पूर्णिया: इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न चला जाए, अपनी मातृभूमि की माटी की महक और अपनों का अपनत्व हमेशा उसे अपनी तरफ खींचता है। बेहतर आजीविका और शानदार कमाई की तलाश में लोग अपने घर-परिवार से दूर महानगरों का रुख करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे जांबाज भी होते हैं जो मोटी सैलरी वाली नौकरी को अलविदा कहकर वापस अपने शहर लौट आते हैं और खुद का स्टार्टअप शुरू करने का बड़ा जोखिम उठाते हैं। बिहार के पूर्णिया निवासी इंद्र चौरसिया की यह सफरनामा कुछ ऐसा ही है, जिन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद करीब 40 लाख रुपये सालाना के भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी को ठुकरा दिया। महानगर की चकाचौंध में उनका मन नहीं रमा और साल 2013 में वे दिल्ली की आरामदायक जिंदगी छोड़कर अपने पैतृक शहर पूर्णिया वापस आ गए।
महज 20 गायों के साथ की डेयरी की शुरुआत
पूर्णिया के कसबा इलाके में अपने घर पर इंद्र चौरसिया ने सिर्फ 20 मवेशियों के साथ इस डेयरी कारोबार का श्रीगणेश किया था। शुरुआत के दिनों में उनका मुख्य काम गायों का दूध सीधे बाजार में बेचना था, लेकिन इस पारंपरिक तरीके से मुनाफा एक सीमित दायरे तक ही सिमटा हुआ था। इस व्यावसायिक सीमा को तोड़ने के लिए उन्होंने केवल दूध बेचने के बजाय दूध से बनी वैल्यू-एडेड चीजें तैयार कर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की अनूठी योजना बनाई। इसी दूरगामी सोच के साथ उन्होंने ‘हिंद डेयरी’ ब्रांड के नाम से अपनी पहली दुकान का ताला खोला। समय के पहिये के साथ उनका यह कारोबार निरंतर परवान चढ़ता गया और आज उनके पास एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन हिंद डेयरी आउटलेट ग्राहकों की सेवा में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही उनके डेयरी फार्म में मवेशियों की संख्या बढ़कर अब लगभग 40 तक पहुंच चुकी है।
रोजगार सृजन का जरिया बना ब्रांड
इंद्र चौरसिया का यह उद्यम अब केवल उनके निजी परिवार या आजीविका तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उनके तीनों आउटलेट्स और फार्म के माध्यम से तकरीबन 15 अन्य लोगों को नियमित रोजगार मिल रहा है। ‘हिंद डेयरी’ के इन प्रतिष्ठानों पर आने वाले ग्राहकों को केवल शुद्ध दूध और उसके उत्पाद ही नहीं मिलते, बल्कि पारंपरिक मिठाइयां, नमकीन, विभिन्न प्रकार के स्नैक्स और लजीज फास्ट फूड भी परोसे जाते हैं। अपनी इस बेहतरीन गुणवत्ता और सेवा के दम पर यह ब्रांड धीरे-धीरे पूरे पूर्णिया शहर में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।
नौकरी की बचत और भविष्य निधि से खड़ा किया साम्राज्य
अपने इस आजीविका के सफर के बारे में चर्चा करते हुए इंद्र चौरसिया बताते हैं कि इस बिजनेस को स्थापित करने के लिए उन्होंने अपनी कॉरपोरेट नौकरी के दौरान बचाई गई पूंजी और भविष्य निधि यानी पीएफ के फंड का इस्तेमाल किया था। उन्होंने एक साथ कोई बहुत बड़ा वित्तीय जोखिम मोल लेने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अपने बिजनेस का विस्तार करना बेहतर समझा। सबसे पहले उन्होंने डेयरी फार्म की स्थापना की, उसके बाद दुग्ध उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया और फिर धीरे-धीरे ‘हिंद डेयरी’ के आउटलेट्स की श्रृंखला खड़ी कर दी। उनका स्पष्ट कहना है कि नौकरी में उन्हें बेहतरीन सैलरी पैकेज मिल रहा था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपने गृहक्षेत्र और अपने प्रियजनों की कमी खलती थी, जिसके चलते उन्होंने नौकरी त्यागकर अपने ही इलाके में कुछ मौलिक करने का साहसिक निर्णय लिया।
जोखिम उठाने से ही मिलती है सफलता
इंद्र चौरसिया की यह जीवन यात्रा उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है जो अपनी नौकरी के साथ या उसे छोड़कर खुद का कोई नया काम शुरू करने की तमन्ना रखते हैं। उनका पक्का विश्वास है कि खुद का बॉस बनने और अपना साम्राज्य खड़ा करने के लिए कैलकुलेटेड रिस्क उठाना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने भी एक सुरक्षित और आकर्षक वेतन वाली नौकरी को छोड़कर उद्यमशीलता के कठिन रास्ते को चुना और आज वे न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि कई अन्य परिवारों की आजीविका का माध्यम भी बन चुके हैं।



















