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उत्तराखंड की पारंपरिक कफली से बदलें रोज का स्वाद, घर पर आसानी से तैयार करें यह गाढ़ी और स्वादिष्ट पालक डिशट्रेंड्स
26 सित॰ 2026, 2:06 pm (37 दिन पहले)· 3

उत्तराखंड की पारंपरिक कफली से बदलें रोज का स्वाद, घर पर आसानी से तैयार करें यह गाढ़ी और स्वादिष्ट पालक डिश

यदि आप सामान्य पालक की सब्जी खाकर ऊब चुके हैं, तो उत्तराखंड की प्रसिद्ध पहाड़ी कफली को ट्राई कर सकते हैं। यह डिश चावल के आटे के इस्तेमाल और खास मसालों से अपनी बेहतरीन गाढ़ी ग्रेवी के लिए जानी जाती है।

रोजमर्रा के भोजन में कुछ हटकर और पारंपरिक स्वाद तलाश रहे हैं, तो देवभूमि उत्तराखंड की मशहूर कफली आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। साधारण सी सामग्री से तैयार होने वाली यह डिश अपनी अनूठी खुशबू और समृद्ध ग्रेवी के कारण भोजन की थाली में एक अलग ही रंग जमा देती है। जिन लोगों को पालक से बनी चीजें पसंद हैं, वे इस पहाड़ी रेसिपी को आजमाकर अपने खाने के अनुभव को पूरी तरह बदल सकते हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाले देसी मसाले और बनाने का पारंपरिक तरीका इसे दूसरी हरी सब्जियों से बिल्कुल अलग खूबी देता है।

इस पारंपरिक रेसिपी को बनाने के लिए किसी लंबी-चौड़ी सामग्री सूची की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजें ही इसके लिए काफी हैं। मुख्य रूप से आपके पास ताजा पालक, टमाटर, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और कसूरी मेथी होनी चाहिए। इसके अलावा स्वाद को संतुलित करने के लिए हल्दी, नमक, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। बगार या छौंक के लिए शुद्ध सरसों का तेल और राई या सरसों के दानों की जरूरत पड़ती है। सबसे खास बात यह है कि इसकी ग्रेवी को मनचाहा गाढ़ापन देने के लिए चावल के आटे का प्रयोग किया जाता है, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देता है।

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स्वाद को असली पहाड़ी जामा पहनाने के लिए मसालों को दरदरा कूटना बेहद जरूरी माना जाता है। अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और कसूरी मेथी को मिक्सी में बारीक पीसने के बजाय सिलबट्टे या पारंपरिक ओखली का उपयोग करके हल्का कुचल लेना चाहिए। मसालों का यह दरदरापन पकने के दौरान अपनी बेहतरीन खुशबू छोड़ता है। इसके बाद कड़ाही में सरसों का तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म किया जाता है और राई के दाने चटकाए जाते हैं। राई तड़कने के बाद तैयार किया हुआ कुटा हुआ मसाला इसमें मिलाया जाता है और खुशबू आने तक भूना जाता है।

मसाला भूनने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें कटे हुए टमाटर डाले जाते हैं और मध्यम आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक वे पूरी तरह गल न जाएं। इसके बाद हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक मिलाकर टमाटर के इस बेस को अच्छी तरह तैयार कर लिया जाता है। इस चरण के बाद कटी हुई और साफ की गई ताजा पालक को कड़ाही में शामिल किया जाता है। पालक को मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाते हुए पकाया जाता है ताकि सभी फ्लेवर आपस में मिल जाएं।

पारंपरिक तरीके में पालक जब पक जाती है तो उसे कड़ाही के अंदर ही मथनी या मधानी की सहायता से अच्छी तरह मैश कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया से ग्रेवी का टेक्सचर बेहद एकसार और मलाईदार हो जाता है। आप चाहें तो पालक को पहले से उबालकर भी यह प्रक्रिया अपना सकते हैं, लेकिन कड़ाही के भीतर मथनी चलाने से इसमें असली देसी अंदाज आता है। इसके बाद ग्रेवी को सही थिकनेस देने के लिए एक अलग बर्तन में चावल का आटा लेकर पानी के साथ उसका एक पतला घोल तैयार किया जाता है, जिसमें बिल्कुल भी गांठें नहीं रहनी चाहिए।

तैयार किए गए चावल के इस घोल को धीरे-धीरे पालक की ग्रेवी में मिलाया जाता है और लगातार करछी चलाई जाती है ताकि कोई गांठ न बने। जरूरत के अनुसार इसमें थोड़ा पानी भी जोड़ा जा सकता है। चावल का आटा मिलाने के बाद ग्रेवी को धीमी आंच पर लगातार पकने दिया जाता है ताकि वह नीचे से न चिपके और सभी चीजें आपस में अच्छी तरह रच-बस जाएं। जब ग्रेवी एकदम गाढ़ी और मनमुताबिक तैयार हो जाए तो गैस बंद कर दी जाती है और ऊपर से बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालकर इसे गरमागरम चावल के साथ परोसा जाता है।

सवाल-जवाब

कफली मुख्य रूप से किस राज्य की पारंपरिक डिश है?
कफली उत्तराखंड की एक पारंपरिक और प्रसिद्ध पहाड़ी डिश है।
कफली की ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए किसका इस्तेमाल किया जाता है?
इसकी ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए पानी में घोले गए चावल के आटे का इस्तेमाल किया जाता है।
कफली बनाने में कौन से मुख्य मसाले और जड़ी-बूटियां डाली जाती हैं?
इसमें मुख्य रूप से ताजा पालक, टमाटर, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और कसूरी मेथी का प्रयोग किया जाता है।
पालक का टेक्सचर एकसार करने के लिए क्या किया जाता है?
पकी हुई पालक को कड़ाही में ही मथनी या मधानी की मदद से मैश किया जाता है।
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