रैंक के बल पर उन्हें देश के सर्वोच्च शोध संस्थानों में से एक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु में दाखिला मिल गया। उन्होंने इस संस्थान से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्होंने केवल अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि संस्थान के अन्य शैक्षणिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
अकादमिक जिम्मेदारियां और शिक्षण कार्य
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में अपने अध्ययन के दौरान रामथुल्ला ने अपनी अकादमिक दक्षता का लोहा मनवाया। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में टीचिंग असिस्टेंट के तौर पर भी अपनी सेवाएं दीं। वह पावर इलेक्ट्रॉनिक्स लेबोरेटरी, कंट्रोल सिस्टम्स डिजाइन कोर्स और एसएमपीसी लैब जैसे महत्वपूर्ण विभागों से गहराई से जुड़े रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने संस्थान में प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली, जिसका मतलब यह है कि उन्होंने मास्टर की पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षण, प्रयोगशाला के काम और छात्र प्लेसमेंट जैसी बड़ी जिम्मेदारियों को भी एक साथ संभाला। आखिरकार, जून 2026 में उन्होंने इस प्रतिष्ठित संस्थान से अपनी मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री सफलतापूर्वक पूरी कर ली।
नौकरी के लुभावने प्रस्तावों को ठुकराकर शोध को चुना
GATE परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने के बाद रामथुल्ला के सामने करियर के कई बड़े रास्ते खुल गए थे। सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, उन्हें कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की तरफ से लगभग 15 लाख रुपये सालाना के आकर्षक नौकरी के ऑफर मिले थे। एक आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति के लिए यह प्रस्ताव बहुत बड़ा था, लेकिन रामथुल्ला ने कॉर्पोरेट की इस आरामदायक नौकरी के बजाय शोध के कठिन मार्ग को चुना। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनका मुख्य उद्देश्य ज्ञान के क्षेत्र में गहराई से उतरना है। इसी कड़ी में, अगस्त 2026 में उन्होंने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में पीएचडी स्कॉलर के रूप में अपने नए सफर का आगाज किया। इस तरह उनका यह प्रेरणादायक सफर एक साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर देश के शीर्ष संस्थान और अंततः सिंगापुर के वैश्विक स्तर के विश्वविद्यालय तक पहुंच गया है।



















