अक्सर रोजाना इस्तेमाल होने वाली पानी की बोतल को सामान्य साबुन से धोने के बाद भी उसमें अजीब सी गंध बनी रहती है. ऐसी स्थिति में तुरंत नई बोतल खरीदने की जरूरत नहीं होती. असल में यह बदबू बोतल के भीतर बची नमी, पानी के बारीक अवशेष या ढक्कन के अंदर लगी रबर सील में फंसी गंदगी के कारण पैदा होती है. विशेष रूप से जब बोतल का नियमित उपयोग किया जाता है और उसे लंबे वक्त तक ढक्कन लगाकर बंद रखा जाता है, तो यह परेशानी अधिक बढ़ जाती है. इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए घर की रसोई में मौजूद साधारण सामग्रियों का उपयोग करके बोतल की आंतरिक सफाई को काफी सुगम बनाया जा सकता है.
बोतल के भीतर गंध बनने के मुख्य कारण
जब किसी बोतल को केवल सामान्य पानी से खंगालकर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो उसकी अंदरूनी दीवारों पर नमी रह जाती है. जब यह बोतल लंबे समय तक बंद रहती है, तो यही फंसी हुई नमी और उसमें मौजूद सूक्ष्म अवशेष बदबू फैलाने लगते हैं. कई बार समस्या बोतल के मुख्य हिस्से के बजाय उसके ढक्कन और रबर सील के कोनों में छिपी रहती है. इसी वजह से बोतल बाहर से पूरी तरह चमकती हुई दिखने के बावजूद पानी पीते समय अप्रिय महक देती है. विशेष तौर पर प्लास्टिक से बनी बोतलों में यह परेशानी बहुत ज्यादा देखने को मिलती है.
नमक, सिरका और कच्चे चावल का देसी नुस्खा
इस घरेलू सफाई के लिए केवल एक चम्मच नमक, एक चम्मच सिरका, एक चम्मच कच्चा चावल और थोड़े से पानी की आवश्यकता होती है. सबसे पहले बोतल को पूरा खाली कर लें और उसमें नमक, सिरका और कच्चे चावल को एक साथ डाल दें. इसके बाद थोड़ा सा पानी मिलाएं, लेकिन ध्यान रखें कि बोतल को ऊपर तक पूरा नहीं भरना है. अब बोतल का ढक्कन अच्छी तरह कसकर बंद करें और कुछ देर तक इसे पूरी ताकत से हिलाएं.
इस प्रक्रिया में कच्चे चावल के दाने बोतल की अंदरूनी सतह पर प्राकृतिक स्क्रब का काम करते हैं, जिससे भीतरी दीवारों पर चिपकी गंदगी छूट जाती है. सिरका अपनी अम्लीय प्रकृति के कारण सफाई को गहरा बनाता है, जबकि नमक का खुरदरापन रगड़ पैदा कर मैल हटाने में सहायक सिद्ध होता है. बोतल को अच्छी तरह हिलाने के बाद मिश्रण को कुछ मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ देना चाहिए.
धोने की सही तकनीक और रबर सील की देखभाल
कुछ मिनट रुकने के बाद ढक्कन खोलकर अंदर मौजूद पूरे मिश्रण को बाहर निकाल दें और बोतल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. यदि बोतल में सिरके की हल्की महक बची रह जाए, तो उसे दो से तीन बार साफ पानी से खंगालना चाहिए. केवल बोतल की भीतरी सतह को धोना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसके ढक्कन, रबर सील और बारीक कोनों को भी अलग से साफ करना बेहद जरूरी है. ज्यादातर मामलों में पानी या गंदगी इन्हीं छिपे हुए हिस्सों में जमा रह जाती है, जो आगे चलकर सड़न और बदबू का रूप ले लेती है.
भविष्य में दुर्गंध से बचने के जरूरी नियम
पानी की बोतल को कई दिनों तक पानी भरकर लगातार बंद रखने की आदत से बचना चाहिए. दैनिक उपयोग के बाद बोतल को खाली करना, धोना और हवा में पूरी तरह सूखने देना जरूरी है. ढक्कन को भी बोतल से अलग करके सुखाना सबसे बेहतरीन उपाय माना जाता है.
हालांकि, यदि नियमित सफाई के बावजूद बदबू खत्म न हो रही हो, सतह पर फफूंदी के निशान दिखाई देने लगें या बोतल पुरानी होकर अंदर से खरोंचदार हो चुकी हो, तो केवल घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए. ऐसी स्थिति में बोतल को बदलकर नई बोतल इस्तेमाल करना ही सबसे सुरक्षित और सेहतमंद विकल्प है. पीने के पानी के बर्तनों में स्वच्छता के मामले में कोई भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.



















