गणेश चतुर्थी नजदीक आते ही घर-घर में गणपति बप्पा की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि किसी भी पूजा, शादी-ब्याह या नए काम से पहले सबसे पहले गणेश जी को ही क्यों याद किया जाता है, और आखिर उन्हें ‘विघ्नहर्ता’ की उपाधि कैसे मिली? इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो सदियों से लोगों की आस्था का हिस्सा बनी हुई है.
‘विघ्नहर्ता’ नाम का असली मतलब
संस्कृत में ‘विघ्न’ शब्द का मतलब होता है रुकावट या अड़चन, जबकि ‘हर्ता’ का मतलब है उसे हटाने वाला. इन दोनों शब्दों को जोड़ने पर बनता है ‘विघ्नहर्ता’, यानी बाधाओं को दूर करने वाला. मान्यता है कि गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और शुभता के देवता हैं, इसलिए उनकी आराधना करने से भक्तों को अपने रास्ते की रुकावटें पार करने की हिम्मत और सही सोच मिलती है.
कार्तिकेय के साथ हुई वह मशहूर होड़
पुराणों में एक कथा प्रचलित है कि भगवान शिव और माता पार्वती के दो पुत्र, गणेश और कार्तिकेय, के बीच एक बार यह विवाद खड़ा हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. इस उलझन को सुलझाने के लिए दोनों के सामने एक शर्त रखी गई, जो भी सबसे पहले पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर लौटेगा, उसे ही विजेता माना जाएगा. कार्तिकेय बिना देर किए अपने वाहन मोर पर सवार होकर पूरी पृथ्वी नापने निकल पड़े.
माता-पिता की परिक्रमा से मिली जीत
दूसरी तरफ गणेश जी ने अलग रास्ता चुना. उन्होंने दुनिया घूमने के बजाय अपने माता-पिता, यानी भगवान शिव और माता पार्वती, की तीन बार परिक्रमा कर ली. जब उनसे इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि जब माता-पिता के चरणों में ही पूरी दुनिया समाई है, तो अलग से धरती नापने की क्या जरूरत. गणेश जी की इस समझदारी और तर्क से प्रभावित होकर उन्हें ही विजेता घोषित कर दिया गया. इसी घटना के बाद से यह परंपरा बनी कि हर शुभ काम की शुरुआत में सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा की जाएगी.
शादी से लेकर व्यापार तक, हर जगह पहला निमंत्रण गणेश जी को क्यों
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गणेश जी बुद्धि और सही दिशा में सोचने की शक्ति देते हैं, और किसी भी नए काम में सही निर्णय लेने की क्षमता का होना बेहद जरूरी माना जाता है. यही वजह है कि शादी-विवाह, गृह-प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान, व्यापार की शुरुआत या किसी भी अन्य शुभ मौके पर सबसे पहले गणेश जी का आह्वान किया जाता है. भक्तों का मानना है कि उनकी पूजा से रास्ते की अड़चनें दूर होती हैं और सफलता का रास्ता आसान बनता है. इसी वजह से लोग उन्हें प्यार से ‘विघ्नहर्ता’ यानी बाधाएं हरने वाला और ‘मंगलमूर्ति’ यानी शुभता की मूरत कहकर पुकारते हैं.
गणेश जी के रूप में छिपे गहरे संकेत
गणेश जी की मूर्ति का हर हिस्सा एक खास सीख देता है. उनका बड़ा सिर बड़ी सोच और गहरी बुद्धि का प्रतीक माना जाता है, बड़े कान इशारा करते हैं कि हमें सुनने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जबकि उनकी छोटी आंखें एकाग्रता और गहराई से देखने की सीख देती हैं. यही कारण है कि गणेश जी की पूजा भक्तों को सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और सही सोच का महत्व भी सिखाती है.



















