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मुंह के छालों के कारण कान में क्यों उठता है दर्द? जानिए 'रेफर्ड पेन' का मेडिकल सच और बचाव के उपायस्वास्थ्य
6 सित॰ 2026, 3:40 pm (51 दिन पहले)· 6

मुंह के छालों के कारण कान में क्यों उठता है दर्द? जानिए 'रेफर्ड पेन' का मेडिकल सच और बचाव के उपाय

मुंह में छाले होने पर अक्सर कान में भी दर्द महसूस होने लगता है। मेडिकल साइंस के अनुसार यह कान का संक्रमण नहीं बल्कि 'रेफर्ड पेन' की स्थिति होती है, जिसे सही देखभाल और सावधानियों से नियंत्रित किया जा सकता है।

मुंह में छालों की समस्या न केवल खाने-पीने और बोलने में बाधा बनती है, बल्कि कई बार यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी तकलीफ की वजह बन जाती है। कई लोगों को छाले होने पर अचानक कान में भी तेज या हल्का दर्द महसूस होने लगता है। ऐसे में अधिकतर लोग यह मान लेते हैं कि उनके कान में कोई अलग से इन्फेक्शन हो गया है। लेकिन डॉक्टरी जांच में अक्सर यह बात सामने आती है कि कान में कोई खराबी नहीं होती, बल्कि दर्द का असली जरिया मुंह के अंदर मौजूद छाला ही होता है। खासतौर पर जब छाला जीभ के पिछले हिस्से, तालू या गले के करीब होता है, तब इसका असर सीधे कान तक महसूस हो सकता है।

तंत्रिका तंत्र और 'रेफर्ड पेन' का मेडिकल सच

हमारे चेहरे, मुंह, गले और कान का अंदरूनी तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) एक-दूसरे से बेहद जटिल तरीके से जुड़ा होता है। मुंह और गले के पिछले हिस्से को संवेदनशील बनाने वाली नसें ही कान के अंदरूनी हिस्सों तक भी संकेत पहुंचाती हैं। जब मुंह में छाला, मसूड़ों में सूजन या गले में जलन होती है, तो वहां की नसें उत्तेजित हो जाती हैं। ये नसें दर्द का जो सिग्नल दिमाग तक भेजती हैं, दिमाग कई बार उसे कान से आता हुआ महसूस करता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को 'रेफर्ड पेन' कहा जाता है। इसका सरल अर्थ यह है कि दर्द की मुख्य वजह शरीर के किसी एक अंग में होती है, लेकिन उसका अहसास किसी दूसरे अंग में होता है।

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कान का इन्फेक्शन या छालों का असर? ऐसे समझें अंतर

कान के दर्द की सही वजह जानने के लिए लक्षणों के रुझान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि मुंह का छाला ठीक होने के साथ-साथ कान का दर्द भी धीरे-धीरे कम होने लगे, तो यह स्पष्ट तौर पर 'रेफर्ड पेन' का मामला होता है। हालांकि, अगर छाला ठीक होने के बाद भी कान में लगातार दर्द बना रहे या समय के साथ बढ़ता जाए, तो इसे केवल छाले का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दांतों में कीड़ा लगना, मसूड़ों की गहरी सूजन, जबड़े की समस्या या गले में संक्रमण भी कान में दर्द का कारण बन सकते हैं।

कुछ विशेष लक्षण दिखने पर बिना देर किए डॉक्टर या ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। यदि कान के दर्द के साथ तेज बुखार आ रहा हो, सुनने की क्षमता में कमी महसूस हो, कान से पानी या मवाद बह रहा हो, या कान और जबड़े के आसपास सूजन दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सीय जांच करानी चाहिए।

खान-पान में सावधानी, घरेलू उपाय और चिकित्सीय सलाह

छालों की समस्या से राहत पाने के लिए मुंह की संवेदी त्वचा का बचाव करना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक छाले पूरी तरह ठीक न हों, तब तक अधिक तीखे, मसालेदार, खट्टे, अत्यधिक नमकीन और बहुत गर्म भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इनके स्थान पर हल्का, नरम और सुपाच्य खाना खाना फायदेमंद होता है। दिन में दो से तीन बार हल्के गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के जीवाणु कम होते हैं और सूजन में तेजी से आराम मिलता है।

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार मुंह में छाले होने की शिकायत रहती है, तो इसे केवल खान-पान की खराबी मानकर टालना सही नहीं है। बार-बार छाले होना शरीर में विटामिन बी12 या आयरन की कमी, पाचन तंत्र की पुरानी गड़बड़ी या कमजोर इम्युनिटी का संकेत हो सकता है। सही कारण का पता लगाने और उचित इलाज के लिए किसी योग्य डॉक्टर या डेंटिस्ट से संपर्क करना बेहद आवश्यक है।

सवाल-जवाब

क्या मुंह का छाला सचमुच कान में दर्द पैदा कर सकता है?
हां, मुंह और कान की नसें आपस में जुड़ी होने के कारण मुंह के छाले का दर्द कान में महसूस हो सकता है, जिसे रेफर्ड पेन कहते हैं।
रेफर्ड पेन क्या होता है?
रेफर्ड पेन वह चिकित्सीय स्थिति है जिसमें दर्द की मुख्य वजह शरीर के किसी एक हिस्से में होती है, लेकिन इसका अहसास किसी दूसरे अंग में होता है।
कान का दर्द छालों की वजह से है या संक्रमण से, यह कैसे पहचानें?
यदि छाला ठीक होने के साथ कान का दर्द कम हो जाए तो यह छालों की वजह से है। लेकिन अगर दर्द बना रहे, बुखार आए या कान से पानी निकले तो यह संक्रमण हो सकता है।
छाले होने पर क्या खाने से बचना चाहिए?
छाले होने पर अधिक मसालेदार, खट्टे, नमकीन और बहुत गर्म भोजन से बचना चाहिए क्योंकि ये नसों में जलन बढ़ाते हैं।
बार-बार मुंह में छाले होने पर क्या करना चाहिए?
बार-बार छाले होने पर डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए, क्योंकि यह विटामिन बी12 की कमी या पाचन तंत्र की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
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