इन दिनों सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर एक गंभीर वीडियो और संदेश तेजी से साझा किया जा रहा है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस इलाके में एक हॉस्टल की इमारत ढह गई है। इस वायरल दावे के सामने आने के बाद से छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है, जिसके चलते इसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी हो गया था। आधिकारिक स्रोतों और प्रशासनिक जांच के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से भ्रामक और असत्य है। सरकारी एजेंसी पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने इस मामले की गहन पड़ताल के बाद साफ कर दिया है कि दुर्घटनाग्रस्त होने वाली इमारत का दिल्ली यूनिवर्सिटी या उसके किसी भी आधिकारिक हॉस्टल से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।
सत्य निकेतन की निजी इमारत का मामला
पड़ताल में यह बात सामने आई है कि जो मकान या इमारत गिरी है, वह वास्तव में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के व्यस्त और रिहायशी इलाके सत्य निकेतन में स्थित एक निजी पेइंग गेस्ट आवास था। यद्यपि यह स्थान दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के भौगोलिक दायरे के काफी नजदीक अवश्य स्थित है, लेकिन प्रशासनिक या शैक्षणिक रूप से इसका विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर इस प्राइवेट पीजी बिल्डिंग को यूनिवर्सिटी का आधिकारिक हॉस्टल बताकर प्रसारित करना लोगों को भ्रमित करने वाला कृत्य है। हालांकि, इमारत के धराशायी होने की यह दुर्घटना पूरी तरह से वास्तविक है और इसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है, जिसे लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस अपनी कार्रवाई में जुटे हुए हैं।
मृतकों की संख्या और पुलिस कार्रवाई
स्थानीय पुलिस से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर रविवार शाम तक 5 तक पहुंच चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में लापरवाही और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बहुत जल्द एक औपचारिक एफआईआर दर्ज की जाएगी। इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार आरोपियों को कानून के शिकंजे में कसने के लिए पुलिस टीमों द्वारा एक साथ कई अलग-अलग संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। दुर्घटनास्थल पर मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान अभी भी युद्धस्तर पर लगातार जारी है, ताकि स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके।
पुरानी इमारत और बेसमेंट में निर्माण कार्य
प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दुर्घटना का शिकार हुई यह इमारत काफी पुरानी स्थिति में थी और इसमें कुल 5 से 6 मंजिलें बनी हुई थीं। इस तरह के पेइंग गेस्ट आवासों के कमरों में सामान्य तौर पर दो या उससे ज्यादा छात्र एक साथ निवास करते थे, जिसके कारण हादसे के वक्त वहां एक बड़ी संख्या में छात्रों के मौजूद होने की गहरी आशंका जताई जा रही थी। इमारत के निचले हिस्से यानी बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य या गतिविधियां चल रही थीं, और उन चल रहे कार्यों तथा इस भयानक इमारत के ढहने के बीच क्या कोई सीधा संबंध था, इस बात का वास्तविक खुलासा विस्तृत तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगा।
घटना की शुरुआती सूचना और रेस्क्यू
पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, दक्षिण कैंपस पुलिस स्टेशन को इस इमारत के ढहने के संबंध में पहली पीसीआर कॉल दोपहर के वक्त लगभग 1:34 बजे प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं और बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन का आगाज कर दिया गया। प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के आधार पर घायलों को चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने और मलबे के नीचे यदि कोई अन्य व्यक्ति फंसा हुआ है तो उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।


















