शहरी आपाधापी और आधुनिक जीवनशैली के बीच अक्सर लोगों के संबंधों में एक अजीब सा खोखलापन देखने को मिलता है। जब व्यक्ति किसी से मिलता है, तो चेहरे पर औपचारिकता की परत होती है, लेकिन दिल से कोई किसी का सगा नहीं दिखता। हर तरफ एक दूसरे से आगे निकलने, चालें चलने और मात देने की होड़ मची हुई है। ऐसी गलाकाट प्रतियोगिता के बीच किसी के अंतर्मन में सच्ची जगह बनाना सचमुच बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है। इसके बावजूद समाज में कुछ ऐसे विरले और चुनिंदा लोग जरूर दिख जाते हैं, जिनकी शख्सियत में गजब का आकर्षण और सम्मोहन होता है। उनसे मिलते ही हर कोई उनकी तरफ खिंचा चला जाता है। उनके भीतर का यह खिंचाव किसी जादू की वजह से नहीं, बल्कि उनके द्वारा अपनाए गए चुनिंदा जीवन मूल्यों के कारण होता है। अगर कोई भी इंसान इन खास तौर-तरीकों को अपनी दिनचर्या में ढाल ले, तो वह भी हर किसी का चहेता बन सकता है।
व्यवहार में पूरी पारदर्शिता और बराबरी का भाव
किसी भी व्यक्ति के दिल में स्थायी स्थान अचानक या रातों-रात नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए इंसान को उम्र भर एक जैसा साफ-सुथरा आचरण बनाए रखना होता है। जब कोई अपने नजरिए को सकारात्मक बनाता है, तो उसकी नजर में सभी इंसान एक बराबर नजर आने लगते हैं। इस सोच के विकसित होते ही किसी के भी प्रति दुर्भावना या बुरा सोचने का सिलसिला हमेशा के लिए थम जाता है। इसी वजह से जब भी किसी से संवाद हो, तो उसमें पूरी पारदर्शिता नजर आनी चाहिए। सामने वाले को यह साफ महसूस होना चाहिए कि आपके मन में कोई छल या कपट नहीं है। हर एक के साथ न्यायसंगत तरीके से पेश आना और किसी भी स्तर पर पक्षपात न करना ही एक पारदर्शी इंसान की सबसे बड़ी पहचान होती है।
पीठ पीछे निंदा और चुगली से पूरी दूरी
दूसरों के बीच अपनी विश्वसनीयता कायम करने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी की बुराई करने से पूरी तरह बचा जाए। कई लोगों की आदत होती है कि वे किसी व्यक्ति के सामने तीसरे की बुराई करते हैं और उसी तीसरे के सामने जाकर उसकी तारीफ के पुल बांधने लगते हैं। यह दोहरा रवैया रिश्तों को पूरी तरह खोखला कर देता है। हर परिस्थिति और माहौल में एक जैसा सात्विक व्यवहार बनाए रखना आवश्यक है। किसी की गलती सामने आने पर यह समझें कि यह उसकी समझ की कमी या अज्ञानता हो सकती है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी गंभीर अपराध या हत्या करने वाले को संत का दर्जा दे दिया जाए, बल्कि जो चीज गलत है उसे निष्पक्ष रूप से गलत समझा जाए। बस आपसी बातचीत में चुगली करने और दूसरों की बदनामी फैलाने की आदत से खुद को दूर रखना होता है।
वाणी की मर्यादा और शब्दों में मिठास
इंसान की जुबान ही उसे समाज में सर्वोच्च मान-सम्मान दिलाती है और वही जुबान उसे भारी अपमान और जिल्लत के गड्ढे में भी गिरा सकती है। किसी से भी मिलते या बात करते वक्त अपनी वाणी को बेहद संयमित, सौम्य और मधुर रखना चाहिए। अनावश्यक बोलने से बेहतर है कि कम बोला जाए, मगर जो भी शब्द मुंह से निकलें, वे इतने मीठे और गरिमापूर्ण हों कि किसी के दिल को ठेस न पहुंचे। भाषा की सीमा और मर्यादा का कभी उल्लंघन न करना ही एक शिष्ट व्यक्तित्व की बुनियाद है। जब कोई मधुरता के साथ संवाद करता है, तो सामने वाला अपने आप ही उसके प्रति आदर का भाव रखने लगता है।
गंभीरता से सुनने की कला और धैर्य
आज के दौर में बोलने की होड़ मची है, लेकिन दूसरों को धैर्यपूर्वक सुनने वालों का भारी अभाव है। यदि कोई एक अच्छा श्रोता बन जाता है, तो वह जीवन की बारीकियों और दूसरे की भावनाओं को गहराई से समझ पाता है। बातचीत के दौरान सामने वाले की पूरी बात ध्यान से सुननी चाहिए और उसके मर्म को समझना चाहिए। जब अपनी बात कहने की असली जरूरत महसूस हो, तभी मुंह खोलना चाहिए। सुनने में धैर्य और संयम बरतने से इंसान के विचार परिपक्व होते हैं और जब वह बोलता है, तो उसके शब्दों का वजन कई गुना बढ़ जाता है। लोग ऐसे धीर-गंभीर व्यक्ति का दिल से सम्मान करते हैं।
सच्ची मुस्कान और मर्यादित नजरों का संपर्क
मुलाकात के समय चेहरे पर एक सहज, सौम्य और सच्ची मुस्कान बनाए रखना रिश्तों में गर्मजोशी भरने का काम करता है। जब किसी से बातचीत चल रही हो, तो उसकी आंखों में हल्का और स्वाभाविक संपर्क बनाए रखना चाहिए। इसका कतई यह अर्थ नहीं है कि सामने वाले की ओर बिना पलक झपकाए लगातार घूरते रहा जाए। असल मकसद यह जताना होता है कि आप उसकी बातों को पूरी तवज्जो दे रहे हैं और उसे नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। चेहरे की कुदरती चमक और मुस्कुराहट सामने वाले की झिझक मिटा देती है और वह खुद को सहज पाकर गहरे आत्मीय जुड़ाव का अहसास करने लगता है।
अहंकार का त्याग और भूल को सहर्ष स्वीकारना
अहंकार एक ऐसी खतरनाक बुराई है जिसने बड़े-बड़े नामी चेहरों और मशहूर हस्तियों को भी फर्श पर ला पटका है। इसलिए मन से घमंड और श्रेष्ठता के भाव को पूरी तरह निकाल देना चाहिए। खुद को दूसरों से श्रेष्ठ या ऊंचा साबित करने की बचकानी कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, यदि जीवन में कभी कोई गलती या चूक हो जाए, तो बिना किसी संकोच, झिझक या बहानेबाजी के उसे तुरंत स्वीकार कर लेना चाहिए और उसमें सुधार करना चाहिए। यह सादगी और सत्यवादिता ही लोगों के भीतर आपके लिए अटूट विश्वास और आदर की भावना पैदा करती है।
बिना किसी स्वार्थ के संकट में ढाल बनना
बिना किसी निजी लालच या अपेक्षा के दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना सबसे बड़ा मानवीय गुण है। आसपास जब भी कोई परेशानी में हो, तो उसकी ढाल बनकर खड़ा होना या उसे सही राह दिखाना सच्ची इंसानियत है। हालांकि, यहां इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि किसी को भी बिन मांगी सलाह नहीं देनी चाहिए। जब कोई इंसान बिना किसी फायदे की उम्मीद किए किसी के आंसू पोंछता है या सहायता करता है, तो यह अहसास सीधे अंतर्मन को छूता है। यह निस्वार्थ सेवा भाव ही वह ताकत है जो किसी घोर नफरत करने वाले के दिल में भी प्यार का बीज बो सकती है।
असरदार व्यवहार ही छोड़ता है अमिट छाप
असल जिंदगी में लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि आपने उनसे क्या कहा था या आपने कौन सा काम किया था, लेकिन वे इस बात को ताउम्र याद रखते हैं कि आपके साथ रहकर उन्हें कैसा महसूस हुआ था। आपका आचरण, ईमानदारी और दूसरों के प्रति नेकदिल भावना ही आपकी असली पूंजी होती है। जब इन बातों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया जाता है, तो कटु से कटु आलोचक भी नतमस्तक होकर आत्मीयता से पेश आने लगते हैं। जब हर किसी के कदम डगमगाने लगें, तो इंसान को इसी अडिग और उच्च मानवीय रास्ते पर चलकर अपनी नई राह बनानी चाहिए।



















