औरैया में सातों बहनों ने तोड़ी परंपरा की बंदिशें, मां की अर्थी को दिया कंधा और सबसे छोटी बेटी ने दी मुखाग्नि17 शहरों में बिका 4000 टन बफर प्याज, अब गुवाहाटी पहुंचेगी कांदा एक्सप्रेस की तीसरी खेपसीतापुर में पेड़ की डाली हटाते वक्त बाप-बेटे को लगा करंट, दोनों की जान गईमानसून में सब्जियां जल्दी सड़ने से बचाना है तो अपनाएं ये स्टोरेज तरीकेगोवा से लेकर जोधपुर तक देश के 9 सबसे रंगीन और सांस्कृतिक गलियारे जहां बसती है अद्भुत खूबसूरतीमुंह के छालों के कारण कान में क्यों उठता है दर्द? जानिए 'रेफर्ड पेन' का मेडिकल सच और बचाव के उपायBRICS सम्मेलन से पहले चांदनी चौक तैयार: व्यापारियों ने विदेश मंत्री को लिखा पत्र, शी जिनपिंग के लिए बनी विशेष जलेबा-रबड़ीग्रेटर नोएडा में मौसम बदलते ही बढ़े फ्लू के केस, जिम्स के डायरेक्टर बोले- सामान्य लक्षणों में पैनिक न करेंबालों के रूखेपन से छुटकारा पाने का घरेलू नुस्खा, दही और एलोवेरा का हेयर मास्क देगा सिल्की लुकघर पर बनाएं कैफे स्टाइल फोमी कॉफी, चाहिए बस चम्मच और थोड़ी मेहनत
गोवा से लेकर जोधपुर तक देश के 9 सबसे रंगीन और सांस्कृतिक गलियारे जहां बसती है अद्भुत खूबसूरतीयात्रा
6 सित॰ 2026, 3:45 pm (17 मिनट पहले)· 2

गोवा से लेकर जोधपुर तक देश के 9 सबसे रंगीन और सांस्कृतिक गलियारे जहां बसती है अद्भुत खूबसूरती

पुर्तगाली औपनिवेशिक वास्तुकला से लेकर रेगिस्तानी नीली गलियों और शाही गुलाबी बाजारों तक, भारत के ये 9 खास रास्ते अपनी अनूठी वास्तुकला और जीवंत रंगों से हर पर्यटक का मन मोह लेते हैं।

भारत की सांस्कृतिक विविधता केवल खान-पान और पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की सड़कों और गलियों की वास्तुकला में भी रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। देश के विभिन्न राज्यों में बसी ऐतिहासिक गलियां अपने जीवंत शेड्स, औपनिवेशिक इमारतों और पारंपरिक जीवनशैली की वजह से पर्यटकों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। यदि आप यात्रा के दौरान अनूठे दृश्यों और जीवंत माहौल को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो इन प्रसिद्ध गलियारों की सैर एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है।

फोंटेनहास, पणजी (गोवा): पुर्तगाली दौर का रंगीन अक्स

गोवा की राजधानी पणजी में स्थित फोंटेनहास क्वार्टर पुर्तगाली स्थापत्य कला का एक जीवंत उदाहरण है। इस इलाके की घुमावदार और संकरी गलियों के दोनों तरफ बने ऐतिहासिक मकानों को सरसों जैसे पीले, नीले और हल्के गुलाबी रंगों से सजाया गया है। इन मकानों की लाल टाइलों वाली छतें और नक्काशीदार लकड़ी की बालकनियां इस पूरे पड़ोस को यूरोपीय औपनिवेशिक दौर जैसा रूप देती हैं, जिससे यहां टहलना किसी पुरानी चित्रकारी में चलने जैसा लगता है।

ये भी पढ़ें

जोधपुर की नीली गलियां (राजस्थान): रेगिस्तान में शीतलता का अहसास

राजस्थान के जोधपुर शहर में ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले के निचले हिस्से में बसा ब्राह्मण इलाका अपनी खास नीली रंगत के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। संकरी और भूलभुलैया जैसी इन गलियों के दोनों तरफ बने मकानों पर इंडिगो नीला रंग पुता हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भीषण रेगिस्तानी गर्मी से घरों को ठंडा रखने और दीमक से बचाने के लिए यह रंग लगाने की परंपरा शुरू हुई थी, जो आज इस शहर की वैश्विक पहचान बन चुकी है।

फ्रेंच क्वार्टर, पुडुचेरी: इंडो-फ्रेंच वास्तुकला का सुकून

व्हाइट टाउन के नाम से मशहूर पुडुचेरी का फ्रेंच क्वार्टर अपनी क्लासिक पीली, पीच और सफेद औपनिवेशिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र तट की तरफ जाती इन शांत और पत्थरों से बनी गलियों के किनारों पर खिले चमकीले बोगनवेलिया के फूल माहौल को और भी आकर्षक बनाते हैं। पेड़ों की घनी छांव और फ्रांसीसी वास्तुकला का यह तालमेल भारत और फ्रांस की साझी सांस्कृतिक विरासत का एक सुखद अहसास कराता है।

जौहरी बाजार, जयपुर (राजस्थान): शाही गुलाबी विरासत

जयपुर के ऐतिहासिक पुराने शहर का जौहरी बाजार अपनी भव्य टेराकोटा-गुलाबी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। साल 1876 में ब्रिटिश शाही मेहमानों के स्वागत के लिए पूरे शहर की मुख्य इमारतों को इस खास गुलाबी रंग में रंगा गया था। कीमती रत्नों, आभूषणों और पारंपरिक परिधानों की दुकानों से सजे इस बाजार की चौड़ी सड़कें और एक समान रंग-रूप वाली इमारतें जयपुर के शाही इतिहास को आज भी बयां करती हैं।

वाराणसी के घाटों की गलियां (उत्तर प्रदेश): आध्यात्मिक रंगों की झलक

पवित्र गंगा नदी के प्राचीन घाटों के ठीक पीछे बसी वाराणसी की संकरी गलियां आध्यात्मिकता और रंगों का अनोखा मिश्रण पेश करती हैं। इन गलियों में जगह-जगह लहराते केसरिया झंडे, दीवारों पर बने हाथ के भित्तिचित्र और रंग-बिरंगे मंदिर नजर आते हैं। संकरे रास्तों से छनकर आती सूरज की किरणें, ताजे गेंदे के फूलों की मालाएं और रंगे हुए मंदिर परिसर इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक पहचान को बेहद गहराई से उजागर करते हैं।

मॉल रोड, शिमला (हिमाचल प्रदेश): पहाड़ियों के बीच ब्रिटिश आकर्षण

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित प्रसिद्ध मॉल रोड केवल पैदल चलने वालों के लिए आरक्षित एक सुंदर मार्ग है। हरे-भरे हिमालयी पहाड़ों से घिरे इस रास्ते पर ब्रिटिश काल की लकड़ी की संरचनाएं, हरे, लाल और सफेद रंगों से सजी पुरानी इमारतें और विंटेज स्ट्रीट लैंप देखने को मिलते हैं। फूलों से सजे रास्ते और रंग-बिरंगी दुकानों की कतारें शिमला के ऐतिहासिक औपनिवेशिक अहसास को बढ़ा देती हैं।

ज्यू टाउन, कोच्चि (केरल): मसालों की सुगंध और डच इतिहास

केरल के मट्टनचेरी इलाके में स्थित ज्यू टाउन सदियों पुराने मसाला व्यापार की गवाही देता है। यहां पत्थरों से बने रास्तों के दोनों ओर पेस्टल रंगों वाले पुराने गोदाम और डच स्थापत्य कला के मकान खड़े हैं। इलायची, लौंग और दालचीनी की खुशबू से महकते बाजार और मकानों की रंग-बिरंगी खिड़कियां इस बात का प्रमाण हैं कि यह क्षेत्र कभी बहुसांस्कृतिक व्यापार का बहुत बड़ा केंद्र हुआ करता था।

मुल्लप्पम स्ट्रीट, मदुरै (तमिलनाडु): मंदिर परिसर की जीवंतता

मदुरै के विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर के आसपास स्थित मुल्लप्पम स्ट्रीट की गलियां हमेशा चहल-पहल से भरी रहती हैं। ऊंचे और विशाल मंदिर गोपुरमों की छांव में बसी इन गलियों में हथकरघा वस्त्रों की दुकानें और सुगंधित फूलों के बाजार सजे रहते हैं। दुकानों के बाहर टंगे चमकीले पारंपरिक कपड़े और फूलों की लड़ियाँ तमिलनाडु की समृद्ध लोक संस्कृति और धार्मिक जीवनशैली का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

कमर्शियल स्ट्रीट, बेंगलुरु (कर्नाटक): आधुनिक रोशनी का रंगीन बाजार

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का कमर्शियल स्ट्रीट एक प्रमुख शॉपिंग गंतव्य है जो हर समय रंगीन कपड़ों, जगमगाती नीयॉन लाइटों और आकर्षक डिस्प्ले से भरा रहता है। सड़क किनारे रखे रंग-बिरंगे फैब्रिक रोल और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड के स्टॉल इस इलाके की ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देते हैं। त्योहारों के मौसम में की जाने वाली विशेष रोशनी इस व्यापारिक क्षेत्र को एक जीवंत शहरी तस्वीर में बदल देती है।

सवाल-जवाब

जोधपुर के घरों को पारंपरिक रूप से नीला क्यों रंगा जाता है?
रेगिस्तानी गर्मी से घरों को ठंडा रखने और दीवारों को कीड़े-मकोड़ों से बचाने के लिए पारंपरिक रूप से जोधपुर में नीला रंग लगाया जाता है।
जयपुर को पिंक सिटी क्यों कहा जाता है और जौहरी बाजार गुलाबी क्यों है?
साल 1876 में ब्रिटिश शाही मेहमानों के स्वागत के लिए पूरे शहर की इमारतों को टेराकोटा-गुलाबी रंग में रंगा गया था, जिसे आज भी कायम रखा गया है।
गोवा का फोंटेनहास इलाका किस वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है?
फोंटेनहास अपने पुर्तगाली औपनिवेशिक मकानों, नक्काशीदार लकड़ी की बालकनियों और पीले, नीले तथा गुलाबी रंगों की दीवारों के लिए जाना जाता है।
कोच्चि का ज्यू टाउन किस ऐतिहासिक व्यापार के लिए जाना जाता है?
मट्टनचेरी में स्थित ज्यू टाउन सदियों पुराने मसाला व्यापार, विशेष रूप से इलायची और लौंग के व्यापारिक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR