टेलीविजन धारावाहिक अनुपमा की कहानी में इस समय पारिवारिक विवाद और कारोबारी खींचतान अपने चरम पर पहुंच चुकी है। शाह परिवार एक ओर जहां पारंपरिक उल्लास के साथ गणेश चतुर्थी का स्वागत करने की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ सदस्यों के बीच की कड़वाहट खुलकर बाहर आ रही है। आने वाले एपिसोड में कई अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिलेंगे, जहां उत्सव के माहौल के बीच सरिता और अनीता शाह निवास पर अनुपमा से मुलाकात करने पहुंचती हैं। वे दोनों अनुपमा से एक बड़ा वादा मांगती हैं और इसके तुरंत बाद सरिता उसके हाथ में एक रहस्यमयी लिफाफा थमा देती है।
उस अनजान लिफाफे को देखते ही पारितोष बुरी तरह घबरा जाता है। उसके मन में यह आशंका घर कर जाती है कि कहीं इसमें कोई बड़ा या भारी भरकम बिल न हो। हालांकि जैसे ही अनुपमा उस पत्र को निकालकर पढ़ती है, उसके चेहरे के भाव पूरी तरह बदल जाते हैं और वह हक्की-बक्की रह जाती है।
पिता और पुत्र के रिश्ते पर अनुपमा की सीख
कहानी की शुरुआत में अनुपमा और दिग्विजय के बीच एक भावुक बातचीत देखने को मिलती है। अनुपमा उसे माता-पिता और बच्चों के बीच के रिश्ते की अहमियत समझाती है। इसी बातचीत के दौरान दिग्विजय अपनी लाचारी जाहिर करते हुए बताता है कि उसका बेटा रणविजय उससे गहरी नफरत करता है। दिग्विजय की इस पीड़ा को सुनकर अनुपमा उसे सांत्वना देती है और भरोसा दिलाती है कि पावन गणेश चतुर्थी के इस अवसर पर संभवतः उन दोनों के बीच की दूरियां मिट जाएं और उनका मनमुटाव सुलझ जाए।
अनिल और गौतम की तीखी तकरार
इसके पश्चात शाह निवास में पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश का स्वागत किया जाता है। भक्तिमय माहौल के बीच ही व्यावसायिक विवाद अचानक भड़क उठता है। अनिल और गौतम के बीच कंपनी के बहीखातों और वित्तीय हिसाब-किताब को लेकर जोरदार बहस छिड़ जाती है। इस विवाद के दौरान गौतम सारी सीमाएं लांघते हुए अनिल को अपमानित करने लगता है। गौतम दो टूक शब्दों में कहता है कि जब से प्रेम और राही कंपनी में शामिल हुए हैं, तब से संस्था के भीतर अनिल की कोई उपयोगिता या हैसियत नहीं बची है।
वसुंधरा का रवैया और अनिल का घर छोड़ना
इस गहमागहमी के बीच वसुंधरा की मौजूदगी पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे देती है। वह अनिल का पक्ष लेने के बजाय खुले तौर पर गौतम का समर्थन करने लगती है। वसुंधरा अनिल पर गैरजिम्मेदार होने का आरोप लगाती है और उसे पूरी तरह अनप्रोफेशनल करार देती है। वह साफ तौर पर जता देती है कि कारोबार को आगे बढ़ाने और संभालने के लिए गौतम की उपस्थिति कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अपनों के मुंह से इस प्रकार की अपमानजनक बातें सुनकर अनिल भीतर से टूट जाता है। गहरे दुख और अपमान के साए में वह इस घर को हमेशा के लिए छोड़ने का कठोर निर्णय लेता है। यद्यपि गौतम औपचारिकता निभाते हुए उसे रोकने का दिखावा करता है, परंतु आहत अनिल गुस्से में आकर घर से बाहर निकल जाता है।
निवेशक का रहस्य और नई पीढ़ी के सपने
दूसरी तरफ घर के अन्य हिस्से में अनुपमा नए निवेशक के बारे में जानकारी जुटाने के लिए राही और प्रेम से पूछताछ करती है। इस पर राही खुलासा करती है कि वसुंधरा उन्हें किस नए व्यक्ति से मिलवाने वाली है, यह बात अभी तक पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। पूजा-अर्चना के दौरान सभी सदस्य भगवान के सामने अपनी-अपनी मनोकामनाएं रखते हैं। ईशानी और परी भी अपने नए स्टूडियो को लेकर ईश्वर से प्रार्थना करती हैं, लेकिन तभी ईशानी अचानक परी के साथ साझेदारी में काम करने से साफ इनकार कर देती है। इस मतभेद पर परितोष परी को चेतावनी देता है कि उसे वसुंधरा के फैसलों के खिलाफ नहीं जाना चाहिए। इसके विपरीत अनुपमा और किंजल पूरी मजबूती से परी के साथ खड़ी होती हैं और उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती हैं।
मोदक में छिपा रहस्यमयी संदेश
कथाक्रम के अंत में अनुपमा सभी परिजनों के लिए अपने हाथों से बनाए गए विशेष मोदक लेकर आती है। वह सभी को बताती है कि इन मोदकों के भीतर एक गुप्त संदेश छिपा हुआ है। यह बात सामने आते ही पूरे परिवार में उस छिपे संदेश को खोजने को लेकर उत्सुकता बढ़ जाती है। अब आने वाली कड़ियों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरिता द्वारा सौंपे गए लिफाफे के भीतर ऐसा कौन सा दस्तावेज है, जिसने अनुपमा को स्तब्ध कर दिया है।



















