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हैदराबाद के पास ज़मीन से 65 फीट नीचे बसी है बेलम गुफाओं की एक रहस्यमयी दुनियायात्रा
14 सित॰ 2026, 2:42 pm (43 दिन पहले)· 0

हैदराबाद के पास ज़मीन से 65 फीट नीचे बसी है बेलम गुफाओं की एक रहस्यमयी दुनिया

हैदराबाद से करीब 320 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश में स्थित बेलम गुफाएं देश की सबसे लंबी मैदानी भूमिगत गुफा प्रणाली हैं। चूना पत्थर से बनी इस गुफा में पाताल गंगा और संगीतमय चट्टानों जैसे अद्भुत आकर्षण मौजूद हैं।

अगर आप शहर के शोर शराबे से दूर किसी अनोखी और रोमांचक जगह की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आंध्र प्रदेश में स्थित बेलम गुफाएं आपके लिए एक बेहतरीन गंतव्य साबित हो सकती हैं। हैदराबाद शहर से सड़क मार्ग से लगभग 320 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद यह गुफा संरचना भारतीय उपमहाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफा प्रणाली के रूप में जानी जाती है। यदि केवल समतल मैदानी क्षेत्रों की बात करें, तो यह भारत की सबसे लंबी भूमिगत गुफा का दर्जा रखती है। ऊपर मैदानी धरातल से देखने पर यह किसी आम खेत के बीच बने एक गहरे कुएं जैसी प्रतीत होती है, लेकिन जैसे ही पर्यटक ज़मीन के धरातल से करीब 65 फीट नीचे की ओर उतरते हैं, उनके सामने कुदरत का एक अद्भुत और रहस्यमयी संसार उजागर हो जाता है। यह पूरी गुफा चूना पत्थर की संरचनाओं से निर्मित है और इसकी कुल लंबाई लगभग 3.2 किलोमीटर दर्ज की गई है, जिसमें से लगभग 1.5 किलोमीटर का मार्ग पर्यटकों के भ्रमण के लिए सुरक्षित रूप से खोला गया है।

कुदरत का अनोखा स्थापत्य और मुख्य आकर्षण

गुफा के अंदर प्रवेश करते ही लाखों वर्षों के दौरान जल और चूने के प्राकृतिक कटाव से निर्मित चट्टानों की विस्मयकारी कलाकृतियां दिखाई देती हैं। इस गुफा के अलग-अलग हिस्सों की अपनी विशिष्ट खासियतें हैं जो सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

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  • सिम्हाद्वारम: इस गुफा का एक प्रमुख आकर्षण सिम्हाद्वारम कहलाता है। यह एक स्वाभाविक मेहराबदार आकृति है, जो देखने में बिल्कुल दहाड़ मारते हुए किसी शेर के खुले हुए मुंह जैसी नज़र आती है।
  • कोटिलिंगलु: गुफा की ऊपरी छत से निरंतर टपकती पानी की बूंदों और खनिजों के जमाव से यहां स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट की आकृतियां बनी हैं। ये प्राकृतिक आकृतियां दूर से देखने पर हजारों शिवलिंगों के समूह जैसी प्रतीत होती हैं।
  • म्यूजिकल चैंबर: गुफा के भीतर स्थित म्यूजिकल चैंबर अपनी अनूठी खासियत के लिए प्रसिद्ध है। यहां मौजूद चट्टानी स्तंभों पर यदि उंगलियों या लकड़ी के टुकड़े से हल्की सी थपकी दी जाए, तो उनमें से धातु जैसी मधुर संगीतमय ध्वनियां और सात सुरों की गूंज सुनाई देती है।
  • पाताल गंगा: यह इस पूरी गुफा प्रणाली का सबसे निचला और गहरा स्थान माना जाता है। ज़मीन के धरातल से लगभग 150 फीट की गहराई पर स्थित इस स्थल पर एक भूमिगत जलधारा प्रवाहित होती है, जिसमें पूरे वर्ष जल का प्रवाह बना रहता है।

ऐतिहासिक महत्व और यात्रा की संपूर्ण जानकारी

बेलम गुफाएं केवल अपने भूवैज्ञानिक महत्व के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि इनका एक गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार भी है। प्राचीन काल में यहां जैन और बौद्ध भिक्षु निवास करते थे। खोज के दौरान गुफाओं के भीतर से सदियों पुराने भिक्षुओं के अवशेष तथा उनके ध्यान लगाने के स्थल पाए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह स्थान प्राचीन आध्यात्मिक साधना का भी केंद्र रहा है।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से यहां पहुंचना काफी आसान और सुविधाजनक है। जो पर्यटक सड़क मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं, वे राष्ट्रीय राजमार्ग NH-44 के माध्यम से कुरनूल शहर होते हुए लगभग 6 से 7 घंटे की यात्रा में बेलम गुफाएं पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन ताड़ीपत्री है, जो इस गुफा स्थल से मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ताड़ीपत्री से स्थानीय वाहन या टैक्सी के जरिए आसानी से गुफा तक पहुंचा जा सकता है। मौसम के दृष्टिकोण से, अक्टूबर से फरवरी के बीच की अवधि को बेलम गुफाओं के भ्रमण के लिए सबसे अनुकूल और आरामदायक माना जाता है, क्योंकि इस दौरान यहां का तापमान सुखद रहता है।

सवाल-जवाब

बेलम गुफाएं कहां स्थित हैं?
यह गुफा आंध्र प्रदेश में स्थित है और हैदराबाद से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 320 किलोमीटर दूर है।
बेलम गुफाएं कितनी लंबी हैं और पर्यटकों के लिए कितना हिस्सा खुला है?
गुफा की कुल लंबाई लगभग 3.2 किलोमीटर है, जिसमें से 1.5 किलोमीटर का हिस्सा पर्यटकों के घूमने के लिए खोला गया है।
बेलम गुफाओं में 'पाताल गंगा' क्या है?
पाताल गंगा ज़मीन से करीब 150 फीट नीचे स्थित गुफा का सबसे गहरा बिंदु है, जहां पूरे साल एक भूमिगत जलधारा बहती है।
बेलम गुफाएं घूमने जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से फरवरी के बीच का महीना बेलम गुफाएं घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
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