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फराह खान को पसंद आई सौरभ जोशी के घर की पहाड़ी थाली, जानें आलू के गुटके और भांग की चटनी बनाने का तरीकाट्रेंड्स
18 अक्तू॰ 2026, 3:45 am (13 मिनट पहले)· 0

फराह खान को पसंद आई सौरभ जोशी के घर की पहाड़ी थाली, जानें आलू के गुटके और भांग की चटनी बनाने का तरीका

यूट्यूबर सौरभ जोशी के घर पहुंचीं फराह खान को परोसी गई पारंपरिक पहाड़ी थाली, जिसमें आलू के गुटके, भांग की चटनी और खीरे का रायता शामिल रहा।

उत्तराखंड का पारंपरिक खानपान अपने सादे मसालों और अनोखे स्वाद के लिए विशेष पहचान रखता है। हाल ही में फिल्ममेकर फराह खान अपने सहयोगी रसोइए दिलीप के साथ यूट्यूबर सौरभ जोशी के घर पहुंचीं, जहां उनका स्वागत पारंपरिक पहाड़ी भोजन के साथ किया गया। इस मुलाकात के दौरान सौरभ के परिवार ने मेहमानों के लिए खास क्षेत्रीय थाली तैयार की। इस थाली में उत्तराखंड के लोकप्रिय आलू के गुटके, भांग के खाद्य बीजों की तीखी चटनी और ठंडा खीरे का रायता शामिल था। इन व्यंजनों का अनोखा स्वाद सामान्य आलू की सब्जी या रोजमर्रा की चटनी से एकदम जुदा होता है। अगर आप भी पहाड़ी ढाबों और घरों के इस पारंपरिक जायके को अपनी रसोई में चखना चाहते हैं, तो इन सभी व्यंजनों को बहुत ही आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है।

लोहे की कड़ाही में ऐसे तैयार करें आलू के गुटके

पहाड़ों में आलू के गुटके एक बेहद लोकप्रिय नाश्ता और मुख्य भोजन का हिस्सा माने जाते हैं। इस व्यंजन का असली स्वाद सरसों के तेल और लोहे की कड़ाही में पकाने से निखरता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले उबले हुए आलू तैयार रखें। एक पारंपरिक लोहे की कड़ाही लें और उसमें पर्याप्त मात्रा में शुद्ध सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल से हल्का धुआं निकलने लगे, तब आंच धीमी करके उसमें साबुत जीरा और थोड़ा सा मेथी दाना डालें। मेथी दानों का तड़का आलू को एक विशिष्ट पहाड़ी खुशबू और स्वाद प्रदान करता है।

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इसके बाद कड़ाही में स्वादानुसार नमक, धनिया पाउडर, तीखी लाल मिर्च पाउडर और हल्दी पाउडर डालें। मसालों को धीमी आंच पर कुछ सेकंड भूनें ताकि उनका कच्चापन दूर हो जाए, लेकिन ध्यान रहे कि सूखे मसाले जलने न पाएं। अब पहले से उबालकर चौकोर टुकड़ों में काटे गए आलू कड़ाही में डाल दें। कड़छी की मदद से आलू को मसालों के साथ अच्छी तरह चलाएं, ताकि मसाले की एक समान परत हर टुकड़े पर लिपट जाए। इसके ऊपर से बारीक कटी हरी मिर्च डालें। अंत में कसूरी मेथी और बारीक कटा हरा धनिया डालकर धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक सिकने दें। आपके गरमागरम आलू के गुटके तैयार हैं, जिन्हें रोटी, पूरी, दाल-चावल या सादी चाय के साथ परोसा जा सकता है।

भांग के खाद्य बीजों से बनाएं पारंपरिक चटनी

उत्तराखंड की थाली भांग के बीजों से बनने वाली चटनी के बिना अधूरी मानी जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस चटनी में केवल खाद्य श्रेणी के बीजों का ही उपयोग किया जाता है, जिनमें कोई नशा नहीं होता बल्कि यह पौष्टिकता और सौंधी महक से भरपूर होते हैं। इस चटनी को तैयार करने के लिए भांग के कच्चे बीजों को एक तवे पर धीमी आंच पर हल्का सा सूखा भून लें। जब बीजों से चटकने की आवाज आने लगे और भीनी खुशबू उठे, तब गैस बंद कर दें।

अब इन भुने हुए बीजों को मिक्सर के जार या पारंपरिक सिलबट्टे पर डालें। इसमें ताजा हरा धनिया, लहसुन की कुछ कलियां, साबुत जीरा और स्वादानुसार सादा नमक मिलाएं। मिश्रण को पीसने के लिए आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी डालें। इसे पीसते समय ध्यान रखें कि चटनी एकदम पतली न हो। पारंपरिक स्वाद के लिए इसे थोड़ा गाढ़ा और दरदरा रखना बेहतर माना जाता है। पिसने के बाद चटनी को एक कटोरी में निकालें और ऊपर से ताजा नींबू का रस निचोड़कर अच्छी तरह मिला लें। नींबू की खटास और भुने बीजों का सौंधापन मिलकर इस चटनी को लाजवाब बना देते हैं।

खीरे के रायते के साथ पूरी होगी थाली

आलू के तीखे गुटकों और चटपटी चटनी के साथ संतुलन बनाने के लिए पहाड़ी थाली में खीरे का रायता जरूर शामिल किया जाता है। यह रायता न केवल पेट को ठंडक देता है बल्कि भोजन के संपूर्ण स्वाद को भी बढ़ा देता है। इसे तैयार करने के लिए एक बर्तन में ताजा गाढ़ा दही लें और उसे अच्छी तरह फेंट लें। अब एक खीरे को धोकर कद्दूकस करें और उसका अतिरिक्त पानी निचोड़े बिना सीधे फेंटे हुए दही में मिला दें।

इसके बाद दही में भुना हुआ जीरा पाउडर, खास रायता मसाला और स्वादानुसार नमक डालें। सभी सामग्रियों को अच्छी तरह चम्मच से मिलाएं ताकि मसाले दही में एकसार हो जाएं। अंत में बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया ऊपर से छिड़कें। इस रायते को थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रखकर ठंडा करें और फिर आलू के गुटके तथा भांग की चटनी के साथ परोसें। यह संपूर्ण थाली आपको घर बैठे उत्तराखंड की वादियों के अनूठे खानपान का अहसास कराएगी।

सवाल-जवाब

आलू के गुटके बनाने के लिए किस तेल का उपयोग करना चाहिए?
पारंपरिक स्वाद और खुशबू के लिए इसे सरसों के तेल में और लोहे की कड़ाही में बनाना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
क्या भांग की चटनी में नशा होता है?
नहीं, चटनी बनाने में केवल खाद्य श्रेणी के बीजों का इस्तेमाल होता है, जो पूरी तरह सुरक्षित होते हैं और इनमें कोई नशा नहीं होता।
भांग के बीजों को पीसने से पहले भूनना क्यों जरूरी है?
हल्का भूनने से बीजों की कच्ची गंध दूर हो जाती है और चटनी में एक बेहतरीन सौंधी खुशबू आती है।
खीरे के रायते में कौन से मुख्य मसाले डाले जाते हैं?
रायते में मुख्य रूप से भुना जीरा पाउडर, रायता मसाला और सादा नमक दही व कद्दूकस खीरे के साथ मिलाया जाता है।
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