भाद्रपद माह के दौरान गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर बप्पा को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न अर्पित करने का विधान है। अधिकांश घरों में भगवान गणेश के सबसे प्रिय व्यंजन मोदक को अत्यंत श्रद्धा के साथ बनाया जाता है। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में मिलावट का अंदेशा बना रहता है, जिसके चलते लोग अब रसोई में ही शुद्ध सामग्री से भोग तैयार करना अधिक पसंद करते हैं। नारियल और मावे के समन्वय से बनने वाले यह मोदक न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि इन्हें तैयार करने में अधिक मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती।
रसोई के सामान्य सामान से तैयार होगी सामग्री
इस पारंपरिक मिष्ठान्न को तैयार करने के लिए बहुत जटिल तैयारी की दरकार नहीं होती। मुख्य सामग्री के रूप में 1 कप नारियल पाउडर, 1 कप मिल्क पाउडर और लगभग 1 कप पिसी हुई चीनी की आवश्यकता होती है। सुगंध तथा जायके को समृद्ध करने के लिए थोड़ी सी इलायची, केसर की कुछ पंखुड़ियां और आवश्यकता अनुसार सादा दूध अलग रख लें। यदि आप अधिक मखमली टेक्सचर चाहते हैं, तो मावे का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही भीतर भरने के लिए काजू, बादाम या पिस्ते जैसे मेवों को भी शामिल किया जा सकता है। जिन रसोईघरों में उस वक्त मावा उपलब्ध न हो, वहां केवल दूध की सीमित मात्रा की सहायता से भी सारा मिश्रण गूंथा जा सकता है।
मिश्रण और केसरिया दूध तैयार करने का तरीका
तैयारी की शुरुआत करने के लिए एक खुले और गहरे बर्तन में नारियल पाउडर के साथ मिल्क पाउडर को पलट लें। चीनी के साथ इलायची के दानों को मिक्सी में डालकर एकदम महीन पीस लें, फिर इस चूर्ण को दोनों सूखे पाउडरों में मिला दें। सूखे तत्वों को चम्मच से अच्छी तरह चलाएं ताकि मिठास और इलायची की महक पूरे मिश्रण में एकसमान रूप से समा जाए। दूसरी तरफ एक कटोरी में थोड़ा सा गुनगुना दूध लेकर उसमें केसर के रेशे भिगोकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। जब केसर अपना गहरा रंग और सुगंध छोड़ दे, तब इस रंगीन दूध को बूंद-बूंद करके सूखे पाउडर के कटोरे में डालना शुरू करें।
नरम डो और ड्राई फ्रूट्स की स्टफिंग
मिश्रण में दूध मिलाते समय अत्यधिक सावधानी बरतना जरूरी है। एक साथ अधिक दूध डालने पर सामग्री गीली होकर बह सकती है, जिससे मोदक बनाना असंभव हो जाएगा। हाथों अथवा चम्मच की मदद से धीरे-धीरे मिलाते हुए इसे एक चिकने और मुलायम आटे जैसा रूप दें। यदि मावे का प्रयोग किया जा रहा है, तो ठीक इसी चरण पर मावे को भी डालकर अच्छी तरह मसलते हुए गूंथ लें। इसके पश्चात अपनी पसंद के मेवों जैसे बादाम, काजू और पिस्ते को चाकू से बारीक टुकड़ों में काट लें। इन कटे हुए मेवों को जब मिठाई के बीच में भरा जाता है, तो हर बाइट में एक बढ़िया कुरकुरापन महसूस होता है।
सांचे और बिना सांचे के मनचाहा आकार देने की विधि
यदि आपके पास मिठाई का सांचा मौजूद है, तो उसकी भीतरी सतह पर हल्का सा घी लगाकर चिकना कर लें। सांचे के दोनों हिस्सों में थोड़ा-थोड़ा तैयार मिश्रण भरें और केंद्र में उंगली से दबाव बनाकर बारीक कटे मेवे भर दें। ऊपर से थोड़ा और मिश्रण रखकर सांचे को दबाएं और फिर खोल लें। सांचा न होने की दशा में हाथों की हथेलियों पर मिश्रण का एक छोटा गोला लेकर उसे चपटा कर लें। बीच में थोड़े से मेवे रखकर किनारों को ऊपर की ओर समेटते हुए बंद करें और शिखर को मोदक की भांति नुकीला बना लें। इसके बाद घरेलू कांटे वाले चम्मच से बाहरी सतह पर हल्की-हल्की लकीरें उकेर दें, जिससे यह हूबहू बाजार जैसे सांचे से बना हुआ दिखाई देगा।
भोग लगाने से पूर्व सेट करने का नियम
सारे मोदक एक-एक करके बना लेने के पश्चात उन्हें खुली हवा में किसी थाली में कुछ समय के लिए रख देना चाहिए। थोड़ी देर विश्राम देने से उनका आकार पूरी तरह स्थिर हो जाता है और वे परोसते समय टूटते नहीं हैं। जब मिठाई पूरी तरह बंध जाए, तब इसे पूजा की थाली में सजाकर भगवान लंबोदर को अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के बाद इस पवित्र प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों और पड़ोसियों के बीच वितरित करें।





















