राजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचफरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारराजस्थान के डीग में पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा, सरपंच प्रत्याशियों के गुटों में पथराव से कई घायलयूडीपी से पाला बदलकर एनपीपी में शामिल हुए दो विधायक, मेघालय में बदला राजनीतिक गणित500 करोड़ के ऑडियो क्लिप मामले पर बोले मनोज जरांगे, जांच न होने पर 29 तारीख को दी सीधे टकराव की चेतावनीइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगा29 अक्टूबर को चंद्रमा का मिथुन राशि में प्रवेश, इन 7 राशियों के खुलेंगे उन्नति के द्वारमैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण
पूर्वी चंपारण के मत्स्य पालक नंदलाल भगत का अनूठा जुगाड़: तालाब के बांध पर पेड़ लगाकर हर साल कमाते हैं 82 हजार रुपयेसक्सेस स्टोरी
23 जून 2026, 5:44 pm (127 दिन पहले)· 4

पूर्वी चंपारण के मत्स्य पालक नंदलाल भगत का अनूठा जुगाड़: तालाब के बांध पर पेड़ लगाकर हर साल कमाते हैं 82 हजार रुपये

पूर्वी चंपारण के मत्स्य पालक नंदलाल भगत ने अपने तालाबों के बांधों पर आम, कटहल, नींबू, आंवला और जामुन के पेड़ लगाकर मछलीपालन और बागवानी को एक साथ जोड़ा है। इस अनूठे मॉडल से न सिर्फ उनके बांध मजबूत हुए हैं बल्कि उन्हें हर साल 82 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई भी हो रही है।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में मत्स्य पालक नंदलाल भगत के तालाबों पर पहुंचने वाले अक्सर चौंक जाते हैं। दूर से देखने पर यह किसी बगीचे जैसा लगता है, लेकिन करीब जाने पर पता चलता है कि यह हरियाली एक सोची-समझी रणनीति का नतीजा है जो मछलीपालन और बागवानी को एक साथ साधती है।

तालाब के बांध पर लहलहाता बगीचा

नंदलाल भगत ने अपने तीनों बड़े तालाबों के बांधों पर बड़ी संख्या में फलदार पेड़ लगाए हैं। मुख्य रूप से आम के पेड़ हैं, लेकिन उन्होंने कटहल, नींबू, आंवला और जामुन के पेड़ भी लगाए हैं। तीनों तालाबों पर क्रमशः 70, 35 और 30 पेड़ लगे हुए हैं, जो बांधों को घना हरा आवरण दे देते हैं।

ये भी पढ़ें

पेड़ों की जड़ें बांध को बनाती हैं फौलादी

नंदलाल भगत इस तरीके की एक अहम शर्त बताते हैं कि बांध का मोटा और चौड़ा होना जरूरी है, तभी पेड़ की जड़ों को फैलने की जगह मिलती है। जब आम जैसे लंबी जड़ों वाले पेड़ बांध की मिट्टी में अच्छी तरह जम जाते हैं, तो वे मिट्टी को कसकर बांध लेते हैं। इससे बांध की ताकत कई गुना बढ़ जाती है और मानसून की तेज बारिश में भी बांध टूटने का डर नहीं रहता। तालाब के अंदर पल रही मछलियां भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गई हैं।

छाया और खाना, दोनों देते हैं पेड़

गर्मियों में जब धूप अपने चरम पर होती है, तब तालाब के किनारे खड़े विशाल आम के पेड़ पानी की सतह पर ठंडी छाया बिछा देते हैं। मछलियां इस छाँव में आराम करती हैं और तेज धूप से राहत पाती हैं। इसके अलावा, पेड़ों से पके फल जब पानी में गिरते हैं और उनमें हल्की सड़न होने लगती है, तो मछलियां उन्हें चाव से खा लेती हैं। यह एक तरह का मुफ्त प्राकृतिक चारा है जो बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मिलता है।

सालाना 82 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी

नंदलाल भगत के इस बगीचे का फायदा सिर्फ पर्यावरण या मछलियों तक सीमित नहीं है। तालाब के बांधों पर लगे इन पेड़ों से वे हर साल 82 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई करते हैं। मछलीपालन की आमदनी के ऊपर यह रकम उनके लिए एक मजबूत वित्तीय सहारा बन गई है। उनका यह तजुर्बा बताता है कि एक ही जमीन और एक ही पानी से, थोड़ी अलग सोच के साथ, दो अलग-अलग कमाई के जरिए निकाले जा सकते हैं।

सवाल-जवाब

नंदलाल भगत कहां के रहने वाले हैं?
नंदलाल भगत बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मत्स्य पालक हैं।
उन्होंने तालाब के बांधों पर कौन-कौन से पेड़ लगाए हैं?
उन्होंने मुख्य रूप से आम के पेड़ लगाए हैं और साथ में कटहल, नींबू, आंवला और जामुन के पेड़ भी लगाए हैं।
तीनों तालाबों पर कितने-कितने पेड़ लगे हैं?
उनके तीन बड़े तालाबों पर क्रमशः 70, 35 और 30 पेड़ लगाए गए हैं।
बांध पर पेड़ लगाने के लिए क्या जरूरी शर्त है?
नंदलाल भगत के अनुसार बांध का मोटा और चौड़ा होना जरूरी है ताकि पेड़ों की जड़ें अच्छी तरह फैल सकें।
पेड़ों की जड़ें बांध को कैसे मजबूत बनाती हैं?
आम जैसे लंबी और गहरी जड़ों वाले पेड़ बांध की मिट्टी को कसकर थाम लेते हैं, जिससे बरसात में बांध टूटने का खतरा काफी कम हो जाता है।
मछलियों को इन पेड़ों से क्या सीधा फायदा होता है?
पेड़ों की छाया से मछलियों को गर्मी में राहत मिलती है और तालाब में गिरे फल हल्की सड़न के बाद उनका प्राकृतिक आहार बन जाते हैं।
नंदलाल भगत पेड़ों से हर साल कितनी कमाई करते हैं?
वे तालाब के बांधों पर लगे पेड़ों से हर साल 82 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp