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सहारनपुर के बादशाही बाग में घूमने की वो खास जगहें, जहां बिना किसी खर्च के लें प्राकृतिक खूबसूरती का मजायात्रा
29 अग॰ 2026, 3:02 pm (41 मिनट पहले)· 2

सहारनपुर के बादशाही बाग में घूमने की वो खास जगहें, जहां बिना किसी खर्च के लें प्राकृतिक खूबसूरती का मजा

सहारनपुर का बादशाही बाग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां बिना किसी शुल्क के कई बेहतरीन जगहों पर घूमने का आनंद उठाया जा सकता है।

सहारनपुर के कई इलाके पिकनिक और सैर-सपाटे के लिए काफी मशहूर हैं, लेकिन आज हम जिस जगह की चर्चा कर रहे हैं उसे सहारनपुर का सबसे खूबसूरत क्षेत्र माना जाता है, जिसका नाम बादशाही बाग है। यहां प्रकृति का दीदार करने, पिकनिक मनाने और सुकून के पल बिताने के लिए दूर-दूर से सैलानी पहुंचते हैं। आइए जानते हैं कि इस क्षेत्र में आपको कौन-कौन सी बेहतरीन जगहें बिल्कुल मुफ्त में देखने को मिल सकती हैं।

बादशाही महल और उसका ऐतिहासिक महत्व

इस क्षेत्र के सबसे खास आकर्षणों में बादशाही महल की गिनती होती है, जिसके नाम पर इस पूरे इलाके का नाम बादशाही बाग पड़ा है। इतिहास के पन्नों के अनुसार, इस ऐतिहासिक महल का निर्माण शाहजहां ने अपनी बेगम के लिए करवाया था। इसके अलावा, राजा यहां शिकार खेलने के बाद विश्राम भी किया करते थे, जिस वजह से इसे शिकारगाह के रूप में भी जाना जाता था। हालांकि, आज यह भव्य इमारत केवल एक खंडहर में तब्दील हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वीकेंड पर या छुट्टियों के दिनों में सैलानी यहां पिकनिक मनाने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।

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चार राज्यों की सीमा से घिरा अनूठा प्राकृतिक परिवेश

बादशाही बाग में स्थित यह सैकड़ों साल पुराना महल जो अब खंडहर बन चुका है, एक बेहद खास भौगोलिक स्थिति में स्थित है। इसके चारों तरफ चार अलग-अलग राज्यों की सीमाएं मिलती हैं, जिसमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। चार राज्यों के संगम जैसा यह सुंदर इलाका पर्यटकों के घूमने के लिए सबसे पसंदीदा स्थानों में शुमार है। यहां आने वाले लोगों को घने पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, बहती नदी की शीतलता और गहरी शांति का अहसास होता है, जो मन को मोह लेता है।

हथिनी कुंड बैराज की खूबसूरती और उपयोगिता

इस यात्रा में आगे बढ़ते हैं तो हथिनी कुंड बैराज का जिक्र आता है, जो बादशाही बाग क्षेत्र के अंतर्गत ही पड़ता है। हथिनी कुंड बैराज हरियाणा के यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की सीमा पर यमुना नदी पर बना हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण कंक्रीट का ढांचा है। यह बैराज सिंचाई व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण और पीने के पानी की आपूर्ति में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। यह विशाल जलसंरचना कुल पांच राज्यों यानी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की एक संयुक्त परियोजना के रूप में संचालित होती है।

बरसात के दिनों में बदल जाता है नजारा

खासतौर पर मानसून या बरसात के मौसम में यहां पर्यटकों की आवाजाही काफी बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान हथिनी कुंड बैराज में पानी का जलस्तर और बहाव काफी अधिक हो जाता है, जो देखने में बेहद मनोरम दृश्य पेश करता है। यहां से यमुना नदी में पानी छोड़ा जाता है और फिर वहां से छोटे-छोटे जलधाराओं व नहरों में पानी का वितरण किया जाता है। लोग यहां कलकले करते झरनों का दीदार करने और बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए आते हैं। इन दिनों यह पर्यटन स्थल लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

नौ गजापीर की मजार और वन गुर्जरों का डेरा

बादशाही बाग के घने जंगलों के बीच स्थित नौ गजापीर की मजार भी सैलानियों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है। यह मजार एक घने जंगल के बीच बहती नदी के तट पर बनी हुई है। लोग यहां अपनी मन्नतें मांगने आते हैं और साथ ही जंगल की हरी-भरी वादियों का आनंद लेते हैं। बरसाती नदी के बीचों-बीच स्थित इस पवित्र और शांत स्थान पर पहाड़ों के बीच समय बिताना लोगों को बहुत भाता है। इसके पास ही छोटे-छोटे वन गुर्जरों के आशियाने भी बने हुए हैं, जिनसे मिलने और उनकी जीवनशैली के बीच कुछ पल बिताने का अनूठा मौका मिलता है।

पातालेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का तांता

इन प्राचीन जंगलों के आंचल में बसा पातालेश्वर महादेव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का बड़ा केंद्र है। घने वनों के बीच स्थापित यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। ऐसी मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी मनोकामनाएं लेकर इस मंदिर में पहुंचता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। खासकर वे लोग जिनके यहां संतान नहीं होती, वे विशेष रूप से यहां आशीर्वाद लेने आते हैं। इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को आसपास बहती सुंदर नदी और छोटे-छोटे झरनों की प्राकृतिक छटा देखने का अद्भुत अवसर भी मिलता है।

मिनी गोवा बीच का अनूठा अहसास

इन सबके अलावा, बादशाही बाग क्षेत्र में तेजी से चर्चित हो रहा मिनी गोवा बीच भी पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। यहां आने वाले लोग बिल्कुल गोवा जैसी बीच की फीलिंग का लुत्फ उठाते हैं। शिवालिक पहाड़ियों के बीच से बहती यमुना नदी यहां बेहद शांत और मनमोहक रूप में दिखाई देती है। यही शांत और मनोरम वातावरण पर्यटकों को गोवा बीच जैसा अहसास कराता है, और यही वजह है कि इस जगह का नाम मिनी गोवा बीच पड़ गया है। दूर-दराज से लोग गोवा की लंबी यात्रा करने के बजाय अपने परिवार के साथ यहीं पहुंचकर गोवा जैसे बीच का मजा ले रहे हैं।

सवाल-जवाब

बादशाही बाग क्षेत्र का नाम किस ऐतिहासिक इमारत के नाम पर पड़ा है?
बादशाही बाग का नाम क्षेत्र में स्थित बादशाही महल के नाम पर पड़ा है, जिसका निर्माण शाहजहां ने अपनी बेगम के लिए करवाया था।
बादशाही महल को किस अन्य नाम से भी जाना जाता था?
बादशाही महल को शिकारगाह भी कहा जाता था क्योंकि राजा यहां शिकार करने के बाद आराम करते थे।
बादशाही बाग के खंडहर के चारों ओर किन राज्यों की सीमाएं लगती हैं?
इस क्षेत्र के चारों ओर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों की सीमाएं लगती हैं।
हथिनी कुंड बैराज किन दो जिलों की सीमा पर स्थित है?
हथिनी कुंड बैराज हरियाणा के यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की सीमा पर स्थित है।
हथिनी कुंड बैराज किन पांच राज्यों की संयुक्त परियोजना है?
यह बैराज हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की एक संयुक्त परियोजना है।
बादशाही बाग में कौन सा प्राचीन महादेव मंदिर स्थित है?
इस क्षेत्र में सैकड़ों साल पुराना पातालेश्वर महादेव मंदिर स्थित है जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
बादशाही बाग के मिनी गोवा बीच की क्या विशेषता है?
यहां शिवालिक पहाड़ियों के बीच यमुना नदी शांत रूप से बहती है, जिससे पर्यटकों को गोवा जैसा अहसास मिलता है।
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