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बिजली कंपनी की वेबसाइट में छेद ढूंढकर 16 साल के किशोर ने एक साल में बना डाले 100 करोड़, फिर एक चूक ने पहुंचाया सलाखों तकतकनीक
13 जून 2026, 7:30 pm (45 दिन पहले)· 1

बिजली कंपनी की वेबसाइट में छेद ढूंढकर 16 साल के किशोर ने एक साल में बना डाले 100 करोड़, फिर एक चूक ने पहुंचाया सलाखों तक

एक 16 वर्षीय लड़के ने बिजली वितरण कंपनी UPPCL की पेमेंट प्रणाली की एक तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाकर सिर्फ एक साल में 100 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया, लेकिन अखबार में दिए गए एक विज्ञापन की वजह से वह पकड़ा गया।

साइबर ठगी की दुनिया में उम्र कोई पैमाना नहीं रही — इसकी मिसाल एक 16 साल का लड़का है, जिसने महज एक साल के भीतर 100 करोड़ रुपये का खेल कर डाला। उसका निशाना थी बिजली कंपनी UPPCL की वह वेबसाइट, जिसके जरिए उपभोक्ता अपने बिजली बिल का भुगतान करते हैं। इसी वेबसाइट की एक तकनीकी कमजोरी को पकड़कर इस किशोर ने कंपनी को 100 करोड़ रुपये की भारी चपत लगा दी।

पहले समझिए, बिल भरने की सामान्य प्रक्रिया कैसे चलती है

इस पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए एक साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि आम तौर पर बिजली बिल भुगतान का तंत्र किस तरह काम करता है। जब कोई व्यक्ति बिल भरता है, तो बिजली बिल की वेबसाइट पर एक नया सेशन बनता है। इसी सेशन के जरिए उस बैंक तक पहुंच मिलती है, जहां से भुगतान किया जाना है। इसके बाद उपभोक्ता अपना लॉगिन पासवर्ड डालता है और पेमेंट करता है। बैंक में वह भुगतान दर्ज होता है और फिर वहां से मुख्य वेबसाइट पर एक ऐक्नॉलेज्मेन्ट यानी पुष्टि भेजी जाती है। यही पुष्टि UPPCL तक पहुंचती है कि भुगतान सफल रहा, और उसके बाद उपभोक्ता का बिल अपडेट हो जाता है। यह एक बिल्कुल सामान्य फीचर है।

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लड़के ने ढूंढ निकाली प्रक्रिया की कमजोर कड़ी

इसी पूरी प्रक्रिया में इस लड़के ने एक खामी पकड़ ली। इसके बाद उसने अखबारों में विज्ञापन देना शुरू कर दिया कि जिसे भी अपना बिजली बिल कम कराना हो, वह उसके पास आए। देखते ही देखते उसका धंधा इतना फैल गया कि लोग उसके पास पहुंचने लगे। कोई आकर कहता कि साहब, यह 5,00,000 रुपये का बिल है — और बदले में वह उससे महज 50,000 रुपये ले लेता। वह लड़का बिल को 80 से 90 प्रतिशत तक घटा देता था। इसी तरह उसका कारोबार बढ़ता चला गया और उसने UPPCL को कुल 100 करोड़ रुपये की चपत लगा दी।

जीरो बैलेंस खाते और 'शार्क टूल' का खेल

तरकीब यह थी कि वह लड़का ऐसे बैंक खाते से भुगतान करता था जिसमें जीरो बैलेंस होता था। जाहिर है, जीरो बैलेंस खाते से पेमेंट करने पर भुगतान फेल हो जाता और बैंक की तरफ से एक नेगेटिव ऐक्नॉलेज्मेन्ट आता कि पेमेंट असफल रहा। लेकिन ठीक इसी प्रक्रिया के बीच में वह एक 'वायरस शार्क टूल' लगा देता था, जो दोनों ऐप के बीच में आकर बैठ जाता था। यही टूल बैंक से आ रहे नेगेटिव ऐक्नॉलेज्मेन्ट को पॉजिटिव में बदल देता और उसी को आगे पुश कर देता था।

लेजर में पैसा दिखता था, खाते में आता नहीं था

इसका नतीजा यह होता कि UPPCL के लेजर में भुगतान दर्ज दिखाई देता, जबकि असल में कंपनी के खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचता था। इसी सफल भुगतान का प्रिंट आउट निकालकर वह उपभोक्ता को थमा देता था। इसी तरीके से बिजली कंपनी UPPCL को 100 करोड़ रुपये का चूना लग गया।

आखिर पकड़ में कैसे आया

घोटाले को इतनी सफाई से अंजाम देने वाले इस किशोर से एक चूक हो गई — उसने अखबार में विज्ञापन दे दिया। यही विज्ञापन उसके पकड़े जाने की वजह बना। तरीका जानकर जांच में जुटे अफसर भी हैरान रह गए।

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