रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के बीच केवल औपचारिक रेशमी धागा बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे की रक्षा, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत अहसास कराता है। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में इस पवित्र अवसर पर प्रशासनिक परिसर की चारदीवारी के भीतर एक ऐसा संवेदनशील और मानवीय उदाहरण देखने को मिला, जिसने कलेक्ट्रेट में मौजूद हर नागरिक को भावुक कर दिया। कानपुर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान आर्थिक तंगी से जूझ रही 12वीं की होनहार छात्रा इशु यादव अपनी मां के साथ पहुंची थी। पारिवारिक संकट के कारण छात्रा की आगे की पढ़ाई पूरी तरह रुकने के मोड़ पर आ खड़ी हुई थी। इस कठिन समय में कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक बड़े भाई का दायित्व निभाते हुए न केवल छात्रा की रुकी हुई शिक्षा को संबल दिया, बल्कि उसकी जिंदगी में उम्मीद का नया सवेरा भी लाया।
जनता दर्शन में पहुंची मां-बेटी और बयां की लाचारी
नौबस्ता क्षेत्र के हंसपुरम निवासी ललिता यादव के जीवन में परेशानियों का दौर वर्ष 2017 में शुरू हुआ था, जब उनके पति प्रागी लाल यादव का असमय निधन हो गया। पति के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और घर चलाने से लेकर बेटी की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। ललिता यादव ने हार नहीं मानी और दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा व बर्तन साफ करने का काम करके अपनी बेटी इशु यादव की पढ़ाई का खर्च उठाना जारी रखा। इशु नौबस्ता स्थित केपी वाईजन सहयोगी इंटर कॉलेज में 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है और वह एक मेधावी छात्रा है। हालांकि, महंगाई और सीमित आमदनी के कारण परिवार के पास इतने पैसे नहीं जुट पा रहे थे कि स्कूल की बकाया फीस जमा की जा सके। धीरे-धीरे स्कूल की कुल फीस का 29 हजार रुपये बकाया हो गया। फीस जमा न होने की स्थिति में स्कूल प्रबंधन द्वारा पढ़ाई रोके जाने का डर सताने लगा, जिसके बाद लाचार मां अपनी बेटी के साथ मदद की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट स्थित जनता दर्शन में जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हुई।
कलाई पर बंधा रक्षासूत्र और जिलाधिकारी का बड़ा फैसला
जनता दर्शन के दौरान जब इशु यादव ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह को अपनी पूरी पारिवारिक स्थिति और 29 हजार रुपये की बकाया फीस की समस्या बताई, तो कलेक्ट्रेट का माहौल अत्यंत भावुक हो गया। अपनी बात रखने के बाद इशु ने जिलाधिकारी की कलाई पर रक्षाबंधन का धागा बांधने का निवेदन किया। जिलाधिकारी ने अत्यंत आदर और स्नेह के साथ छात्रा की इस भावना का सम्मान किया और अपनी कलाई पर राखी बंधवाई। राखी बंधवाने के बाद उन्होंने बड़े भाई की भांति इशु के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और यह दृढ़ संकल्प लिया कि किसी भी कीमत पर इस होनहार छात्रा की शिक्षा में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
निजी जेब से भरी आधी फीस, आधी स्कूल से कराई माफ
मामले की संवेदनशीलता और छात्रा के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बिना कोई समय गंवाए तत्काल केपी वाईजन सहयोगी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य से दूरभाष पर संपर्क किया। उन्होंने प्रधानाचार्य के सामने छात्रा की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा रखा और मानवीय आधार पर समाधान निकालने की पहल की। जिलाधिकारी ने बड़ा दिल दिखाते हुए इशु की बकाया 29 हजार रुपये की फीस में से 50 प्रतिशत यानी आधी राशि अपनी व्यक्तिगत जेब से जमा करने का फैसला किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानाचार्य से अनुरोध करके बाकी बची 50 प्रतिशत फीस को पूरी तरह माफ करवा दिया। इस त्वरित प्रशासनिक निर्णय ने इशु यादव और उसकी मां को एक बहुत बड़े आर्थिक मानसिक तनाव से उबार लिया और छात्रा के लिए आगे की पढ़ाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
2 किलोमीटर का पैदल सफर खत्म, 27 अगस्त को मिली नई साइकिल
बातचीत की प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारी को यह जानकारी मिली कि इशु यादव का घर हंसपुरम में स्थित है, जो उसके स्कूल से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है। साधन न होने के कारण इशु को रोजाना कड़ी धूप और बारिश के बीच 2 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था। यह जानकर जिलाधिकारी ने तुरंत छात्रा के आवागमन को सुगम बनाने के लिए एक नई साइकिल का प्रबंध करवाने के निर्देश जारी किए। इसके बाद 27 अगस्त को ही कलेक्ट्रेट परिसर में इशु को एक चमचमाती नई साइकिल सौंपी गई। साइकिल पाकर छात्रा के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई और वह प्रशासनिक अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए साइकिल पर सवार होकर अपने घर लौटी।
आईएएस बनने का सपना और डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा बनीं मेंटर
साइकिल सौंपे जाने के दौरान जब जिलाधिकारी ने इशु से उसके भविष्य के सपनों के बारे में पूछा, तो उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह आगे चलकर सिविल सेवा परीक्षा पास करके एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती है ताकि वह देश और समाज के गरीब व असहाय लोगों की निस्वार्थ सेवा कर सके। छात्रा के इस बड़े संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रभावित होकर जिलाधिकारी ने उसका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने छात्रा के प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को साकार करने के उद्देश्य से कानपुर की डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा को इशु का आधिकारिक मेंटर नियुक्त कर दिया। अब डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा इशु को 12वीं की पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और सिविल सेवा की तैयारी के लिए निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।



















