शारीरिक श्रम से जीवनयापन करने वाले लोग अक्सर दिन ढलते ही थकान मिटाने के रास्ते तलाशते हैं, लेकिन तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कीलनाथम गांव के 33 वर्षीय सुदलाई मुथु की कहानी एकदम अलग है। पेशे से दिहाड़ी निर्माण मजदूर सुदलाई मुथु हर दिन कार्यस्थल पर भारी ईंटें और सीमेंट की बोरियां उठाने जैसा कठिन शारीरिक काम करते हैं। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी व्यक्तिगत फिटनेस की रुचि को अपने गांव के नौजवानों के बेहतर भविष्य के लिए एक बड़े सामाजिक मिशन में बदल दिया है। उन्होंने अपने प्रयासों से गांव में 'नेताजी जिम' नाम से एक अनूठा फिटनेस केंद्र स्थापित किया है, जो आज ग्रामीण युवाओं की तकदीर संवार रहा है।
दिन भर मजदूरी और शाम को समाज बदलने का संकल्प
शहरों में जहां आधुनिक जिम और फिटनेस सेंटर भारी-भरकम फीस वसूलते हैं, वहीं सुदलाई मुथु का यह जिम गांव के साधारण और गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। नेताजी जिम में उपकरण और स्थान के रखरखाव के लिए केवल 200 रुपये प्रति माह की नाममात्र फीस रखी गई है। खास बात यह है कि यह मामूली रकम देना भी हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं है। निर्धन विद्यार्थियों, उभरते एथलीटों और पुलिस या सेना जैसी सरकारी सेवाओं में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यहां प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था बिल्कुल मुफ़्त की गई है। सुदलाई मुथु का मकसद इस पहल से पैसा कमाना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाना है।
24 घंटे चाबी की खुली व्यवस्था और अटूट सामुदायिक भरोसा
नेताजी जिम की सबसे अनूठी पहचान इसकी कार्यप्रणाली है, जो पूरी तरह से आपसी विश्वास और ईमानदारी पर टिकी है। यह जिम चौबीसों घंटे खुला रहता है और इसके दरवाजे का ताला खोलने की चाबी जिम के बाहर ही एक तय जगह पर रखी रहती है। कोई भी युवा अपनी सुविधा के हिसाब से सुबह, दोपहर या देर रात आकर ताला खोलकर कसरत कर सकता है। वर्कआउट खत्म होने के बाद वह व्यक्ति परिसर को सही से बंद करके चाबी वापस उसी स्थान पर रख देता है। हैरानी की बात यह है कि इस पारदर्शी और विश्वास आधारित व्यवस्था के बीच आज तक जिम का एक भी सामान गायब या चोरी नहीं हुआ है।
नशे से दूरी और राज्य स्तरीय पदकों का शानदार सफर
इस पूरी मुहिम के पीछे सुदलाई मुथु की सोच अपने गांव के युवाओं को शराब, सिगरेट और अन्य घातक व्यसनों से दूर रखना है। वह चाहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के लड़के अपनी ऊर्जा को गलत दिशा में बर्बाद करने के बजाय एक अनुशासित और सेहतमंद जीवनशैली में लगाएं। उनका यह प्रयास अब रंग भी लाने लगा है। इस जिम में नियमित कसरत करने वाले कई गरीब छात्रों और युवा खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक हासिल किए हैं और अपने गांव का मान बढ़ाया है। इसके अतिरिक्त, कई अभ्यर्थी यहां से उचित मार्गदर्शन पाकर सेना और पुलिस बल की शारीरिक दक्षता परीक्षा को पास करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
सीमित संसाधन, बड़ा परिवार और प्रशासन की सराहना
एक मामूली दिहाड़ी मजदूर होने के कारण सुदलाई मुथु के लिए जिम की स्थापना करना और आवश्यक उपकरण जुटाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने अपनी दिनभर की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा इस केंद्र के निर्माण में लगाया और साथ ही स्थानीय निवासियों से मिले दान का उपयोग करके जिम के साधन पूरे किए। अपनी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे वाले पांच सदस्यों के परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी वे अपने इस सामाजिक संकल्प से पीछे नहीं हटे। सुदलाई मुथु के इस निस्वार्थ कार्य और ग्रामीण युवाओं के प्रति उनके लगन से प्रभावित होकर स्थानीय जिला प्रशासन ने भी उनकी सराहना की है और जिम के संचालन के लिए एक स्थान आरक्षित कर दिया है।



















