जीवन में सफलता की राह न तो उम्र के बंधनों से तय होती है और न ही शुरुआती परिस्थितियों की मोहताज होती है। पंकज यादव की जीवन यात्रा इस बात का सबसे सटीक और प्रेरणादायक उदाहरण पेश करती है। अपने स्कूल के दिनों में एक समय तीन-तीन विषयों में एक साथ अनुत्तीर्ण होने वाले पंकज यादव ने बाद में न सिर्फ अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया, बल्कि 30 साल की उम्र में एक बेहतरीन और उच्च वेतन वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर इतिहास रच दिया। शादीशुदा जीवन और एक बच्चे के पिता होने की पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच, बिना किसी प्राइवेट कोचिंग संस्थान की मदद लिए, बिना किसी मॉक टेस्ट सीरीज में भाग लिए और बिना किसी विशेष उत्तर लेखन अभ्यास के, उन्होंने अपनी लगन से राज्य सिविल सेवा यानी PCS की 7 अलग-अलग परीक्षाएं उत्तीर्ण कर एक शानदार रिकॉर्ड कायम किया।
स्कूल में तीन विषयों में असफलता और शिक्षक की चुनौती
पंकज यादव का शुरुआती स्कूली सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा था। पढ़ाई के दौरान एक समय ऐसा आया जब वे तीन अलग-अलग विषयों में फेल हो गए। इस विफलता पर उनके स्कूल शिक्षक ने पूरी कक्षा के सामने उन्हें नीचा दिखाते हुए ताना मारा था। शिक्षक ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा था कि यदि वे 60 प्रतिशत अंक भी हासिल कर लें, तभी जीवन में आगे चलकर कुछ हासिल करने की उम्मीद की जा सकती है। उस समय कक्षा में उपस्थित किसी भी व्यक्ति ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि ताना सुनने वाला वही छात्र आगे चलकर एक मिसाल कायम करेगा।
पंकज ने शिक्षक के इस अपमानजनक तंज को दिल पर ले लिया और निराश होने के बजाय इसे एक अवसर के रूप में स्वीकार किया। वे अपने पिता की दुकान पर पहुंचे और वहां बने स्टोर रूम की सफाई में जुट गए। स्टोर रूम में फर्श पर बिखरा हुआ गुड़ उन्होंने खुद साफ किया, जमीन पर एक बोरी बिछाई और वहीं एक साधारण टेबल तथा कुर्सी लगाकर अपनी पढ़ाई की जगह तैयार कर ली। उन्होंने दिन और रात एक करके पढ़ाई शुरू कर दी। इस कठोर परिश्रम का परिणाम यह रहा कि पंकज ने न केवल 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की चुनौती पूरी की, बल्कि पूरे स्कूल में पहला स्थान हासिल करके टॉप भी किया।
30 साल की उम्र में कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला
स्कूल में टॉपर बनने के बाद पंकज यादव ने अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर बेहद आकर्षक सैलरी वाली नौकरी मिल गई। जब वे 30 वर्ष के हुए, तब तक वे पूरी तरह से अपने करियर में स्थापित हो चुके थे। वे शादीशुदा थे और एक छोटे बेटे के पिता भी बन चुके थे। बाहर से देखने पर उनका जीवन हर लिहाज से एकदम व्यवस्थित और सफल दिखाई दे रहा था, लेकिन उनके भीतर सिविल सर्विसेज में जाने का सपना लगातार बना हुआ था।
जब पंकज ने अपनी इस मोटी सैलरी वाली प्राइवेट नौकरी को छोड़कर सरकारी नौकरी और सिविल सेवाओं की तैयारी करने का निर्णय लिया, तो उनके करीबियों और दोस्तों ने इसका विरोध किया। कई लोगों ने 30 की उम्र में इस तरह का जोखिम उठाने पर उन्हें पागल तक कह दिया। हालांकि, पंकज अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग रहे और उन्होंने किसी की बातों से प्रभावित हुए बिना अपनी इंजीनियरिंग की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
बिना कोचिंग और मॉक टेस्ट के 7 PCS परीक्षाओं में सफलता
नौकरी छोड़ने के बाद पंकज यादव ने सिविल सेवा की तैयारी में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया। उन्होंने शुरुआत में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन उसमें वे सफल नहीं हो सके। इस परिणाम से निराश होकर रुकने के बजाय उन्होंने अपनी रणनीति बदली और अपना ध्यान स्टेट सिविल सर्विसेज यानी PCS परीक्षाओं पर केंद्रित कर दिया।
अपनी तैयारी के दौरान पंकज ने किसी भी प्राइवेट कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। उन्होंने बाजार की टेस्ट सीरीज या स्पेशल राइटिंग प्रैक्टिस में भाग नहीं लिया। वे केवल सेल्फ स्टडी और सख्त अनुशासन के बल पर आगे बढ़े। इस रणनीति के दम पर उन्होंने एक-एक करके 7 अलग-अलग स्टेट PCS एग्जाम क्रैक करके इतिहास रच दिया। पंकज यादव का यह सफर साबित करता है कि यदि संकल्प मजबूत हो और भटकाव से दूरी बनाई जाए, तो मंजिल तक पहुंचने में कोई भी चुनौती आड़े नहीं आ सकती।



















