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माउंट आबू का सबसे लंबा 'टाइगर पाथ': बिना बाघ वाले इस जंगल में लेपर्ड, भालू और लंगूरों का रोमांचयात्रा
13 जून 2026, 8:30 am (137 दिन पहले)· 3

माउंट आबू का सबसे लंबा 'टाइगर पाथ': बिना बाघ वाले इस जंगल में लेपर्ड, भालू और लंगूरों का रोमांच

राजस्थान के माउंट आबू में करीब 8 किलोमीटर लंबा टाइगर पाथ नेचुरल ट्रेल वन्यजीव और हरे-भरे नजारों के लिए मशहूर है, जो जंगल सफारी जैसा अनुभव देता है।

राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन माउंट आबू अपने ठंडे मौसम और दर्शनीय स्थलों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां की भीड़भाड़ से दूर एक ऐसी जगह भी है जो प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों को सीधे जंगल के बीच ले जाती है। सिरोही जिले में स्थित इस हिल स्टेशन की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के भीतर बना यह नेचुरल ट्रेल करीब 8 किलोमीटर लंबा है और इसे टाइगर पाथ के नाम से पहचाना जाता है।

नाम में बाघ, पर जंगल में लेपर्ड

नाम सुनते ही ज्यादातर लोग यहां बाघ होने का अनुमान लगा लेते हैं, मगर हकीकत इससे अलग है। माउंट आबू के इस जंगल में कोई बाघ नहीं रहता। दरअसल यहां पाए जाने वाले लेपर्ड का डील-डौल और उनके शरीर पर उभरी धारियां इतनी हद तक बाघ से मिलती-जुलती हैं कि इसी समानता के चलते इस रास्ते का नाम टाइगर पाथ पड़ गया। माउंट आबू के ट्रैवल गाइड चिंटू यादव के मुताबिक, शहर के तमाम नेचुरल ट्रेल में सबसे लंबा रास्ता यही है, और इसका नाम यहां मौजूद बड़े आकार के लेपर्ड की वजह से रखा गया।

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कहां से शुरू, कहां खत्म

यह ट्रेल सेंट मैरी स्कूल के पास से शुरू होता है और सीतावन आरना के नजदीक जाकर समाप्त होता है। यहां पहुंचने के लिए पर्यटक वन विभाग से अनुमति लेकर जीप के जरिए और किसी प्रशिक्षित गाइड के साथ ही जा सकते हैं। रास्ते में लेपर्ड, भालू और ग्रे लंगूर जैसे जंगली जानवरों के अलावा कई दूसरे वन्यजीव और पक्षी देखने को मिल जाते हैं, जिससे यह सैर किसी जंगल सफारी से कम नहीं लगती।

बारिश में हरियाली, पर सावधानी भी जरूरी

मानसून के दिनों में यह पूरा इलाका चारों ओर हरियाली और मनमोहक नजारों से ढक जाता है। हालांकि इसी मौसम में यहां आते समय कुछ एहतियात बरतना भी जरूरी हो जाता है। फिसलन भरे रास्तों को देखते हुए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनकर आना चाहिए, और साथ में पानी की बोतल तथा खाने का सामान रखना भी फायदेमंद रहता है।

गोल्डन हॉर्न से दिखता है पूरा माउंट आबू

इसी नेचुरल ट्रेल के रास्ते आप माउंट आबू के एक खास व्यू पॉइंट गोल्डन हॉर्न तक भी पहुंच सकते हैं। इस जगह को यह नाम यहां की एक पहाड़ी की वजह से मिला, जो सुबह के समय सुनहरी चमक बिखेरती है और देखने में किसी जानवर के सींग (हॉर्न) जैसी लगती है। यहीं पर सबसे बड़ी नेचुरल चिमनी भी बनी हुई है। यह चिमनी इतनी संकरी है कि आज तक कोई इसके भीतर ज्यादा गहराई तक नहीं उतर पाया है। इस पॉइंट से माउंट आबू की वादियों का जो विहंगम दृश्य दिखता है, उसे देखकर हर सैलानी यहां दोबारा लौटने की चाहत रखता है।

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