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नैना पीक से लेकर ARIES तक, नैनीताल के इन 8 ठिकानों से बिना दूरबीन के दिखता है आकाशगंगा का नजारायात्रा
1 घंटे पहले· 2

नैना पीक से लेकर ARIES तक, नैनीताल के इन 8 ठिकानों से बिना दूरबीन के दिखता है आकाशगंगा का नजारा

नैनीताल के मनोरा पीक स्थित ARIES से लेकर नैना पीक तक, जिले की कई पहाड़ी जगहों पर रात के साफ आसमान में बिना किसी उपकरण के तारे, ग्रह और मिल्की वे साफ नजर आते हैं।

नैनीताल सिर्फ झीलों और हरी-भरी पहाड़ियों के लिए ही नहीं जाना जाता, रात होते ही यहां का आसमान भी सैलानियों को अपनी ओर खींचता है। शहर की चकाचौंध से दूर पहाड़ी इलाकों में रोशनी का प्रदूषण बेहद कम है, इसलिए यहां की कुछ खास जगहों से बिना किसी भारी उपकरण के भी तारों, ग्रहों और आकाशगंगा का नजारा साफ दिखाई देता है। पर्यटन विभाग अब इस इलाके को एस्ट्रो टूरिज्म के तौर पर भी बढ़ावा दे रहा है, जिसमें आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान यानी ARIES से लेकर नैना पीक तक कई ठिकाने शामिल हैं।

मनोरा पीक पर बना है देश का बड़ा खगोलीय केंद्र

नैनीताल के मनोरा पीक पर आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान यानी ARIES स्थित है, जो देश के प्रमुख खगोलीय और वायुमंडलीय शोध केंद्रों में गिना जाता है। यहां तैनात वैज्ञानिक अत्याधुनिक टेलीस्कोप और आधुनिक मशीनों की मदद से ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं से जुड़ी रिसर्च करते हैं। मौसम साफ होने पर इस इलाके का आसमान बेहद पारदर्शी हो जाता है, जिससे खगोल विज्ञान समझने वालों के लिए यह जगह बेहद मुफीद बन जाती है। यह संस्थान हर दिन आम पर्यटकों के लिए नहीं खुलता, फिर भी कुछ खास मौकों और सार्वजनिक आयोजनों में लोग यहां पहुंचकर खगोल विज्ञान की बारीकियां समझ सकते हैं और रात के आसमान का लुत्फ भी उठा सकते हैं।

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देवस्थल में लगा है 3.6 मीटर का विशाल टेलीस्कोप

नैनीताल जिले का देवस्थल इलाका भारत के अहम खगोलीय शोध ठिकानों में शुमार होता है। यहीं पर ARIES का 3.6 मीटर का बड़ा ऑप्टिकल टेलीस्कोप लगाया गया है। जब मौसम साफ रहता है तो यह जगह तारों, ग्रहों और दूर की आकाशगंगाओं को परखने के लिए बेहतरीन ठिकाना बन जाती है। रोशनी का प्रदूषण कम होने से यहां रात का आसमान बेहद निखरा हुआ दिखाई देता है। भले ही यह रिसर्च सेंटर हमेशा आम लोगों के लिए खुला नहीं रहता, लेकिन इसके आसपास का पूरा इलाका स्टार गेजिंग के शौकीनों को शानदार अनुभव देता है।

मुक्तेश्वर की ऊंचाई से दिखते हैं हजारों तारे

समुद्र तल से लगभग 2,300 मीटर ऊपर बसा मुक्तेश्वर अपनी खूबसूरती और सुकून भरे माहौल के लिए जाना जाता है। यहां शहरों जैसी चकाचौंध न होने की वजह से रात में हजारों तारे बिना किसी रुकावट के नजर आते हैं। ठंड के मौसम में और मानसून खत्म होने के बाद का समय यहां तारे देखने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। कई सैलानी अपने साथ टेलीस्कोप लेकर आते हैं ताकि मिल्की वे का शानदार नजारा देख सकें। जो लोग फोटोग्राफी के शौकीन हैं, उनके लिए भी मुक्तेश्वर किसी खजाने से कम नहीं है।

खुशी राम टॉप पर हिमालय और तारों का संगम

मुक्तेश्वर के करीब मौजूद खुशी राम टॉप एडवेंचर पसंद करने वालों के साथ-साथ एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखने वालों की भी पसंदीदा जगह है। यहां से एक तरफ हिमालय की बर्फीली चोटियां दिखती हैं तो दूसरी तरफ रात का बेदाग आसमान भी मन मोह लेता है। रोशनी की कमी की वजह से यहां से ग्रह, नक्षत्र और अलग-अलग तारामंडल आसानी से पहचाने जा सकते हैं। ट्रैकिंग करके यहां पहुंचने के बाद रात गुजारना एक यादगार अनुभव बन जाता है, और फोटोग्राफर भी आकाशगंगा की तस्वीरें खींचने के लिए यहां का रुख करते हैं।

पंगोट: परिंदों की जगह अब सितारों का भी अड्डा

नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर बसा पंगोट वैसे तो पक्षियों को देखने के शौकीनों के बीच मशहूर है, मगर रात होते ही यह इलाका एस्ट्रोनॉमी प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं लगता। घने जंगलों के बीच बसे इस क्षेत्र में रोशनी का प्रदूषण न के बराबर है। यहां से मिल्की वे, टूटते तारे और कई ग्रह बड़ी आसानी से देखे जा सकते हैं। जो पर्यटक यहां कैंपिंग करते हैं, वे पूरी रात खुले आसमान के नीचे तारों को निहारते हुए बिताते हैं।

रामगढ़ के बागानों के ऊपर चमकता आसमान

अपनी शांत पहाड़ियों और फलों के बागानों के लिए मशहूर रामगढ़ में रात के वक्त आसमान इतना साफ हो जाता है कि एक साथ हजारों तारे नजर आने लगते हैं। शहरी रोशनी से दूर होने के चलते यह जगह भी स्टार गेजिंग के लिहाज से बेहतरीन मानी जाती है। यहां मौजूद कई होमस्टे और रिसॉर्ट पर्यटकों को खुले आसमान के नीचे रात बिताने का मौका देते हैं। मौसम साफ रहने पर यहां से मिल्की वे का अद्भुत नजारा भी दिखाई पड़ता है।

ताकुला में तैयार हो रहा है एस्ट्रो विलेज

नैनीताल जिले का ताकुला इलाका अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यहां सैलानियों की भीड़ कम रहती है, इसी वजह से रात के वक्त आसमान का नजारा और भी निखरकर सामने आता है। एस्ट्रोनॉमी में रुचि रखने वाले लोग यहां दूरबीन के सहारे ग्रहों और नक्षत्रों को करीब से देखते हैं। सर्दियों में यहां का साफ आसमान खगोलीय घटनाओं को देखने के लिए खासतौर पर बेहतरीन माना जाता है। पर्यटन विभाग ने इस जगह पर एक एस्ट्रो विलेज भी तैयार किया है, जहां जल्द ही एस्ट्रोनॉमी से जुड़ी गतिविधियां शुरू की जाएंगी। यहां से आसमान के नजारे देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं।

नैना पीक से रात में दिखता है तारों का समंदर

नैनीताल की सबसे ऊंची चोटी नैना पीक दिन के वक्त हिमालय के मनोरम नजारों के लिए जानी जाती है, तो रात होते ही यहां का आसमान तारों से जगमगा उठता है। ट्रैकिंग करके ऊपर पहुंचने के बाद रात का नजारा देखने वालों को बेहद लुभाता है। साफ मौसम में यहां से मिल्की वे के साथ-साथ कई नक्षत्र भी बखूबी दिखाई देते हैं। शांत माहौल की वजह से यहां स्टार गेजिंग का अनुभव और भी यादगार बन जाता है। एडवेंचर और एस्ट्रोनॉमी का यह मेल नैना पीक को बाकी जगहों से अलग बनाता है।

कैंपिंग साइट्स पर बोनफायर के साथ तारों की महफिल

नैनीताल जिले में कई ऐसी कैंपिंग साइट्स भी हैं, जहां खुले आसमान के नीचे रातभर तारे देखने का अनोखा मौका मिलता है। पंगोट, रामगढ़ और मुक्तेश्वर के इर्द-गिर्द ऐसे कई कैंप मौजूद हैं। यहां बोनफायर के साथ बैठकर तारों भरे आसमान का लुत्फ उठाया जा सकता है। मौसम साफ होने पर मिल्की वे और कई ग्रह आसानी से नजर आ जाते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ बिताया गया यह पल यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना देता है।

सवाल-जवाब

ARIES क्या है और यह कहां स्थित है?
ARIES यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान नैनीताल के मनोरा पीक पर स्थित देश का प्रमुख खगोलीय और वायुमंडलीय शोध संस्थान है।
देवस्थल में कौन सा टेलीस्कोप लगा है?
देवस्थल में ARIES का 3.6 मीटर का बड़ा ऑप्टिकल टेलीस्कोप लगाया गया है।
नैनीताल से पंगोट कितनी दूर है?
पंगोट नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर है और रात में एस्ट्रोनॉमी प्रेमियों के लिए खास ठिकाना बन जाता है।
मुक्तेश्वर की ऊंचाई कितनी है?
मुक्तेश्वर समुद्र तल से करीब 2,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
क्या ARIES संस्थान आम पर्यटकों के लिए हमेशा खुला रहता है?
नहीं, यह हर दिन आम पर्यटकों के लिए नहीं खुलता, लेकिन विशेष अवसरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोग यहां जा सकते हैं।
ताकुला में एस्ट्रो विलेज की क्या स्थिति है?
पर्यटन विभाग ने ताकुला में एस्ट्रो विलेज बना दिया है और वहां जल्द ही एस्ट्रोनॉमी से जुड़ी गतिविधियां शुरू की जाएंगी।
स्टार गेजिंग के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
सर्दियों का मौसम और मानसून के बाद का समय स्टार गेजिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
कैंपिंग के लिए नैनीताल में कौन-कौन सी जगहें अच्छी हैं?
पंगोट, रामगढ़ और मुक्तेश्वर के आसपास कई कैंपिंग साइट्स हैं जहां रातभर तारे देखने का मौका मिलता है।
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