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घर पर कटिंग से पान की बेल उगाने का तरीका: जानें मिट्टी, पानी और कटाई की पूरी प्रक्रियाट्रेंड्स
6 सित॰ 2026, 2:28 pm (12 दिन पहले)· 3

घर पर कटिंग से पान की बेल उगाने का तरीका: जानें मिट्टी, पानी और कटाई की पूरी प्रक्रिया

अगर आप घर की बालकनी या छत पर ताजे पान के पत्ते उगाना चाहते हैं, तो बीज के बिना एक छोटी टहनी से आसानी से बेल तैयार की जा सकती है।

पूजा-पाठ के लिए ताजे पान के पत्ते चाहिए हों या घर के बगीचे में एक खूबसूरत हरी-भरी बेल उगानी हो, कटिंग के जरिए पान का पौधा तैयार करना बेहद आसान और किफायती तरीका है। इसके लिए बाजार से महंगे पौधे या बीज खरीदने की कोई जरूरत नहीं होती। अगर आपके पास बालकनी, छत या खिड़की के पास ऐसी जगह है जहां हल्की और छनकर धूप आती है, तो आप एक छोटी सी टहनी से ही बेल तैयार कर सकते हैं। सही देखरेख, संतुलित नमी और उचित सहारे के साथ पान की बेल बहुत तेजी से फैलती है।

पान की कटिंग चुनने और तैयार करने की सही तकनीक

पौधा उगाने की शुरुआत एक स्वस्थ और रोगमुक्त कटिंग से होती है। किसी पहले से लगे पान के पौधे से 4 से 6 इंच लंबी टहनी चुनें। ध्यान रखें कि टहनी पर सड़न या किसी बीमारी के लक्षण न हों। कटिंग लेते समय पत्ती के जोड़ यानी नोड वाले हिस्से के ठीक नीचे से हल्का तिरछा कट लगाएं। निचले हिस्से की पत्तियों को हटा दें और ऊपर केवल 2 पत्तियां ही लगी रहने दें। नोड वाला भाग ही बाद में नई जड़ें निकालने में सबसे मददगार साबित होता है।

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पानी में जड़ें विकसित करने का सरल तरीका

कटिंग को सीधे मिट्टी में रोपने के बजाय पहले पानी में रखकर जड़ें निकालना ज्यादा सुरक्षित और आसान रहता है। इसके लिए एक साफ कांच के गिलास या छोटे बर्तन में पानी भरें और कटिंग के निचले हिस्से को उसमें डुबोकर रखें। इस बर्तन को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी आती हो, लेकिन दोपहर की सीधी और तेज धूप न पड़े। गिलास का पानी हर 2 से 3 दिन में बदलना न भूलें ताकि पानी में ताजगी और ऑक्सीजन बनी रहे। कुछ दिनों बाद नोड के पास से छोटी-छोटी जड़ें निकलती दिखाई देने लगेंगी। जब ये जड़ें पर्याप्त रूप से बढ़ जाएं, तब कटिंग गमले में लगाने के लिए तैयार हो जाती है।

मिट्टी का सही मिश्रण और गमले का चुनाव

पान की बेल को ऐसी मिट्टी की जरूरत होती है जो नमी को रोककर रखे, लेकिन जिसमें पानी ठहरे नहीं। इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में कोकोपीट और अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद मिलाएं। अगर मिट्टी बहुत भारी या चिकनी है, तो जल निकासी बेहतर बनाने के लिए उसमें थोड़ी मोटी रेत या बजरी मिलाई जा सकती है। गमले का चुनाव करते समय यह सुनिश्चित करें कि उसके निचले हिस्से में ड्रेनेज होल यानी पानी निकलने का छेद जरूर हो। गमले में पानी जमा रहने से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं।

बेल को सहारा देना और लगाने का तरीका

गमले में जड़ वाली कटिंग लगाने के तुरंत बाद पौधे को बढ़ने के लिए सहारे की आवश्यकता होती है। पान एक चढ़ने वाली बेल है, इसलिए गमले के अंदर एक लकड़ी की डंडी, छोटी ट्रेलिस या मॉस पोल गाड़ दें। जैसे-जैसे कटिंग बड़ी होगी और नई शाखाएं निकलेंगी, उन्हें हल्के हाथों से सहारे की तरफ मोड़ें। मॉस पोल का इस्तेमाल करने से बेल को जरूरी नमी भी मिलती रहती है, जिससे उसकी वृद्धि तेज होती है।

धूप और जगह का सही संतुलन

पान की मुलायम और नाजुक पत्तियां सीधी तेज धूप में झुलसकर काली पड़ सकती हैं। इसलिए पौधे को ऐसी जगह रखें जहां दिनभर अच्छी रोशनी मिले, लेकिन दोपहर की कड़क धूप से बचाव हो। सुबह की हल्की और गुनगुनी धूप पौधे के लिए फायदेमंद होती है। घर की बालकनी या कमरे की ऐसी खिड़की के पास वाली जगह इसके लिए सबसे उत्तम मानी जाती है जहां रोशनी प्रचुर मात्रा में हो और तापमान बहुत अधिक न हो।

सिंचाई की सही मात्रा और नमी का ध्यान

पान की मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन वह दलदली नहीं होनी चाहिए। जब भी गमले की ऊपरी मिट्टी थोड़ी सूखी महसूस हो, तभी पानी दें। पानी देने के बाद गमले की निचली ट्रे में इकट्ठा हुए अतिरिक्त पानी को तुरंत निकाल दें ताकि जड़ें सुरक्षित रहें। बारिश के मौसम में विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि हवा में पहले से नमी होती है और ऐसे समय में रोज पानी देने से पौधा खराब हो सकता है।

खाद और सही पोषण

बेल की अच्छी वृद्धि और चमकदार हरी पत्तियों के लिए नियमित पोषण बेहद जरूरी है। हर कुछ हफ्तों के अंतराल पर पौधे को हल्की जैविक खाद या पौधों के लिए उपयुक्त लिक्विड फर्टिलाइजर दें। खाद हमेशा पौधे की आवश्यकता और पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही दें। अधिक खाद देने से पत्तियां जल सकती हैं।

कीट प्रबंधन और पौधे की सुरक्षा

पान के पौधे में कभी-कभी कीटों का हमला या पत्तियों के सड़ने की समस्या हो सकती है। सप्ताह में एक या दो बार पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह की अच्छी तरह जांच करें। यदि पत्तियों पर कोई असामान्य दाग, जाला या छोटे कीड़े दिखें, तो प्रभावित पत्ती को तुरंत काटकर अलग कर दें। कीट नियंत्रण के लिए जैविक या पौधों के अनुकूल हल्के कीटनाशक साबुन के घोल का छिड़काव किया जा सकता है।

पत्तियों की कटाई और पौधे का रखरखाव

पौधे की वृद्धि का समय मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता और रखरखाव पर निर्भर करता है। सही देखरेख मिलने पर कुछ महीनों में ही बेल पर इस्तेमाल योग्य बड़ी पत्तियां आने लगती हैं। पत्तियां तोड़ते समय इस बात का ध्यान रखें कि एक साथ बहुत सारी पत्तियां न तोड़ें। समय-समय पर आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी पत्तियां तोड़ने से पौधे में नई शाखाएं निकलती रहती हैं और बेल लंबे समय तक घनी और हरी-भरी बनी रहती है।

सवाल-जवाब

पान की कटिंग के लिए कितनी लंबी टहनी सही रहती है?
पान का नया पौधा लगाने के लिए 4 से 6 इंच लंबी स्वस्थ टहनी सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
क्या पान की कटिंग को सीधे मिट्टी में लगा सकते हैं?
सीधे मिट्टी में लगाने के बजाय कटिंग को पहले गिलास के पानी में रखकर जड़ें निकालना ज्यादा सुरक्षित और आसान रहता है।
पानी में रखी कटिंग का पानी कितने दिन में बदलना चाहिए?
पानी में रखी कटिंग के गिलास का पानी हर 2 से 3 दिन में बदलना चाहिए ताकि उसमें ताजगी और ऑक्सीजन बनी रहे।
पान की बेल के लिए मिट्टी का मिश्रण कैसे बनाएं?
बगीचे की सामान्य मिट्टी में कोकोपीट, अच्छी जैविक खाद और जल निकासी बेहतर करने के लिए थोड़ी मोटी रेत मिलाएं।
पान के पौधे को कैसी धूप चाहिए?
पान के पौधे को तेज कड़क धूप से बचाएं और ऐसी जगह रखें जहां दिनभर छनकर रोशनी या हल्की सुबह की धूप मिले।
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