हैदराबाद के लिए यह एक बड़ी और यादगार खबर है। देश में पहली बार किसी मेट्रो स्टेशन के परिसर के भीतर पूरी तरह से काम करने वाला एक पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरू किया गया है। शहर के सबसे व्यस्त ट्रांसपोर्ट जंक्शनों में गिने जाने वाले महात्मा गांधी बस स्टेशन, यानी एमजीबीएस मेट्रो स्टेशन के कॉनकोर्स लेवल पर यह नया केंद्र खोला गया है। इसका सीधा फायदा पुराने शहर सहित पूरे हैदराबाद और आसपास के जिलों से आने वाले आवेदकों को मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें पासपोर्ट से जुड़े काम के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पुराने शहर के लोगों की मांग आखिरकार पूरी
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, हैदराबाद ने यह फैसला सिर्फ एक नई सुविधा जोड़ने के इरादे से नहीं लिया, बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक जायज मांग को पूरा करने के लिए लिया है। ओल्ड सिटी और दक्षिण हैदराबाद में रहने वाले लोग बरसों से अपने इलाके के पास एक पासपोर्ट कार्यालय की मांग करते आ रहे थे। अब तक इन इलाकों के आवेदकों को दस्तावेज जमा कराने और साक्षात्कार के लिए शहर के दूसरे छोर तक का लंबा सफर तय करना पड़ता था, जिसमें काफी समय और मेहनत खर्च होती थी। एमजीबीएस स्टेशन पर बस डिपो और मेट्रो, दोनों की सुविधा एक साथ मौजूद होने से अब यह जगह शहर के साथ-साथ पड़ोसी जिलों से आने वाले आवेदकों के लिए भी सबसे आसान पहुंच वाला ठिकाना बन गई है।
तीन केंद्रों की जगह में बड़ा फेरबदल
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी जे. स्नेहाजा ने बताया कि यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा व्यावहारिक और बेहतर बनाने के मकसद से किया गया है। इसके तहत अब तक अमीरपेट के आदित्य ट्रेड सेंटर से चल रहे शहर के सबसे व्यस्त पासपोर्ट सेवा केंद्र को पूरी तरह बंद करके एमजीबीएस मेट्रो स्टेशन परिसर में शिफ्ट कर दिया गया है। इसी तरह टोलीचौकी में चल रहे पुराने केंद्र को भी हाई-टेक सिटी के करीब रायदुर्ग स्थित सिरी बिल्डिंग में स्थानांतरित किया गया है। हालांकि, बेगमपेट में स्थित मुख्य पासपोर्ट कार्यालय पहले की तरह ही अपनी जगह पर काम करता रहेगा, उसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।
28 हाईटेक काउंटरों वाला अत्याधुनिक परिसर
एमजीबीएस स्थित यह नया केंद्र एलएंडटी मेट्रो रेल के सहयोग से तैयार किया गया है। रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले आवेदकों को संभालने और उनके इंतजार के समय को घटाने के लिहाज से इसे खासतौर पर डिजाइन किया गया है। इस भव्य परिसर में कुल 28 हाईटेक काउंटर बनाए गए हैं, जिससे एक साथ ज्यादा आवेदकों का काम निपटाया जा सकेगा। यहां आवेदकों के लिए डिजिटल टोकन सिस्टम की व्यवस्था है, ताकि लाइन में लगने की झंझट खत्म हो सके। इसके अलावा केंद्र में आधुनिक आईटी बुनियादी ढांचा लगाया गया है, बैठने के लिए विशाल प्रतीक्षालय बनाया गया है, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों का पूरा नेटवर्क लगाया गया है और आवेदकों के सामान की हिफाजत के लिए लॉकर की सुविधा भी दी गई है।
सरकारी ढांचे के इस्तेमाल की नई मिसाल
मेट्रो स्टेशन जैसे पहले से मौजूद सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के भीतर पासपोर्ट सेवा केंद्र जैसी सरकारी सुविधा को समाहित करना अपने आप में एक नई सोच है। इससे न सिर्फ अलग से जमीन या इमारत तलाशने की जरूरत खत्म होती है, बल्कि आवेदकों को एक ऐसी जगह पर सेवा मिलती है जहां पहले से बस और मेट्रो की कनेक्टिविटी मौजूद है। हैदराबाद का यह कदम सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के स्मार्ट उपयोग और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के एकीकरण की एक बेहतरीन मिसाल है, जो आने वाले समय में दूसरे शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।



















