लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में राज्य से मिले मजबूत जनमत के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक नया राजनीतिक दांव चलते हुए समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के लिए एक नया ड्रेस कोड निर्धारित कर दिया है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के दफ्तर में आयोजित बैठक के दौरान छात्र सभा के कार्यकर्ता नीली टी-शर्ट, नीली जींस और लाल टोपी पहने हुए दिखाई दिए।
युवाओं और बहुजन समाज के प्रतीक के रूप में नीला रंग
अखिलेश यादव ने इस बदलाव के पीछे का तर्क स्पष्ट करते हुए कहा कि नीला रंग युवाओं का रंग है, नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है, बहुजन समाज का प्रतीक है और अन्याय के खिलाफ लड़ाई का रंग है। इस बदलाव से पहले भी अखिलेश यादव को कई मौकों पर नीले रंग का गमछा थामे हुए देखा गया था। पारंपरिक रूप से समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता लाल रंग की टी-शर्ट और सफेद पैंट पहनते आए हैं, लेकिन अब इस पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है।
दलित वोट बैंक और बसपा समीकरण पर सियासी नजर
राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव के पीछे की मंशा पर लगातार चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीले रंग को हमेशा से बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और दलित समाज से जोड़कर देखा जाता रहा है। बहुजन समाज पार्टी की पहचान भी नीले रंग से जुड़ी है, जिसमें पार्टी का झंडा और चुनाव चिह्न दोनों शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि नीले रंग को अपनाकर समाजवादी पार्टी युवा और दलित मतदाताओं को सीधे तौर पर अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव साल 2027 के शुरुआती महीनों में होने वाले हैं। समाजवादी छात्र सभा के ड्रेस कोड में किया गया यह बदलाव सीधे तौर पर इसी चुनाव से जुड़ा माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने आज छात्र सभा के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे अगले दो महीनों तक कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों से सीधे संपर्क स्थापित करें। उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव के दौरान लगभग पैंतीस लाख फर्स्ट टाइम वोटर और लगभग दो करोड़ जेन जी वोटर अपनी भूमिका निभाएंगे। एक सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान इंडिया गठबंधन को गैर-जाटव दलित मतदाताओं का लगभग 56 प्रतिशत और जाटव मतदाताओं का करीब 25 प्रतिशत वोट हासिल हुआ था। अब मुख्य सवाल यह बना हुआ है कि क्या केवल नीले रंग का इस्तेमाल करने से अखिलेश यादव को युवाओं और दलित वर्ग का बड़ा समर्थन मिल पाएगा।
पीडीए की नई परिभाषा और भविष्य का विजन
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के खास राजनीतिक समीकरण पीडीए का एक नया अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा कि पीडीए का मतलब प्रेम, दया और अपनापन भी होता है। शुरुआती दौर में इस समीकरण को पार्टी ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के संदर्भ में परिभाषित किया था, लेकिन हाल ही में इसमें पी अक्षर का विस्तार करते हुए इसे पंडितों से भी जोड़ा गया। अपनी बातचीत में उन्होंने यह भी घोषणा की कि यदि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो वे समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं को विदेश के शैक्षणिक संस्थानों और कॉलेजों का दौरा करने के लिए भेजेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नीले रंग में व्यक्ति की उम्र भी कम दिखाई देती है।
सत्ता पक्ष पर तीखा हमला और कानून व्यवस्था के मुद्दे
इस आयोजन से एक दिन पहले अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर विकास कार्यों, बाढ़ की स्थिति और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो खड़े कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत बेहद खराब है। राम वन गमन पथ का जिक्र करते हुए उन्होंने तीखा आरोप लगाया कि हाइवे इसलिए बनाए जा रहे हैं ताकि चुनिंदा लोगों की जेबें भरी जा सकें।



















