चित्रकूट: बारिश के मौसम की दस्तक के साथ ही देश के तमाम प्राकृतिक स्थल अपनी पुरानी रौनक और हरियाली वापस पा लेते हैं। पहाड़ियों की आंचल में छिपे झरने और कल-कल बहता पानी पर्यटकों को अपनी तरफ खींचने लगता है। यदि आप भी शहरी जीवन के शोरगुल और भीड़भाड़ से दूर किसी शांत जगह की तलाश में हैं, तो चित्रकूट का तुलसी वॉटरफॉल आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। मानिकपुर के पाठा क्षेत्र के भीतर स्थित यह झरना बरसात के दिनों में अपनी पूरी खूबसूरती के साथ निखर कर सामने आता है और यहां आने वाले हर शख्स का मन मोह लेता है।
मानिकपुर इलाके में टिकरिया के नजदीक बसा तुलसी वॉटरफॉल मानसून के सीजन में एक अनोखा रूप धारण कर लेता है। बारिश होने के बाद यहां की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से पानी बेहद तेज रफ्तार के साथ नीचे गहरी खाइयों की तरफ गिरता है। इस दौरान पानी के तेज बहाव से जो जल प्रपात और फुहारें पैदा होती हैं, वे हवा में मिलकर एक सफेद धुंध की चादर बना देती हैं, जो दूर से देखने पर किसी धुएं के गुबार जैसी प्रतीत होती है। पहाड़ियों से गिरते हुए इस नीले पानी, कोहरे जैसी धुंध और चारों तरफ फैली गाढ़ी हरियाली का यह अद्भुत संगम यहां कदम रखने वाले सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस झरने के आसपास का संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश आगंतुकों को मानसिक शांति और सुकून प्रदान करता है।
मानसून की बारिश के बाद इस पूरे भौगोलिक इलाके में हरियाली का दायरा काफी बढ़ गया है। प्राचीन पहाड़ियों के बीच से गुजरती जलधाराएं और इस धरती पर फैली प्राकृतिक घास व पेड़-पौधे तुलसी वॉटरफॉल के सौंदर्य में चार चांद लगा रहे हैं। यही मुख्य वजह है कि इन दिनों सिर्फ स्थानीय चित्रकूट जिले से ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के तमाम जिलों से भी बड़ी संख्या में सैलानी यहां की सैर करने के लिए खिंचे चले आ रहे हैं। इस अनोखे प्राकृतिक नजारों को देखने और महसूस करने की चाहत लोगों को इस शांत और खूबसूरत जगह तक ले आ रही है।
तुलसी वॉटरफॉल की इस बढ़ती लोकप्रियता के चलते यहां बांदा, प्रयागराज, सतना और इनके पड़ोसी इलाकों से भी पर्यटकों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है। यहां पहुंचने वाले तमाम सैलानी ऊंची पहाड़ियों से नीचे की तरफ गिरते पानी और उसके इर्द-गिर्द छाई धुंध के इस मनमोहक दृश्य को अपने मोबाइल के कैमरों में कैद करते हुए साफ देखे जा सकते हैं। लोग इस खूबसूरत नजारों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा कर रहे हैं, जिससे इस जगह के बारे में और अधिक लोगों को जानकारी मिल रही है.
बांदा से तुलसी वॉटरफॉल की यात्रा पर आए पर्यटक शिवराम ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह मूल रूप से चित्रकूट घूमने के उद्देश्य से आए थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों से उन्हें तुलसी वॉटरफॉल के बारे में गुप्त जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने बिना देर किए यहां आने का फैसला किया। उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस जगह पर पहुंचने के बाद यहां का प्राकृतिक परिवेश देखकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई। पहाड़ियों के बीच छाई धुंध के आगोश से नीचे गिरता हुआ पानी बेहद आकर्षक और अद्भुत दिखाई देता है। उनका यह भी मानना था कि बारिश के इस सुहाने मौसम में इस स्थान का दीदार करना वाकई देखने लायक अनुभव है।
अपने परिवार और बच्चों के साथ इस प्राकृतिक स्थल पर पहुंचे अनूप कुमार ने बताया कि वह अपनों के साथ यहां क्वालिटी टाइम बिताने आए हैं। उनके अनुसार, यह वॉटरफॉल और इसके चारों तरफ का भौगोलिक परिदृश्य बेहद भव्य और सुंदर है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए साझा किया कि पहले के समय में ऐसे शानदार प्राकृतिक नजारों का आनंद उठाने के लिए लोगों को दूर-दराज के महानगरों या अन्य राज्यों तक लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं, जिसमें काफी ज्यादा धन और समय खर्च होता था। लेकिन अपने घर के पास ही इतनी मनमोहक जगह मिल जाना उनके और उनके परिवार के लिए एक बेहद सुखद और अनोखा अनुभव रहा है।
यदि आप भी अपनी आगामी छुट्टियों के दौरान शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर प्रकृति के शांत आंचल में कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो आप भी तुलसी वॉटरफॉल का रुख कर सकते हैं। हालांकि, मौसम विभाग और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए यह ध्यान रखना जरूरी है कि बारिश के मौसम में ऐसे झरनों के भीतर पानी का बहाव और जलस्तर अचानक काफी बढ़ सकता है। ऐसे में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए झरने के बहुत ज्यादा नजदीक जाने से पूरी तरह परहेज करें और हमेशा एक सुरक्षित दूरी से ही इस बेहतरीन प्राकृतिक नजारों का जी भरकर आनंद लें।



















