हरियाणा के करनाल में आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले धार्मिक वक्ता अनिरुद्धाचार्य का एक नया वक्तव्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आयोजित एक जनसंवाद कार्यक्रम में जब एक युवती ने अपने अंतरजातीय विवाह और परिवार से बने तनावपूर्ण संबंधों पर मार्गदर्शन मांगा, तो कथा वाचक ने पूरे समाज को एक खास नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि युवाओं को सिर्फ भावनाओं में बहकर शादी नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रेम करने से पहले सामने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड, पारिवारिक संस्कार और पृष्ठभूमि अवश्य देख लेनी चाहिए। उनका यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कथा के दौरान युवती ने साझा की अपनी पारिवारिक समस्या
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब करनाल में श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए एक सवाल-जवाब सत्र का आयोजन किया गया था। इस सत्र में उपस्थित कोई भी व्यक्ति सीधे कथा वाचक से अपने मन का सवाल पूछ सकता था। इसी दौरान एक युवती ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसे एक दूसरी जाति के युवक से प्रेम हो गया था। युवती के अनुसार, उसने इस रिश्ते के बारे में अपनी मां को स्पष्ट रूप से जानकारी दी थी। उसने अपनी मां से यह भी कहा था कि यदि परिवार वाले उस युवक से मिलकर उसे नापसंद कर देंगे, तो वह शादी का विचार पूरी तरह से छोड़ देगी।
हालांकि, युवती का दावा है कि उसकी बात सुनने के बावजूद उसकी मां ने उसकी भावनाओं को समझने के बजाय उसे करीब एक महीने तक घर के भीतर बंद रखा। पारिवारिक बंदिशों और विरोध के बाद भी युवती ने अपने फैसले पर कायम रहते हुए परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर उस युवक से विवाह कर लिया। विवाह संपन्न होने के बाद से ही युवती का अपना परिवार उससे अत्यधिक नाराज चल रहा है। युवती ने कथा मंच से अनिरुद्धाचार्य से सवाल किया कि वह अपने पति और अपने मायके के बीच बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए क्या उपाय कर सकती है।
अनिरुद्धाचार्य की आधार कार्ड वाली विवादित सलाह
युवती की बात सुनने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने कानूनी और धार्मिक पहलुओं को स्वीकार करते हुए माना कि दो बालिग व्यक्ति अपनी पसंद से विवाह करने का पूर्ण अधिकार रखते हैं। उन्होंने कहा कि कानून और धर्म के दृष्टिकोण से युवती ने अपने जीवनसाथी का चयन करके कोई कानूनी अपराध या गलती नहीं की है। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने भावनाओं के आधार पर लिए जाने वाले फैसलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विवाह केवल शारीरिक आकर्षण या तात्कालिक भावनाओं पर आधारित नहीं होना चाहिए, क्योंकि शादी के बाद केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं बनता बल्कि आने वाली संतान और पूरी सृष्टि का भविष्य उससे जुड़ा होता है।
कथा वाचक ने अपने संबोधन में आगे कहा कि कई बार युवा जिसे निस्वार्थ प्रेम समझ बैठते हैं, वह असल में केवल शारीरिक आकर्षण या वासना होती है। उन्होंने कहा कि सुंदरता से होने वाला प्रेम अक्सर सतही होता है, इसलिए व्यक्ति को किसी से जुड़ने से पहले उसके परिवार, संस्कारों और भविष्य की संभावनाओं पर गहराई से विचार करना चाहिए। जब युवती ने यह तर्क दिया कि उसका प्रेम पूरी तरह से निस्वार्थ था, तो अनिरुद्धाचार्य ने उस पर पलटवार करते हुए पूछा कि क्या उसे उस मां का प्रेम निस्वार्थ नहीं लगा जिसने बचपन से उसका पालन-पोषण किया और उसके सपनों को पूरा करने योग्य बनाया। अंत में उन्होंने युवती को अपने वैवाहिक जीवन के दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने और अपनी मां से बातचीत का प्रयास जारी रखने की सलाह दी।
सोशल मीडिया पर छिड़ा संग्राम और मिलाजुला समर्थन
अनिरुद्धाचार्य का यह बयान सोशल मीडिया के अलग-अलग मंचों पर तेजी से प्रसारित हो गया, जिसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इंटरनेट पर सक्रिय युवाओं का एक बड़ा वर्ग, जो अनिरुद्धाचार्य को पूकी बाबा के नाम से भी संबोधित करता है और उनके मीम्स बनाता है, इस बयान पर बंट गया है। कई लोगों ने कथा वाचक के विचारों का समर्थन करते हुए लिखा कि शादी से पहले परिवार की पृष्ठभूमि और संस्कारों की जांच करना एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है। समर्थकों का तर्क है कि माता-पिता हमेशा अपनी बेटी के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की चिंता करते हैं, इसलिए बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला परिवार में दरार पैदा करता है।
दूसरी तरफ, आलोचकों ने इस बयान की सख्त शब्दों में निंदा की है। कई उपयोगकर्ताओं ने उन्हें पुरानी सोच वाला करार देते हुए कहा कि अंतरजातीय विवाह पर इस तरह की टिप्पणियां सामाजिक बदलाव और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक उपयोगकर्ता ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि कथा वाचक का यह रवैया राजनीतिक प्रभाव से प्रेरित दिखता है। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने उनके परामर्श देने के तरीके को गैर-गंभीर बताया। इसके बावजूद, एक बड़े तबके का मानना है कि कथा वाचक की बात में व्यावहारिक सच्चाई है, क्योंकि कोई भी परिवार अपनी संतान के बेहतर भविष्य के लिए संस्कारों और पारिवारिक पृष्ठभूमि को प्राथमिकता देता है।



















