तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने तथा अदालतों में वर्षों से अटके मामलों का तेजी से निपटारा करने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक और न्यायिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने बच्चों के साथ होने वाले गंभीर अपराधों में पीड़ितों को बिना किसी विलंब के इंसाफ दिलाने और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए विशेष अदालतों के बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार करने का निर्णय लिया है। लंबित मुकदमों की विस्तृत समीक्षा के बाद राज्य भर में कुल 30 नई विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पोक्सो मामलों की स्थिति की समीक्षा और नया फैसला
राज्य भर में बाल उत्पीड़न और यौन अपराधों से जुड़े लंबित मुकदमों की वस्तुस्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मुकदमों के मौजूदा आंकड़ों, उनकी अदालती स्थिति और मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए आवश्यक अतिरिक्त न्यायिक व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी लाने और सभी जिलों में विशेष पोक्सो पीठ सुनिश्चित करने के लिए नए न्यायालयों की तत्काल जरूरत है।
समीक्षा उपरांत मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए कि हर हाल में मुकदमों की सुनवाई गति पकड़े ताकि कानून सम्मत प्रक्रिया के तहत दोषियों को समय पर सख्त सजा दिलाई जा सके। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को अदालतों के अंतहीन चक्करों से बचाना और बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य कृत्यों पर प्रभावी रोक लगाना है।
46.59 करोड़ रुपये की लागत से 26 नए पोक्सो न्यायालय
तमिलनाडु में ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पोक्सो) एक्ट, 2012’ के तहत पंजीकृत मुकदमों की सुनवाई के लिए इस समय 22 विशेष न्यायालय पहले से कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त 4 अन्य विशेष न्यायालयों के संचालन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और वे जल्द ही शुरू होने वाले हैं। इसके बावजूद फाइलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार ने 46.59 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन के साथ 26 नए विशेष न्यायालयों की स्थापना का आधिकारिक शासनादेश जारी कर दिया है।
इस नए प्रशासनिक आदेश के अंतर्गत 12 नए विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे, जबकि 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों का गठन किया जाएगा। इस विस्तार के साथ ही तमिलनाडु के 47 पुलिस जिलों में कुल 52 विशेष न्यायालय केवल पोक्सो अधिनियम, 2012 से जुड़े मामलों की दिन-प्रतिदिन सुनवाई करेंगे। यह मजबूत न्यायिक ढांचा पीड़ितों के मानसिक तनाव को कम करने और मामलों को तार्किक परिणति तक तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा।
नशा-मुक्त अभियान के तहत 4 नई एनडीपीएस अदालतें
बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु सरकार ने मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भी न्यायिक तंत्र को मजबूत किया है। राज्य में चल रहे “नशा-मुक्त तमिलनाडु” अभियान को सशक्त करने और नशीली दवाओं की तस्करी व अवैध उपभोग पर सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट’ (एनडीपीएस एक्ट) के मामलों का शीघ्र निस्तारण प्राथमिकता में रखा गया है।
राज्य में वर्तमान समय में 11 विशेष एनडीपीएस अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने 4 नई विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश जारी किया है। इनमें से कांचीपुरम, तिरुवल्लुर और वेल्लोर जिलों में एक-एक नई विशेष अदालत खोली जाएगी, जबकि चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष अदालत स्थापित की जाएगी। इन अदालतों के शुरू होने से नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में साक्ष्य और गवाहियों की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे न्यायिक प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।





















