ज़ोमाटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने अपने नए वेलनेस स्टार्टअप टेंपल से जुड़े कई दिलचस्प पहलू दुनिया के सामने रखे हैं। उन्होंने हाल ही में साझा किया कि किस तरह इस उद्यम की तकनीक और एक अनोखे हेल्थ मेट्रिक 'एंट्रोपी' ने उनके लिए ध्यान लगाने और शारीरिक रिकवरी को आंकने के नजरिए को पूरी तरह से बदल दिया है।
दस साल तक ध्यान लगाने की लंबी कवायद
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए दीपिंदर गोयल ने खुलासा किया कि उन्होंने करीब एक दशक तक नियमित रूप से मेडिटेशन करने का प्रयास किया था। हालांकि, इतने लंबे समय के बावजूद उन्हें कभी यह स्पष्ट अहसास नहीं हुआ कि उनकी यह कोशिश किसी सकारात्मक परिणाम तक पहुंच रही है या नहीं। उनके अनुसार, ध्यान लगाने के दौरान भी उनके मन में विचारों का तांता लगा रहता था, जिसके कारण यह परखना बेहद पेचीदा था कि उनका अभ्यास वास्तव में असरदार साबित हो रहा है या महज़ समय की बर्बादी है।
जब उन्होंने टेंपल का उपयोग करना शुरू किया, तो उन्हें इस प्रक्रिया को मापने और परखने का एक व्यावहारिक विकल्प मिल गया। गोयल ने बताया कि एंट्रोपी नामक यह पैमाना उन्हें शरीर की रिकवरी में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को बेहद सटीकता से देखने की अनुमति देता है। अब उन्हें इस बात का इंतजार नहीं करना पड़ता कि उनके अपने भीतर से कोई अहसास जागे कि मेडिटेशन से उन्हें कोई फायदा हुआ है। जब उन्होंने अपने सुधारों को सीधे आंकड़ों के रूप में देखना शुरू किया, तो उन्हें अपनी इस दिनचर्या को आगे भी जारी रखने की मजबूत प्रेरणा मिलने लगी।
पारंपरिक दिल की धड़कनों से है अलग
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए दीपिंदर गोयल ने अपने 20 मिनट के एक मेडिटेशन सत्र का एक चार्ट भी लोगों के साथ साझा किया। इस चार्ट में एंट्रोपी का स्कोर लगातार नीचे गिरता हुआ नजर आ रहा था, जिसे टेंपल के मानकों के अनुसार शरीर की बेहतर रिकवरी का संकेत माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इसी पूरे सत्र के दौरान उनके दिल की धड़कनों यानी हार्ट रेट में कोई खास फेरबदल दर्ज नहीं किया गया। सत्र के दौरान उनका पल्स रेट लगभग 83 बीट प्रति मिनट के आसपास ही स्थिर रहा और उसमें केवल मामूली उतार-चढ़ाव ही देखने को मिले।
गोयल का साफ तौर पर मानना है कि इस अनुभव से यह बात भली-भांति समझी जा सकती है कि केवल दिल की धड़कनों के आंकड़ों पर निर्भर रहकर ध्यान या रिकवरी के वक्त शरीर के भीतर चल रही हर हलचल का सही अनुमान लगाना संभव नहीं है। उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में एक और उदाहरण भी साझा किया जिसमें उन्होंने ठंडे पानी से स्नान यानी कोल्ड शावर लिया था। उस गतिविधि के दौरान उनका हार्ट रेट एकदम से ऊपर चला गया, जबकि इसके विपरीत एंट्रोपी के स्तर में साफ गिरावट दर्ज की गई और वह बाद में जाकर स्थिर हुआ। उनके मुताबिक यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि एंट्रोपी केवल ध्यान के समय ही नहीं, बल्कि तनाव या रिकवरी से जुड़ी अन्य तमाम गतिविधियों के दौरान भी शरीर की आंतरिक स्थितियों को आसानी से ट्रैक कर सकता है।
नियमित कसरत और जीवनशैली में बदलाव
इस नई तकनीक के इस्तेमाल से केवल मानसिक शांति ही नहीं बल्कि शारीरिक फिटनेस के मोर्चे पर भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। गोयल का कहना है कि इस प्रणाली ने उन्हें अधिक नियमित रूप से वर्कआउट करने और सही तरीके से कसरत करने के प्रति प्रेरित किया है। हालांकि, इस तकनीक के पीछे काम करने वाली पूरी वैज्ञानिक पृष्ठभूमि और नियमों के बारे में टेंपल की ओर से आने वाले दिनों में और अधिक विस्तृत जानकारियां साझा की जाएंगी।
शुरुआती पहुंच के लिए शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया
फिलहाल इस वेंचर ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से शुरुआती पहुंच यानी अर्ली एक्सेस के लिए एक प्रतीक्षा सूची की शुरुआत कर दी है। दीपिंदर गोयल ने उन सभी लोगों से आगे आकर इसके लिए साइन अप करने की अपील की है जो इस नवीन वेलनेस तकनीक को खुद अपने ऊपर आजमाकर देखना चाहते हैं। इस पूरी प्रक्रिया से यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि टेंपल का मुख्य उद्देश्य केवल पारंपरिक फिटनेस के आंकड़े दिखाना नहीं है, बल्कि यह कंपनी मानव शरीर की रिकवरी प्रक्रिया और मानसिक दशा को गहराई से समझने के लिए पूरी तरह नए मापदंडों पर काम कर रही है।



















