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कोटा संभाग की जंगली दुनिया: बाघ, घड़ियाल और सैकड़ों दुर्लभ पक्षियों से सजे राजस्थान के तीन अनोखे ठिकानेयात्रा
16 जून 2026, 8:26 am (45 दिन पहले)· 2

कोटा संभाग की जंगली दुनिया: बाघ, घड़ियाल और सैकड़ों दुर्लभ पक्षियों से सजे राजस्थान के तीन अनोखे ठिकाने

राजस्थान के कोटा संभाग में फैले मुकुंदरा हिल्स (दर्रा), रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे संरक्षित क्षेत्र बाघ से लेकर प्रवासी पक्षियों तक की समृद्ध जैव विविधता और शाही शिकार विरासत को एक साथ समेटे हुए हैं।

राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी छोर पर बसा कोटा संभाग प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़, इन चार जिलों को मिलाकर बना यह संभाग प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता के मामले में बेहद समृद्ध माना जाता है। यहां तीन प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य हैं, दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, जवाहर सागर वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य। ये तीनों न सिर्फ वन्यजीवों को पनाह देते हैं, बल्कि पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

दर्रा से मुकुंदरा हिल्स तक: शाही शिकारगाह का सफर

कभी कोटा रियासत के महाराजाओं का शिकार क्षेत्र रहा दर्रा वन्यजीव अभयारण्य आज मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व के नाम से पहचाना जाता है। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कोटा और झालावाड़ जिलों में फैले इस संरक्षित क्षेत्र की नींव 1955 में रखी गई थी, जब इसे वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा मिला। कोटा जिले से इसकी दूरी करीब 50 किलोमीटर है और यह लगभग 250 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।

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घनी वनस्पति, पहाड़ी भू-भाग और विविध वन्यजीव इस इलाके की पहचान हैं। यहां तेंदुआ, भालू, हिरण और जंगली सूअर के साथ-साथ कई प्रजातियों के पक्षी देखने को मिलते हैं। इसके अलावा चिंकारा, सांभर, नीलगाय, भेड़िया, रीछ और चित्तीदार हिरण भी इस वन क्षेत्र में विचरण करते हैं। दुर्लभ और औषधीय गुणों से भरपूर पेड़-पौधे यहां की जैव विविधता को और भी खास बनाते हैं। कोटा के पुराने शासकों के बनवाए शिकार विश्रामगृह आज भी मौजूद हैं और इस अभयारण्य की ऐतिहासिक विरासत की गवाही देते हैं। प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों की भरमार और शाही इतिहास इसे राजस्थान के अहम पर्यटन स्थलों में शुमार करते हैं।

रामगढ़ विषधारी: देश का 52वां बाघ अभयारण्य

बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को वर्ष 2022 में भारत का 52वां बाघ अभयारण्य घोषित किया गया। करीब 1500 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र रणथम्भौर और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीवों की आवाजाही के लिए एक अहम कॉरिडोर का काम करता है। घने जंगल, पहाड़ी इलाके और भरपूर जैव विविधता यहां की खूबियां हैं, जहां तेंदुआ, भालू और हिरण समेत कई वन्यजीवों की अच्छी-खासी संख्या मौजूद है।

यह इलाका कभी हाड़ा चौहान शासकों के संरक्षण में रहा और अपनी प्राकृतिक तथा ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, कैराकल और धारीदार लकड़बग्घा के साथ-साथ 200 से अधिक पक्षी प्रजातियां देखी जा सकती हैं। धोक और सालर के घने वन इस क्षेत्र की जैव विविधता को मजबूती देते हैं और वन्यजीवों के लिए अनुकूल आवास तैयार करते हैं। यही वजह है कि बाघ संरक्षण के साथ-साथ यह क्षेत्र पर्यटकों और शोधकर्ताओं को भी अपनी ओर खींचता है।

प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए रामगढ़ विषधारी एक यादगार ठिकाना है, जहां वन संरक्षण, जैव विविधता और बूंदी की शाही विरासत का दुर्लभ संगम देखने को मिलता है। पर्यटक यहां घने जंगलों, पहाड़ी भू-भाग और रंग-बिरंगे वन्यजीवन को बेहद करीब से महसूस कर पाते हैं। शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य इस जगह को और भी रोमांचक बना देते हैं।

सोरसन घासभूमि: प्रवासी पक्षियों का सर्दियों का घर

बारां जिले की अंता तहसील में बसा सोरसन वन्यजीव अभयारण्य एक संरक्षित पारिस्थितिक पर्यटन स्थल है, जिसे सोरसन घासभूमि के नाम से भी जाना जाता है। करीब 41 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य की पहचान इसकी खुली घासभूमियां, तालाब, झीलें और झाड़ीदार वनस्पतियां हैं। यह जगह खासतौर पर पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग मानी जाती है।

यहां ओरिओल, बटेर, तीतर, बया और रॉबिन के अलावा तरह-तरह के जलपक्षी बड़ी संख्या में नजर आते हैं। चिंकारा और काला हिरण जैसे वन्यजीव भी यहां आसानी से दिख जाते हैं। सर्दियों का मौसम आते ही सोरसन घासभूमि प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय बन जाती है। इस दौरान वार्बलर, फ्लाईकैचर, लार्क, स्टार्लिंग और रोज़ी पास्टर जैसे कई प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं, जिससे इसकी जैव विविधता और भी निखर उठती है। अपनी समृद्ध पक्षी संपदा, प्राकृतिक खूबसूरती और शांति के कारण सोरसन राजस्थान के अहम प्रकृति पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

सवाल-जवाब

कोटा संभाग में कौन-कौन से प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य हैं?
यहां दर्रा वन्यजीव अभयारण्य (मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व), जवाहर सागर वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य प्रमुख हैं। इसके अलावा रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और सोरसन वन्यजीव अभयारण्य भी इसी इलाके में हैं।
रामगढ़ विषधारी को भारत का कौन सा बाघ अभयारण्य घोषित किया गया?
बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को वर्ष 2022 में भारत का 52वां बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था।
दर्रा अभयारण्य कब और किसका शिकार क्षेत्र था?
इसे 1955 में वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा मिला था और यह कभी कोटा रियासत के महाराजाओं और शाही परिवार का शिकार क्षेत्र हुआ करता था।
सोरसन घासभूमि में सर्दियों में कौन से पक्षी आते हैं?
शीत ऋतु में यहां वार्बलर, फ्लाईकैचर, लार्क, स्टार्लिंग और रोज़ी पास्टर जैसे कई प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं।
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