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तेलंगाना के स्टार्टअप गुडीबैग को कूरियर से सूखा कचरा भेज रहे देश भर के लोग, अब तक 2500 टन कचरा हुआ रीसायकलसक्सेस स्टोरी
12 सित॰ 2026, 7:20 am (2 घंटे पहले)· 0

तेलंगाना के स्टार्टअप गुडीबैग को कूरियर से सूखा कचरा भेज रहे देश भर के लोग, अब तक 2500 टन कचरा हुआ रीसायकल

तेलंगाना के मोइनाबाद स्थित वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप गुडीबैग को देश भर से लोग अपना सूखा घरेलू कचरा कूरियर कर रहे हैं, जिससे अब तक 25 लाख किलोग्राम कचरा रीसायकल हो चुका है।

आमतौर पर घरों से निकलने वाले चिप्स के पैकेट, खाली रैपर, ऑनलाइन सामान डिलीवरी वाले प्लास्टिक के डिब्बे और पुराने मोबाइल कवर को लोग अनुपयोगी समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकिन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अब नागरिकों की सोच में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बिहार सहित देश के अलग-अलग राज्यों से लोग अपने घरों का सूखा और साफ कचरा कूरियर और डाक के माध्यम से तेलंगाना के मोइनाबाद में स्थित एक अभिनव वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप गुडीबैग को भेज रहे हैं। इस अनोखी पहल ने कचरे के सही निपटान को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया है।

व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुआ एक बड़ा रीसायकल नेटवर्क

इस सराहनीय मुहिम की शुरुआत साल 2022 में बेहद सामान्य तरीके से हुई थी। गुडीबैग के संस्थापक अभिषेक अग्रवाल ने शुरुआती चरण में लोगों को कचरा अलग-अलग करने के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। धीरे-धीरे लोगों की रुचि बढ़ी और आज यह पहल एक विशाल प्लेटफॉर्म का रूप ले चुकी है। गुडीबैग के पास अब अपना समर्पित मोबाइल ऐप है और इस अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 18 लोगों की टीम दिन-रात काम कर रही है। इस डिजिटल और जमीनी प्रयास की मदद से अब तक देश भर के 30,000 से अधिक जागरूक नागरिक इस मुहिम से सीधे जुड़ चुके हैं।

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सूखा कचरा अलग करने की व्यावहारिक चुनौती

स्टार्टअप के संचालन में सबसे बड़ी चुनौती केवल सूखा कचरा स्वीकार करना और गीले कचरे को पूरी तरह से अलग रखना था। अभिषेक अग्रवाल के अनुसार, शुरुआत में लोगों को सूखे और गीले कचरे के बीच का अंतर समझाना और उन्हें केवल साफ सूखा कचरा भेजने के लिए राजी करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। लेकिन लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों और तकनीकी मार्गदर्शन के बाद लोगों के व्यवहार में बदलाव आया। अब उपयोगकर्ता खुद ही कचरे को अच्छी तरह साफ करके और उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर पार्सल के लिए तैयार करते हैं।

2500 टन से अधिक कचरे का हुआ सफल रीसायकल

गुडीबैग की टीम हर दिन देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से लगभग 30,000 से 40,000 किलोग्राम तक सूखा कचरा इकट्ठा कर रही है। इसमें मल्टी-लेयर प्लास्टिक पैकेजिंग, भोजन के खाली डिब्बे, बबल रैप, एक्सपायर्ड हो चुकी दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट शामिल हैं। अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि उनकी टीम ने अब तक 25 लाख किलोग्राम यानी 2,500 टन से अधिक सूखे कचरे को सफलतापूर्वक रीसायकल किया है। इस प्रयास की वजह से इतनी बड़ी मात्रा में कचरा लैंडफिल साइट्स में जमा होने और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने से बच गया है।

रिवॉर्ड मॉडल से स्वच्छ भारत मिशन को मिल रहा बल

इस पूरे मॉडल की खास बात यह है कि देश भर से लोग अपने व्यक्तिगत खर्च पर इस सूखे कचरे को पैक करके तेलंगाना के मोइनाबाद स्थित प्रोसेसिंग सेंटर पर भेजते हैं। इस सहयोग की सराहना करने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए गुडीबैग उन्हें ऐप के माध्यम से विशेष रिवॉर्ड देता है। कचरा प्रबंधन का यह अनोखा और आत्मनिर्भर मॉडल न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर स्वच्छ भारत मिशन के संकल्पों को भी मजबूत बना रहा है।

सवाल-जवाब

गुडीबैग क्या है और यह कहां स्थित है?
गुडीबैग एक वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप है जो तेलंगाना के मोइनाबाद में स्थित है और सूखे घरेलू कचरे को रीसायकल करता है।
इस स्टार्टअप की शुरुआत किसने और कब की थी?
इस स्टार्टअप की शुरुआत साल 2022 में अभिषेक अग्रवाल ने एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए की थी।
गुडीबैग किस तरह का सूखा कचरा स्वीकार करता है?
यह मल्टी-लेयर प्लास्टिक, फूड कंटेनर, बबल रैप, पुरानी दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक कचरा स्वीकार करता है। गीला कचरा इसमें नहीं लिया जाता।
क्या सूखा कचरा भेजने वाले लोगों को इसके बदले कोई लाभ मिलता है?
हां, अपने खर्च पर तेलंगाना के मोइनाबाद सेंटर में सूखा कचरा भेजने वाले लोगों को गुडीबैग ऐप के जरिए रिवॉर्ड दिए जाते हैं।
गुडीबैग अब तक कुल कितना कचरा रीसायकल कर चुका है?
18 लोगों की इस टीम ने अब तक सफलतापूर्वक 25 लाख किलोग्राम यानी 2,500 टन से अधिक सूखे कचरे को रीसायकल किया है।
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